कैराना, नूरपुर में कैसे ख़राब हुईं सैकड़ों ईवीएम

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीटों पर चल रहे मतदान के बीच बड़े पैमाने पर ईवीएम मशीनों के ख़राब होने की शिकायतें आ रही हैं.
समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने इस बारे में चुनाव आयोग से लिखित शिकायत की है. कई जगह काफी देर तक मतदान बाधित रहा और मतदान न कर पाने के कारण कई लोग वापस घरों को भी लौट गए.
मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और ईवीएम मशीनों में ख़राबी कि शिकायतें कुछ देर बाद से ही आने लगीं. मशीनों में ख़राबी की वजह से शामली शहर में चार बूथों पर आठ बजे तक मतदान ही शुरू नहीं हो पाया.
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वहीं नकुड़ के स्कूल में बनाए गए मतदान केंद्र पर जब मतदान काफी देर तक बाधित रहा तो धूप में इंतज़ार करने के बाद दर्जनों मतदाता बिना मतदान किए ही वापस चले गए.
समाजवादी पार्टी ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग से लिखित शिकायत की है.
आनन-फ़ानन में लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस की और मीडिया को इसकी जानकारी दी.
राजेंद्र चौधरी का कहना था कि मशीनों में ख़राबी जानबूझकर कराई गई है, "सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पहले ही कहा था कि चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं लेकिन जानबूझकर मशीनों को ख़राब किया गया है ताकि लोग मतदान न कर पाएं. ये मशीनें उन्हीं जगहों पर ख़राब क्यों हो रही हैं जहां ये
पता है कि बीजेपी को लोग बिल्कुल वोट नहीं ख़रीदेंगे."
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चुनाव आयोग ने भी मशीनों के ख़राब होने की पुष्टि की है. उत्तर प्रदेश के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी रत्नेश सिंह ने बीबीसी को बताया, "दोनों ही जगहों से मशीनों के ख़राब होने की शिकायतें मिली हैं.
हम लोगों ने स्थानीय प्रशासन से भी रिपोर्ट मांगी है. ज़्यादातर जगहों पर वीवीपैट की ख़राबी की शिकायत
थी. मशीनों को तुरंत ठीक करा दिया गया है. अभी भी जहां दिक्कत होगी, उन्हें ठीक कराया जाएगा."
रत्नेश सिंह कहते हैं कि मशीनों में ख़राबी ज़रूर थी लेकिन ये इतना बड़ा मामला नहीं है कि इसकी वजह से पूरा मतदान प्रभावित हो रहा है. उनके मुताबिक ज़्यादा गर्मी की वहज से वीवीपैट में ख़राबी आ रही है.
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वहीं कैराना लोकसभा सीट से राष्ट्रीय लोकदल की उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने ईवीएम मशीनों में ख़राबी की लिखित शिकायत चुनाव आयोग से की है.
उनका कहना है कि अकेले कैराना में क़रीब डेढ़ सौ मशीनें ख़राब हैं. हालांकि निर्वाचन आयोग के पास अभी ख़राब मशीनों के अधिकृत आंकड़े नहीं हैं.
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