प्रेस रिव्यू: 11 मौतों के मामले में 'लेडी तांत्रिक' से पूछताछ

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नवभारत टाइम्स के मुताबिक दिल्ली के बुराड़ी में 11 लोगों की सामूहिक मौत से जुड़े रहस्यों के बीच शुक्रवार को इस मामले में नया मोड़ आ गया, जब क्राइम ब्रांच ने 'तंत्र साधना' के शक में ठेकेदार की बेटी को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.
बुराड़ी के हरित विहार में गीता माता के नाम से चर्चित यह महिला अपने ही विरोधाभासी बयानों में फंस गई. ये उसी ठेकेदार कुंवर पाल की बेटी है, जिसने भूतिया बन चुके मकान की दीवारों पर 11 पाइप लगाए थे.
हिरासत में ली गई गीता गुरुवार को एक स्टिंग ऑपरेशन में दावा करती हुई दिखाई दी कि 7 जुलाई को (यानी आज) ललित तांत्रिक क्रिया के लिए उससे मिलने वाला था, लेकिन उससे पहले ही पूरे परिवार की मौत हो गई. महिला बुराड़ी एरिया में ही अपने पिता से दूर ससुराल में रहती है. गीता ने ने तंत्र मंत्र से साफ़ इनकार किया है.
क्राइम ब्रांच के रडार में गीता के आने की दो वजहें बनीं. एक तो ललित के मोबाइल फोन की सीडीआर में लास्ट कॉल ठेकेदार के नंबर पर हुई, दूसरी उसकी तांत्रिक बेटी गीता का स्टिंग ऑपरेशन में दिया गया चौंकाने वाला बयान.
चीफ़ जस्टिस ही मास्टर ऑफ़ रोस्टर

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुख्य न्यायाधीष ही मास्टर ऑफ़ रोस्टर हैं और इसमें कोई विवाद नहीं है. चीफ़ जस्टिस के मास्टर ऑफ रोस्टर के तहत केसों के आवंटन पर सवाल उठाने वाली शांति भूषण की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज किया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान मुख्य न्यायाधीश के मुद्दे पर मौन है लेकिन परपंरा और बाद के फैसलों में सभी द्वारा माना गया है कि चीफ़ जस्टिस सबसे पहले हैं. वरिष्ठतम होने की वजह से उन्हें ये अधिकार है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जवाबदेही के वक्त में रह रहे हैं. तकनीक के वक्त में कोई भी आउटकम आलोचना में बदल सकता है. दुनिया तेजी से बदल रही है लेकिन फंडामेंटल्स नहीं बदलेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक स्तर समेत न्यायिक सुधार जारी रहने वाली प्रक्रिया है. चीफ़ जस्टिस प्रशासनिक मुखिया हैं. याचिकाकर्ता की इस बात को स्वीकार करना मुश्किल है कि केसों के आवंटन में चीफ़ जस्टिस का मतलब कॉलेजियम है.
अंद्राबी एनआईए की हिरासत में

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक आसिया अंद्राबी और दो अन्य कश्मीरी अलगाववादियों को अदालत ने 10 दिन के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में सौंप दिया है. इन आरोपियों को देश के ख़िलाफ़ कथित तौर पर जंग छेड़ने के मामले में एनआईए की हिरासत में सौंपा गया है.
इन तीनों को कड़ी सुरक्षा में श्रीनगर से दिल्ली लाया गया और पटियाला हाउस स्थित जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम बांबा की अदालत में पेश किया गया.
अदालत ने बंद कमरे की सुनवाई में एजेंसी की यह अर्जी मंजूर कर ली कि प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की मुखिया से कश्मीर घाटी में नफरत फैलाने वाला भाषण देने के सिलसिले में पूछताछ किए जाने की जरूरत है.
एनआईए ने अंद्राबी और उसकी दो सहायकों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन की 15 दिन के लिए हिरासत मांगी थी, हालांकि अदालत ने दस दिन रिमांड मंजूर की.
अयोध्या मामले की सुनवाई में देरी की कोशिश

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष पर अयोध्या राम जन्मभूमि मालिकाना हक मामले की अपीलों की सुनवाई लटकाने का आरोप लगाया.
प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सालिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने 1994 के इस्माइल फारुखी फ़ैसले में मस्जिद को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा न मानने के अंश को पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ को भेजने की मुस्लिम पक्ष की मांग का विरोध किया.
मेहता ने कहा कि इतने दिन बाद इस तरह की मांग उठाना ठीक नहीं है इससे इन लोगों की मंशा पता चलती है. अयोध्या जन्मभूमि मालिकाना हक के मामले की अपीलें सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन ये लोग उसे लटकाने का प्रयास कर रहे हैं.
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