राजस्थान में आरक्षण को लेकर गुर्जर बीजेपी से नाराज़

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- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का मुद्दा फिर सतह पर आ गया है. राज्य की बीजेपी सरकार ने गुर्जर और चार अन्य जातियों के लिए एक फ़ीसद आरक्षण का क्रियान्वन पुख्ता करने का आदेश जारी किया है लेकिन गुर्जर नेता इससे खुश नहीं है.
गुर्जर आरक्षण आंदोलन से जुड़े नेताओ ने कहा है वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का प्रयास करेंगे. मोदी सात जुलाई को जयपुर आ रहे है.
राज्य सरकार तब हरकत में आई जब गुर्जर नेताओं ने फिर से आंदोलन की चेतावनी दी.
राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री अरुण चतुर्वेदी मीडिया से मुखातिब हुए और कहा प्रक्रियागत वजह से कुछ आदेश नहीं निकल पाए. अब एक प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी बनाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं.
चतुर्वेदी ने आरक्षण की दिशा में बीजेपी सरकार के प्रयासों की जानकारी दी और कहा कि सरकार ने अपने स्तर पर कोई कमी नहीं छोड़ी है.
गुर्जर नेताओं ने यह मुद्दा ऐसे वक्त उठाया है जब बीजेपी सरकार प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों में जुटी हुई है. गुर्जर नेताओं ने जब विरोध तेज़ करने की बात कही तो राज्य सरकार यकायक सक्रिय हो गई.

सड़क पर उतरने की चेतावनी
गुर्जर आरक्षण आंदोलन समिति के हिम्मत सिंह ने बीबीसी से कहा, "सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. एक महीने पहले सरकार से बातचीत में सोलह बिंदु तय हुए थे. मगर इसके बाद उन बिन्दुओं पर कोई प्रगति नहीं हुई. हम चुप नहीं बैठेंगे. हमारे बच्चे नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के लाभ से वंचित हो रहे हैं. हम मोदी से मिलने के लिए समय मांगेंगे. ज़रूरी हुआ तो फिर सड़कों पर आएंगे."
राजस्थान में अभी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति और पिछड़े वर्ग के लिए 49 प्रतिशत आरक्षण है. सरकार ने एक प्रतिशत आरक्षण गुर्जर समेत पांच जातियों के लिए तय कर दिया है. इससे आरक्षण पचास फ़ीसदी हो गया है.
पिछले एक दशक में जब-जब सरकार ने इसे बढ़ाने के लिए क़ानून लागू किया, उसे तात्कालिक रूप में सराहना मिली. मगर हर बार ऐसे किसी भी प्रस्ताव को अदालत ने उलट दिया क्योंकि ये कानूनी रूप से आरक्षण की स्वीकार्य पचास प्रतिशत सीमा का उल्लंघन करता है.
कांग्रेस प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने मीडिया से कहा, " पहले बीजेपी ने ऐसे क़ानून को संविधान की नवीं अनुसूची में दर्ज कराने की बात कही थी ताकि उसे चुनौती नहीं दी जा सके. मगर बीजेपी अपनी इस प्रतिबद्धता पर खरी नहीं उतरी."
अर्चना शर्मा ने सवाल किया, "जब केंद्र और राज्य दोनों में बीजेपी की सरकार है तो फिर क्या दिक्क्त है."

अलग-अलग सुर
इस साल 19 मई को जयपुर में बीजेपी सरकार और गुर्जर नेताओं के बीच आरक्षण को लेकर बैठक में एक समझौता हुआ था. मगर गुर्जर नेता हिम्मत सिंह कहते है, "इस समझौते को जमीन पर उतारने में सरकार ने कुछ नहीं किया."
उधर, बीजेपी प्रवक्ता मुकेश चेलावत कहते हैं कि सरकार और गुर्जर नेताओं के बीच बातचीत के अच्छे नतीजे निकले है और समुदाय बातचीत से संतुष्ट है.
गुर्जर नेता हिम्मत सिंह कहते है, "देव नारायण योजना पर कोई खास प्रगति नहीं हुई. हालात से हम मायूस हैं."
गुर्जर नेता पिछड़ा वर्ग आरक्षण में श्रेणी विभाजन की भी मांग कर रहे हैं. इसके लिए वे उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हैं. लेकिन पिछड़ा वर्ग में शामिल प्रभावशाली जातियां ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. राज्य में छह माह बाद चुनाव हैं.
प्रेक्षक कहते हैं कि सरकार कैसे भी करके यह वक्त निकालना चाहती है ताकि तब तक कोई भी वर्ग नाराज न हो.लेकिन गुर्जर नेता अपने मुद्दे के लिए चुनावी मौसम ही ठीक मान रहे है.
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