कर्नाटकः बदामी सीट से क्यों चुनाव मैदान में उतरेंगे सिद्धारमैया?

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
आख़िरकार कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बदामी विधानसभा सीट से उतारने के फ़ैसले पर मुहर लगा दी है ताकि उत्तर कर्नाटक के कई निर्वाचन क्षेत्रों में इसका फायदा उठाया जा सके.
सिद्धारमैया चामुंडेश्वरी सीट से शुक्रवार को पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं. दक्षिण कर्नाटक के अपने गृह ज़िले की इसी विधानसभा सीट से वो पहली बार 1983 में चुने गए थे.
लेकिन पार्टी आलाकमान शुरू में उनके इस फ़ैसले को लेकर असहज था लेकिन बाद में बागलकोट के बदामी सीट से उन्हें मैदान में उतारने के स्पष्ट फ़ायदे नज़र आए.
अकेले चामुंडेश्वरी से लड़ने को लेकर पार्टी आलाकमान की बेचैनी इसलिए भी थी क्योंकि कभी उनके नेता और समर्थक रहे जनता दल (एस) के देवेगौड़ा ने उन्हें हराने का शपथ लिया है.

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हालांकि पांच बार वरुणा से जीतने वाले सिद्धारमैया के अपने बेटे डॉ. यतींद्र के लिए यह सीट खाली करने के बाद वो देवेगौड़ा और उनके बेटे एच डी कुमारस्वामी की चुनौती का सामना करने के लिए दृढ़ बने हुए हैं.
लहर का असर होगा
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "हां, मुख्यमंत्री बदामी से मंगलवार को अपना पर्चा भरेंगे. उनके वहां से लड़ने से हमें बागलकोट, विजयपुरा, बिदर और उत्तर कर्नाटक के अन्य ज़िलों में लहर का असर देखने को मिलेगा."
सिद्धारमैया ने खुद ही भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और कर्नाटक के प्रभारी मुरलीधर राव के कन्नड़ में किए ट्वीट के जवाब में लिखा कि वो दो जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं.
सिद्धारमैया ने लिखा, "पूरे कर्नाटक में जिस नेता को पसंद किया जाता है वो राज्य में कहीं भी लड़ने से डरता नहीं. दोनों सीटों पर जनता मेरा भाग्य तय करेगी, आप इसकी चिंता न करें. लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने आपको कन्नड़ में ट्वीट करना सीखा ही दिया."
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उन्होंने कन्नड़ वाली बात इसलिए लिखी क्योंकि पहले मुरलीधर राव ने हिंदी में ट्वीट किया था जिसका सिद्धारमैया ने कन्नड़ में जवाब दिया, "कृपया कन्नड़ या अंग्रेज़ी में ट्वीट करें. मान्यवर, हम हिंदी नहीं समझते."
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मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को इस इलाक़े से उतारने से कांग्रेस को बागलकोट और विजयपुरा ज़िलों में फैले 15 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में इसके प्रभाव की उम्मीद
पार्टी के एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, "जिस कुरुबा समुदाय (चरवाहा समुदाय) से सिद्धारमैया आते हैं, उनकी उत्तर कर्नाटक के कई निर्वाचन क्षेत्रों में अच्छी संख्या है. कम से कम 15 हज़ार मतों से, यह आंकड़ा बदामी में 65 हज़ार और मुदाबिहाल में 70 हज़ार से अधिक है."
उनकी आबादी उन संख्याओं में उत्तर कर्नाटक के बेलगावी, धारवाड़ और उत्तर कर्नाटक में हावेड़ी और सेंट्रल कर्नाटक में दावणगेरे में फैली हुई है.
दक्षिण कर्नाटक के कई निर्वाचन क्षेत्रों के अलावा इस समुदाय से जुड़े मतदाता भी मैसूर ज़िले के चामुंडेश्वरी और वरुणा में फ़ैले हुए हैं.
भाजपा प्रवक्ता डॉ. वामन आचार्य ने कहा, "वो चामुंडेश्वरी से जीत चुके हैं क्योंकि पहले वो एच. डी. देवेगौड़ा के साथ थे. तब उनके साथ ए. एच. विश्वनाथन भी थे, जो अब जनता दल (एस) में हैं. उन्हें अपने पूर्व प्रचार मैनेजर जी. टी. देवेगौड़ा का सामना भी करना है. उन्हें अलग अलग समुदायों का कोई समर्थन नहीं प्राप्त है."
डॉ. आचार्य का संदर्भ वोकलिग्गा समुदाय के क़रीब 70 हज़ार मतदाताओं को लेकर है. हालांकि कांग्रेस के नेता कहते हैं कि अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग, दलित का कन्नड़ में शॉर्ट फॉर्म) वोट सिद्धारमैया के पक्ष में एकजुट हैं, ठीक उसी तरह जैसे वोकालिग्गा वोट जनता दल (एस) के पक्ष में संगठित थे.

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डॉ. आचार्य का मानना है कि यहां तक कि बदामी में भी मुख्यमंत्री आरामदायक स्थिति में नहीं हैं. उन्होंने राजनीतिक हलकों में हो रही इस चर्चा को ख़ारिज कर दिया कि सिद्धारमैया को बदामी में भी भाजपा के वाल्मिकी आदिवासी चेहरे श्रीरामुलु से कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा.
श्रीरामुलु अवैध खनन घोटाले के आरोपी जनार्दन रेड्डी के करीबी सहयोगी हैं. जो तब मौजूद थे जब श्रीरामुलु ने मोलाकालमुरु निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दायर किया. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा भी उस दौरान वहां उपस्थित थे.
डॉ. आचार्य कहते हैं, "हम बदामी से स्थानीय उम्मीदवार (के. एम. पट्टानशेट्टी) को सिद्धारमैया के ख़िलाफ़ मैदान में उतारेंगे. अभी तक येदियुरप्पा या श्रीरामुलु को बदामी से उतारने की कोई योजना नहीं है. हालांकि, अंतिम निर्णय कल या उसके एक दिन बाद लिया जाएगा."
दूसरी तरफ, काँग्रेस के लोगों को भरोसा है कि मुख्यमंत्री को बदामी में ज़्यादा प्रचार नहीं करना पड़ेगा. एक वरिष्ठ पार्टी नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, "वह अन्य चुनाव क्षेत्रों में प्रचार पर फोकस कर सकेंगे."
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