जगन्नाथ मंदिर में दर्शन की राह होगी आसान

Preists of Jagnnath Temple, Odisha

इमेज स्रोत, BISWARANJAN MISHRA

    • Author, संदीप साहू
    • पदनाम, भुवनेश्वर, बीबीसी हिंदी के लिए

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के प्रबंधन में सुधार के लिए पुरी ज़िला जज के प्रस्तावों को लागू करने का निर्देश दिया है.

एक जनहित याचिका की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार सुनिश्चित करे कि श्रद्धालुओं के साथ मंदिर में कोई ज़बरदस्ती ना हो.

सुप्रीम कोर्ट में इस जनहित याचिका की सुनवाई जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने की. इस जनहित याचिका में मंदिर के भीतर पंडों की मनमानी का भी मुद्दा उठाया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज़िला जज ने मंदिर प्रबंधन में सुधार के लिए जो सिफ़ारिशें की हैं उन्हें लागू किया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ज़िला जज की रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार को कोई आपत्ति है तो अपनी आपत्ति दर्ज कराए.

इससे पहले, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद के 18 मार्च को प्रभु जगन्नाथ के दर्शन के दौरान उनके साथ सेवायतों द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने का मामला भी मीडिया में आ चुका है.

ज़िला कोर्ट ने कहा था कि थाली और कलश में किसी से दान लेना अवैध है. कोर्ट के संज्ञान में यह बात भी लाई गई थी कि बड़ी संख्या में विदेशी पुरी इस मंदिर को देखने आते हैं, लेकिन ग़ैर-हिन्दू होने कारण उन्हें अंदर नहीं आने दिया जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन से ग़ैर-हिन्दुओं को भी मंदिर के अंदर जाने देने पर विचार करने के लिए कहा है.

Jagnnath temple, Odisha

इमेज स्रोत, BISWARANJAN MISHRA

'दान-दक्षिणा पर पंडों का कोई हक़ नहीं'

अदालत ने यह भी साफ़ किया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावों पर पंडों का कोई अधिकार नहीं है. यह बात और है कि राज्य सरकार पर भारी पड़ चुके पंडे सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की समीक्षा के लिए अर्जी डालने की तैयारियों में जुट गए हैं.

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखिका प्रतिभा राय कई सालों से पंडों की मनमानी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती आ रही हैं. प्रतिभा ख़ुद भी पंडों की मनमानी और हमले का शिकार हो चुकी हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का समर्थन करने वाली प्रतिभा ने लोगों से अपील की है वो दान सिर्फ़ हुंडी में ही डालें. अगर फिर भी ज़बरदस्ती जारी रहती है तो अंदर जाने के बजाय बाहर से ही दर्शन करके आ जाएं.

प्रतिभा राय का मानना है कि पंडों की पारिवारिक उत्तराधिकार की व्यवस्था ख़त्म होनी चाहिए और उन्हें योग्यता के आधार पर नियुक्त किया जाना चाहिए.

Pratibha Ray, author

इमेज स्रोत, SANDEEP SAHOO

उन्होंने कहा, "तिरुपति मंदिर की तरह बाक़ायदा पंडों का इंटरव्यू करके देखा जाना चाहिए कि उनके पास ज़रूरी शिक्षा और शिष्टाचार है या नहीं. योग्यता साबित होने पर उन्हें मासिक वेतन पर नियुक्त किया जाना चाहिए."

नाम ज़ाहिर न होने की शर्त पर मंदिर प्रबंधन समिति के एक सदस्य ने बीबीसी को बताया कि ये पंडे मंदिर में आए चढ़ावों को तो लेते ही हैं, साथ ही सरकार भी उन्हें अनौपचारिक रूप से काफ़ी पैसे देती रहती है.

ख़ासकर रथयात्रा, नवकलेवर और बाकी ख़ास मौक़ों पर यह रक़म करोड़ों तक जाती है.

आख़िर सरकार पंडों को इतने पैसे देती क्यों है?

भुवनेश्वर में रहने वाली भारती कहती हैं, "पंडे भक्तों की भावनाओं का फ़ायदा उठाकर सरकारों को ब्लैकमेल करते हैं और इसीलिए सरकारें डर से उनके सामने घुटने टेक देती हैं."

Narendra Modi, Jagnnath temple

इमेज स्रोत, BISWARANJAN MISHRA

'फ़ायदा उठाते हैं सेवक'

वरिष्ठ पत्रकार और जगन्नाथ संस्कृति के जानकार असित महन्ती कहते हैं, "जिस तरह जगन्नाथ जी एक नायाब किस्म के देवता हैं, उसी तरह जगन्नाथ मंदिर के रीति-रिवाज़ भी नायाब हैं. यहां की रीति के अनुसार जिस सेवक की सेवा निर्धारित है, उस दिन वही सेवा कर सकता है, कोई और नहीं और सेवक इसी बात का फ़ायदा उठा लेते हैं."

जगन्नाथ मंदिर की इस प्रथा का परिणाम कितना गंभीर हो सकता है इसका उदाहरण अप्रैल के आख़िर में देखने को मिला.

एक दिन मंदिर की रसोई में सेवा के लिए नियुक्त सेवक अपने परिवार में किसी की मौत की वजह से सेवा नहीं कर सका तो मंदिर की परंपरा के अनुसार भक्तों के लिए बने 50 लाख रुपये का महाप्रसाद मंदिर के अहाते में बने 'कोड़ली वैकुंठ' में दफ़ना दिया गया.

सरकार चाहे कोई भी हो पुरी के जगन्नाथ मंदिर पर राज इन्हीं पंडों का चलता है. अब देखना है कि सुप्रीम कोर्ट के दख़ल के बाद इन पर कोई अंकुश लगता है या नहीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)