प्रेस रिव्यू : यौन हिंसा से बचाव के लिए अब ट्रांसजेंडर गार्ड

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इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ बिहार के एक महिला आश्रय गृहों में ट्रांसजेंडर लोगों को सुरक्षाकर्मी रखा जाएगा.
इन आश्रय गृहों में यौन हिंसा की घटनाओं के मद्देनज़र बिहार सरकार ने ये फ़ैसला किया है.
टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस संस्थान को बिहार के समाज कल्याण विभाग ने इन आश्रय गृहों का ऑडिट करने का काम सौंपा था.
संस्थान की रिपोर्ट में इन आश्रय गृहों में हो रहे यौन अत्याचार के मामलों का ज़िक्र है.

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बच्ची का 22 लोगों ने किया बलात्कार
जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक चेन्नई में एक 12 साल की बच्ची का उसकी सोसाइटी के 22 लोगों ने बलात्कार किया.
ये लोग 7 महीने तक उसका बलात्कार करते रहे. इनमें गार्ड, माली, प्लमर, लिफ़्ट ऑपरेटर भी शामिल हैं.
बच्ची को कम सुनाई देता है. दिल्ली के कॉलेज में पढ़ने वाली उसकी बड़ी बहन जब शनिवार को अपने घर आई, तब ये भेद खुला.
पुलिस ने 17 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है. जब उन्हें कोर्ट में पेश किया गया तो वकीलों ने उनकी जमकर पिटाई की.

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'भीड़तंत्र पर रोक लगाएं सरकारें'
इकोनोमिक टाइम्स की ख़बर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ की हिंसा और लोगों को पीट-पीट कर मारने की घटनाओं के लिए सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकारों को जवाबदेह बनाया है.
अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया पर गैर-कानूनी और भड़काने वाले संदेशों के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार जल्द क़दम उठाए.
एक जनहित याचिका पर ऐसी घटनाओं की रोकथाम, उपचार और दंडात्मक उपायों का प्रावधान करने के कई निर्देश दिए.

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वैवाहिक बलात्कार पर दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी
अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान वैवाहिक बलात्कार पर टिप्पणी की है.
कोर्ट ने कहा कि शादी का मतलब ये नहीं कि पत्नी हमेशा सेक्स के लिए तैयार बैठी है. शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को सेक्स के लिए इनकार करने का अधिकार है.
कोर्ट ने कहा कि सेक्स के लिए पत्नी के साथ किसी तरह का शारीरिक बल इस्तेमाल करना अपराध है.

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लोकपाल की नियुक्ति पर केंद्र का बयान
नवभारत टाइम्स अख़बार में ख़बर है कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लोकपाल के चयन के लिए पैनल बनाने को लेकर 19 जुलाई को बैठक होगी.
ये बैठक चयन समिति की है जो लोकपाल के नियुक्ति के लिए उचित नामों की सिफ़ारिश करेगी.
लोकपाल चयन समिति के सदस्यों में प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में सबसे बड़े दल के विपक्षी नेता और प्रमुख विधिवेत्ता शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट लोकपाल की नियुक्ति पर 27 अप्रैल 2017 के फैसले की अवमानना को लेकर सुनवाई कर रही थी.
वरिष्ठ वकील शांतिभूषण ने कहा कि 4 साल बाद भी इस सरकार ने लोकपाल की नियुक्ति नहीं की है.
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