वाराणसी पुल हादसा: 'लोग मदद करने की जगह वीडियो बना रहे थे'

वाराणसी पुल हादसा

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मंगलवार शाम को उत्तर प्रदेश के वाराणसी कैंट इलाक़े में निर्माणाधीन फ़्लाईओवर का स्पेन गिरने से 18 लोगों की मौत हो गई थी.

हालांकि, स्थानीय लोग मृतकों की संख्या अधिक बता रहे हैं. हादसे के अगले दिन बाद भी घटनास्थल पर राहत कार्य जारी है.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे बुधवार को वाराणसी में घटनास्थल पर पहुंचे और वहां चश्मदीदों से बात की.

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'40 से 50 लोग दबे हुए थे'

सलीम नाम के एक चश्मदीद ने बताया कि जब हादसा हुआ तो वह भागकर वहां पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि ये हादसा मंगलवार शाम 5.35 बजे हुआ था.

"गार्डर (बीम) जब गिरा तो काफ़ी गाड़ियां उसमें दब गईं. प्रशासन तब तक नहीं पहुंचा था लेकिन इलाक़े के लड़कों ने ख़ुद से ही बचाव कार्य शुरू कर दिया था. एक शख़्स नई गाड़ी ख़रीदकर जा रहा था, वह भी उसकी चपेट में आ गया. उसकी गर्दन दबी हुई थी लेकिन हम उसे हौसला देते रहे कि हम उसे बचा लेंगे."

"लोग मदद करने की जगह वीडियो बना रहे थे, एक महिला को बचाने गए तो उसने अपने बच्चे को बचाने को कहा लेकिन इस दौरान दोनों की मौत हो गई."

"इस घटना में 40 से 50 लोग दबे हुए थे और जो 16 से 18 लोगों के मारे जाने की ख़बर बताई जा रही है, वो कम है क्योंकि चार-पांच लोग बचे हैं और सब मर गए हैं."

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सलीम
इमेज कैप्शन, एक चश्मदीद सलीम

यहां रोज़ाना जाम लगना आम बात है...

वाराणसी कैंट में चौकाघाट-लहरतारा फ़्लाईओवर के विस्तार का काम अक्तूबर 2015 से चल रहा था.

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है जिसके कारण यहां रोज़ाना जाम लगता था.

एक चश्मदीद ने बताया कि जब भी नेता यहां आते हैं तब जाम हट जाता है लेकिन इसके बाद यहां रोज़ाना जाम लगना आम बात है.

कई चश्मदीदों का कहना है कि पूरे एक घंटे के बाद प्रशासन बचाव कार्य के लिए आया लेकिन इससे पहले यहां के स्थानीय निवासियों ने लोगों को बचाना शुरू कर दिया था.

चश्मदीदों ने प्रशासन पर बचाव के दौरान लापरवाही का आरोप लगाया है. डेढ़ किलोमीटर से अधिक लंबे फ़्लाईओवर का काम 30 महीने में पूरा होना था.

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फ़्लाईओवर के नीचे कोई घेराबंदी नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान फ़्लाईओवर के नीचे कोई बैरीकेटिंग नहीं की गई थी.

बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कई स्थानीय लोगों ने कहा कि इस हादसे के बाद भी अभी तक सुरक्षा के लिए कोई क़दम नहीं उठाए गए हैं.

लोगों का कहना है कि फ़्लाईओवर के नीचे कोई घेराबंदी नहीं है जिससे इसके नीचे खड़े होने से डर लग रहा है.

जहां यह हादसा हुआ वह रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के नज़दीक है और वहां से रोज़ाना हज़ारों लोग निकलते हैं.

एक स्थानीय व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि यहां काम करने वाले लोगों को भी सुरक्षा के कोई उपकरण नहीं दिए गए थे.

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राज बब्बर का प्रधानमंत्री पर हमला

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है.

इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख जताया और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे थे.

बुधवार को कांग्रेस नेता राज बब्बर घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि यह सरासर लापरवाही और संवेदनहीनता का मामला है.

उन्होंने कहा, "चार अधिकारियों को निलंबित करके ज़िम्मेदार लोग अपना पल्ला झाड़ना चाहते हैं."

"देश भर में अगर कहीं भी ऐसी कोई घटना हुई होती तो वहां का सांसद अपने क्षेत्र में होता लेकिन यहां के सांसद कर्नाटक की जीत का जश्न मना रहे हैं."

वार

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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के पास निर्माण का ज़िम्मा था

कांग्रेस विरोध प्रदर्शन करेगी...

राज बब्बर ने कहा, "मोदी जी ने यह शोर मचाया था कि गंगा माई ने बुलाया है."

"यहां लोग मारे जा रहे है और वहां विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त में करोड़ों रुपये लगाए जा रहे हैं जबकि मृतकों की कीमत पांच लाख रुपये लगाई जा रही है."

"जहां-जहां प्रदेश में बिना सुरक्षा के ऐसे कार्य हो रहे हैं उसको लेकर कांग्रेस विरोध प्रदर्शन करेगी."

उन्होंने कहा कि मृतकों को 50 लाख और घायलों को 20 लाख रुपये दिए जाने चाहिए.

प्रधानमंत्री के दुख जताने पर एक स्थानीय व्यक्ति ने बीबीसी से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दुख जताने से कुछ नहीं होगा जो गया है, वो वापस नहीं आएगा.

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