कर्नाटक: अब 'हॉर्स-ट्रेडिंग' और 'रिजॉर्ट सियासत' की एंट्री

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- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कर्नाटक विधानसभा चुनाव नतीजों के साफ़ होने के साथ ही अटकलों का सिलसिला भी बढ़ने लगा है.
भाजपा फ़िनिशिंग लाइन पहुँच कर भी नहीं जीती, कांग्रेस ने 16 मंत्री हारने के बाद भी बमुश्किल 'इज़्ज़त बचाई' और जनता दल सेक्युलर ने पोल पंडितों की 'लाज' रख ली.
सरकार किसकी बनेगी से ज़्यादा क़यास इस पर हैं कि सरकार बनेगी कैसे. और यहीं से शुरू होती है बहस राजनीतिक सौदेबाज़ी यानी 'हॉर्स-ट्रेडिंग' की.
मैकमिलन डिक्शनरी के मुताबिक़ 'हॉर्स-ट्रेडिंग' शब्द का जन्म 19वीं सदी के शुरुआती सालों में हुआ था.



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'सट्टेबाज़ी' के आरोप-प्रत्यारोप
घोड़े के व्यापारी इसकी खरीद-फ़रोख़्त में 'मुश्किल लेकिन ग़लत सौदेबाज़ियाँ' करने लगे थे. 20वीं और 21वीं सदी में दायरा बढ़ कर राजनीति में पहुँच चुका था.
शायद चंद लोगों ने फिलॉसफ़र मैकियावेली के इस वाक्य को दिल में बैठा लिया था, "राजनीति का नैतिकता से कोई रिश्ता नहीं."
लौटते हैं कर्नाटक की 'घुड़-दौड़" पर जहाँ रेस के पहले की 'सट्टेबाज़ी' के आरोप-प्रत्यारोप आने शुरू हो चुके हैं.
जेएडीएस नेता कुमारास्वामी ने भाजपा पर 'प्रति विधायक 100 करोड़ की रकम' देकर विधायक खरीदने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे सिरे से खारिज डाला है.
"इनका 100 या 200 करोड़ रुपये की बात करना काल्पनिक है. हम लोग हॉर्स-ट्रेडिंग में यकीन नहीं रखते. ये कांग्रेस और जेएडीएस का तरीका होगा."


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फिर लौटा वो पल
जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने भी बुधवार को इशारा कर दिया है, "भाजपा छोड़ लोग हमारे पास आने को इच्छुक हैं. अगर वे एक को तोड़ेंगे तो हम दो तोड़ेंगे."
इसके पहले कर्नाटक से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री और 700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की दौलत वाले डीके शिवकुमार ने इस बात से कन्नी नहीं काटी थी कि पार्टी का 'अपने विधायकों के लिए कोई प्लान है.'
उन्होंने एक समाचार एजेंसी से कहा था, "अपने विधायकों की रक्षा हम ज़रूर करेंगे. समय आने पर बताया जाएगा."
दरअसल डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश बेंगलुरु से बाहर बसे उस 'मशहूर' ईगलटन गॉल्फ़ रिसॉर्ट्स के मालिक हैं जिसकी चर्चा 2017 से ज़्यादा ही शुरू हुई .

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रिजॉर्ट की सियासत
राज्यसभा चुनावों के दौरान गुजरात के कुछ कांग्रेसी विधायकों के बाग़ी होने के बाद 44 कांग्रेसी विधायक यहाँ ला कर रखे गए थे.
यही है मुद्दा रिजॉर्ट की सियासत का और कर्नाटक में ये पल फिर आ चुका है.
ख़बरें हैं कि कांग्रेस अपने विधायकों को किसी रिजॉर्ट में पहुंचा सकती है जिससे वे 'हॉर्स-ट्रेडिंग' की लौ से बच सकें.
ईगलटन के अलावा बॉलीवुड हस्ती संजय खान के गोल्डन पाम रिजॉर्ट्स का भी नाम चर्चा में है.
इसके पहले के पिछले कुछ रिजॉर्ट की सियासत वाले ऑपरेशनों की बात हो, ये भी देख लें कि यहाँ विधायक लोग करते क्या हैं.

रिजॉर्ट में आखिर विधायक करते क्या हैं
तो ज़्यादातर रिजॉर्टों में गोल्फ़ खेलने से लेकर स्विमिंग पूल तक बेहतरीन इंतेज़ाम होते हैं और बेंगलुरु के दोनों रिजॉर्ट्स में भी मौजूद है.
विधायक यहाँ जिम में कसरत कर शाम को कॉन्टिनेंटल रेस्तरां और बार के भी लुत्फ़ उठा सकते हैं.
मसला बस एक ही होता. ज़्यादातर का बाहरी दुनिया से संपर्क थोड़ा 'मॉनीटर्ड' रहता है यानी अगल-बगल मोबाइल फ़ोनों से लैस दफ़्तरी नहीं होते.
एक दूसरे प्रदेश के मौजूदा भाजपा विधायक ने बताया कि "इंटरनेट और कॉल करने पर लगाम कसी रहती है."
अब ज़रा रिसॉर्ट की सियासत पर गौर फ़रमाइए.

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... तो फिर पार्टियों का निशाना कहां है
कर्नाटक के रामकृष्ण हेगड़े, आंध्र प्रदेश में एनटी रमा राव, महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख, तमिलनाडु में शशिकला और खुद बीएस येदयुरप्पा पर ऐसा करने के आरोप लगते रहे हैं.
फिलहाल राजनीती में दौर कुछ ऐसा ही आया हुआ लगता है और वो भी डंके की चोट पर.
महाभारत में गुरु द्रोण ने कौरवों और पाण्डवों को पेड़ पर निशाना लगाने को कहा और सबसे पूछा, क्या दिख रहा है?
किसी को पेड़ का तना दिखा तो किसी को पट्टी, टहनी और पेड़ पर बैठी चिड़िया दिखी. अर्जुन को सिर्फ पेड़ पर बैठी चिड़िया की आँख दिखी थी.
कर्नाटक में भाजपा और कॉंग्रेस-जेडीएस के नए गठबंधन को चिड़िया की आँख की जगह विधान सभा में 112 का आंकड़ा दिख रहा है.
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