नज़रियाः क्या आधार चुनाव के नतीजे भी प्रभावित कर सकता है?

आधार, सुप्रीम कोर्ट, नज़रिया, यूआईडीएआई, मतदान, चुनाव

इमेज स्रोत, HUW EVANS PICTURE AGENCY

    • Author, रितिका खेड़ा
    • पदनाम, अर्थशास्त्री, बीबीसी हिन्दी के लिए

सुप्रीम कोर्ट ने आधार डेटा लीक को गंभीर बताते हुए कहा है कि यह चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है. आधार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की.

चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच जजों की पीठ ने कहा कि आधार के डेटा के दुरुपयोग की आशंकाएं सही हैं.

कोर्ट का कहना था कि डेटा के इस्तेमाल से चुनाव के नतीजों पर असर डाला जा सकता है.

क्या आधार से वाकई चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सकता है? क्या अलग-अलग जगहों पर आधार को लिंक करने से हमारे निजी जीवन पर असर पड़ेगा और क्या होगा जब हमारे सभी डेटा आधार से जुड़ जाएंगे.

आधार, सुप्रीम कोर्ट, नज़रिया, यूआईडीएआई

हमारे जीवन के हर पहलू से जब एक ही नंबर लिंक हो जाएगा और अगर आधार इसी रूप में जारी रहा तो जिस तरह से कैंब्रिज एनालिटिका वालों के हमारे डेटा को प्रभावित करने की बात सामने आई है उसी तरह की गुंजाइश यहां पर भी बनेगी.

चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना भी एक डर है, लेकिन उससे भी ज़्यादा अलग-अलग तरह के डर हैं. अगर हमारी ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं की जानकारी अन्य लोगों के हाथों में हो तो लोन, इंश्योरेंस, मेडिकल पॉलिसी ख़रीदने की प्रक्रिया में हमें प्रभावित किया जा सकता है.

इस पर विदेशों में कई रिसर्च हो चुके हैं कि कुछ टूल्स के ज़रिए आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस, डेटा माइनिंग का इस्तेमाल अच्छे काम के लिए किया जा सकता तो बुरे काम के लिए भी किया जा सकता है. इसमें टारगेटेड विज्ञापन एक ख़तरा है.

कंपनियां इनकी मदद सिर्फ़ अपना सामान बेचने के काम में ही नहीं लेंगी, उनको तो पैसे से ही मतलब है. अगर वो चुनाव प्रक्रिया बाधित कर पैसे कमा सकती हैं तो उन्हें इससे भी गुरेज़ नहीं होगा.

केवल आधार के नंबर दिए जाने की समस्या नहीं है. डर इस बात का है कि हम कहां काम करते हैं, इसकी जानकारी उससे लिंक होगी, कहां जाते हैं, किस तरह के लोगों से बातें करते हैं, फ़ेसबुक पर किनसे हमारी दोस्ती है, हम वहां क्या पोस्ट करते हैं.

अगर ज़िंदगी के उन सारे पहलुओं को आधार से जोड़ दें तो हम इनके बीच एक बांध बना रहे हैं. हमें लगेगा कि हम तो आधार नंबर बैंक या मोबाइल कंपनियों को दे रहे हैं, लेकिन कंपनियों के लिए मुमकिन हो जाएगा कि वो इसके मेटा डेटा को आगे अपने लाभ के लिए बेच सकें.

आधार, सुप्रीम कोर्ट, नज़रिया, यूआईडीएआई, मतदान, चुनाव

चुनाव पर प्रभाव कैसे पड़ेगा?

आधार से सभी जुड़ जाएंगे तो हमारे अकाउंट में कितना पैसा आता है, हम कहां ख़र्च करते हैं, कहां जाते हैं, ट्रेन या प्लेन में किसका इस्तेमाल करते हैं, किताबें ख़रीदते हैं या फ़िल्में देखते हैं - इसकी जानकारी कंपनियों तक एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध हो जाएगी.

कंपनियां इन सभी को जोड़कर यह निष्कर्ष निकाल सकती हैं कि अमुक व्यक्ति का वोट किसको जाएगा, वो अपना मन बदलेगा या नहीं. अभी ये जानकारियां अलग-अलग जगहों पर हैं, लेकिन आधार से जुड़ने के कारण एक प्लेटफ़ॉर्म पर एकत्र हो जाएंगी और कंपनियों के लिए हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को जानना आसान होगा.

यूआईडीएआई की ओर से वकील ने कोर्ट को कहा कि गूगल जैसी संस्थाएं आधार को सफल नहीं होने देना चाहतीं. ये बातें बेतुकी हैं. स्मार्ट कार्ड होगा तो उससे गूगल को क्या फ़ायदा?

जब यह योजना शुरू की गई थी तो कहा गया था कि इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा और अब इसे ज़बरदस्ती लागू करने की कोशिशें हो रही हैं.

आधार, सुप्रीम कोर्ट, नज़रिया, यूआईडीएआई, मतदान, चुनाव

इमेज स्रोत, Getty Images

अनिवार्यता हटाना ज़रूरी

आधार योजना से अनिवार्यता हटानी होगी. जो आधार से हटना चाहते हैं उन्हें यह सुविधा भी दी जानी चाहिए. इसके जो ख़तरे हमें आज समझ में आ रहे हैं और एक सहमति बन रही है कि हमने ग़लत काम कर दिया है तो इसे ख़ारिज किए जाने में कोई हर्ज नहीं है.

कहा गया था कि आधार से व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन उल्टा नुकसान हो रहा है. यह लोकतंत्र की बात है, इसे अनिवार्य नहीं होना चाहिए और आधार से बाहर निकलने की सुविधा दी जानी चाहिए. अगर ये दो सुविधाएं हो जाएंगी तो जो इसे जबरदस्ती करके लागू करवा रहे हैं उनकी ख़ुद की रुचि इसमें ख़त्म हो जाएगी.0

स्मार्टफ़ोन से भी हमारी बहुत-सी जानकारियां आज माइन की जा रही हैं. सिर्फ़ आधार से ख़तरा नहीं है, स्मार्टफ़ोन भी डेटा माइनिंग का काम कर रहा है. हमें हमारे डेटा को स्मार्टफ़ोन जैसे टूल के ज़रिए भी माइन होने से बचाने की ज़रूरत है.

वीडियो कैप्शन, आधार के कारण विकलांग को नहीं मिल रहा राशन

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)