इमरान की पार्टी ने कहा, किसी खिलाड़ी और अभिनेता को न्यौता नहीं

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तहरीके इंसाफ़ पाकिस्तान ने इससे इनकार किया है कि उन्होंने इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण समारोह में किसी विदेशी फ़िल्म स्टार या खिलाड़ियों को आमंत्रित किया है.
पार्टी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में पार्टी के वरिष्ठ नेता फ़ैसल जावेद ने ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स से इनकार किया है.
भारत में आई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण समारोह में सुनील गावस्कर, कपिल देव, अभिनेता आमिर ख़ान और नवजोत सिंह सिद्धू को आमंत्रित किया गया है.
ऐसी रिपोर्टें आने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके इसकी पुष्टि की थी.
इसके बाद बीबीसीके साथ बातचीत में सिद्धू ने यहाँ तक कहा था कि वे इस शपथ ग्रहण समारोह में बुलाए जाने पर बेहद सम्मानित महसूस कर रहे हैं.
सिद्धू ने इमरान के राजनीतिक सफ़र की जमकर तारीफ़ की थी और कहा था कि उन्होंने वर्षों पहले एक पार्टी शुरू की थी और अब उन्हें पीएम का पद मिल रहा है.
वैसे तहरीके इंसाफ़ पाकिस्तान ने ट्वीट करके पहले ही कह दिया था कि इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण समारोह में किसी विदेशी राजनेता को न्यौता नहीं दिया गया है.
ताज़ा प्रेस रिलीज़ में पार्टी के नेता फ़ैसल जावेद ने ये भी कहा है कि शपथ ग्रहण समारोह सादा होगा क्योंकि उनकी पार्टी टैक्सपेयर्स के पैसे का दुरुपयोग नहीं करना चाहती.
इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर 11 अगस्त को इस्लामाबाद में शपथ लेने वाले हैं.
बीबीसी संवाददाता प्रदीप कुमार से बातचीत में सिद्धू ने न्यौते की पुष्टि करते हुए कहा था, "मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं. जिन चार लोगों को बुलाया है, उनमें मैं शामिल हूं. तो मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं."
इतना हीं नहीं सिद्धू ने इमरान ख़ान की करिश्माई छवि को याद करते हुए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातों को भी याद किया.
इमरान की तारीफ़
बतौर राजनेता इमरान ख़ान की कामयाबी के बारे में सिद्धू बताते हैं, "इमरान साब के बीते 20-25 साल को देख लीजिए. आफ़तों ने उन्हें संवारा है, निखारा है. उन्होंने संघर्ष को अपना गहना बनाया. एक पार्टी को शुरू किया और प्रधानमंत्री तक जा पहुंचे. उनकी पूरी यात्रा संघर्षों से भरी है. वे हर मुसीबत में सुर्खरू हुए हैं."
ये भी दिलचस्प है कि 1989 में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ सिद्धू ने पाकिस्तान का दौरा किया था और तब पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान इमरान ख़ान ही थे. ये भी संयोग है कि ये पहला मौका था जब भारतीय टीम ने किसी सिरीज़ का कोई टेस्ट नहीं गंवाया था.
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चार टेस्ट मैचों की इस सिरीज़ के चारों टेस्ट ड्रॉ रहे थे. नवजोत सिंह सिद्धू ने चार टेस्ट मैचों में से तीन में भारत के लिए शानदार बल्लेबाज़ी की थी. वे शतक तो नहीं बना पाए थे, लेकिन सियालकोट में उनकी 97 रन की पारी के चलते भारत टेस्ट के साथ-साथ सिरीज़ बचाने में कामयाब रहा था.
इस सिरीज़ को याद करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू कहते हैं, "घास वाली पिचें थीं. इमरान साब को लगता था कि उन पिचों में भारत के खिलाड़ी इमरान, वसीम अकरम, आकिब को नहीं झेल पाएंगे. लेकिन मैंने संघर्ष को गहना बना लिया था. सियालकोट में भारत के 24 पर चार विकेट गिर गए थे. तेंदुलकर की नाक पर चोट लगी थी. लेकिन उसने शानदार जज्बा दिखाया. हम टेस्ट बचा पाए."

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बतौर कप्तान इमरान ख़ान के योगदान पर सिद्धू कहते हैं, "इमरान ऐसे कप्तान थे जो शानदार खिलाड़ी को असाधारण बना देते थे. वसीम और वकार के पास जूते तक नहीं थे, सीधे टीम में शामिल कर लिया था. इंज़माम को सीधे वर्ल्ड कप में शामिल कर लिया था."
सिद्धू के मुताबिक इमरान ख़ान के सामने चुनौती बहुत बड़ी है, क्योंकि उनके सामने पाकिस्तान को बेहतर मुल्क बनाने की चुनौती है. सिद्धू कहते हैं, "हार को जीत में बदलने वाला क़िरदार इमरान का रहा है. उनकी टीम की स्थिति अच्छी होती थी तो वे सोते थे. जब कठिन परिस्थितियों में टीम होती थी तो वे सबसे आगे होते थे."

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लेकिन सिद्धू ये भी मानते हैं कि इमरान ख़ान के वजीरे आज़म बनने से दोनों देशों के बीच नए रिश्तों की शुरुआत होगी.
सिद्धू कहते हैं, "हमें उम्मीद है कि एक नई शुरुआत करेंगे. बॉर्डर जितने जल्दी खुल जाएं. तिजारत बढ़ जाए. कारोबार जितना बढ़ जाए, उतना अच्छा होगा. लोगों में प्यार बढ़ता जाएगा तभी ये कटुता कम होगी. कोई अमृतसर में साग-मक्के की रोट खाए और लाहौर से बिरयानी खाकर लौट आए."
सिद्धू बताते हैं कि वे गुरु नानक की 550वीं जयंती पर शुरुआत पाकिस्तान के ननकाना साहब से करना चाहते हैं, करतारपुर साहिब कॉरिडोर के अलावा हुसैनीवाला बॉर्डर और वाघा बॉर्डर खुलवाना चाहते हैं. सिद्धू के मुताबिक जब ये बॉर्डर खुलेंगे तभी जाकर दोनों मुल्कों के रिश्ते बेहतर होंगे.
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