तेलुगू अभिनेत्री श्रीरेड्डी ने सबके सामने कपड़े क्यों उतारे

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- Author, पदमा मीनाक्षी
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी तेलुगू सेवा
"अपनी लड़ाई में मैं बेसहारा हूं क्योंकि मेरा दर्द किसी को दिखाई नहीं दे रहा जिसकी वजह से मुझे इतना बड़ा क़दम उठाना पड़ा और मैंने सार्वजनिक तौर पर कपड़े उतारे."
ये कहना है तेलुगू फ़िल्म अभिनेत्री श्रीरेड्डी मल्लिडी का.
तेलुगू फ़िल्म उद्योग में कथित यौन उत्पीड़न के खिलाफ़ अपना विरोध जताते हुए पिछले हफ़्ते हैदराबाद के फ़िल्म नगर में मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन के आगे श्रीरेड्डी ने अपने कपड़े उतार दिए थे.
श्रीरेड्डी का कहना है कि अपनी बात सुनाने के लिए और सरकार से अपनी मांगों पर जवाब लेने के लिए उनके पास यही एक रास्ता बच गया था.
वह सवाल उठाती हैं,"जब फिल्मी दुनिया के लोग मुझे मेरी नग्न तस्वीरें और वीडियो भेजने को कहते हैं तो फिर मैं सार्वजनिक तौर पर ही कपड़े क्यों ना उतार दूं."
क्या सस्ती लोकप्रियता के लिए उठाया कदम?
श्रीरेड्डी ने अपना करियर एक स्थानीय टीवी चैनल में प्रेज़ेंटर के तौर पर शुरू किया था. पांच साल बाद ही वे फिल्मों में काम करने लगीं. उन्होंने कुछ तेलुगू फ़िल्मों में छोटे-मोटे रोल किए हैं और इस घटना के बाद अचानक सुर्खियों में आ गईं.
अभी तक उन्होंने अपने यौन उत्पीड़न का कोई सबूत पेश नहीं किया है और ना ही वह पुलिस में शिकायत दर्ज करना चाहती हैं.

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इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्होंने ऐसा लोगों का ध्यान खींचने और लोकप्रियता पाने के लिए किया?
क्या मीडिया ने उन्हें 'सस्ती लोकप्रियता' पाने के लिए उकसाया है?
उन्होंने इन दोनों बातों से इनकार किया.
'हम आपको रोल देंगे, बदले में हमें क्या मिलेगा'
तेलुगू फिल्म उद्योग यानी टॉलीवुड, हिंदी और तमिल फ़िल्म उद्योग के बाद सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग है.
केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2015-16 में तेलुगू सिनेमा ने 269 फ़िल्में बनाईं.
'कास्टिंग काउच' बड़ा मुद्दा है, लेकिन अक्सर इसे छिपा लिया जाता है और फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग इस पर खुलकर बात नहीं करते हैं.
तेलुगू फ़िल्म अभिनेत्री माधवी लता ने 2017 में बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न अभिनेता और अभिनेत्रियों से एक सवाल के ज़रिए शुरू होता है. वो सवाल होता है, "अगर हम आपको फ़िल्म में रोल देते हैं तो बदले में हमें क्या मिलेगा"?

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एक नई गीतकार श्रेष्ठा ने भी चौंकाने वाली बात बताई कि हर बार पुरूषों की तरफ़ से ही नहीं बल्कि महिलाओं की तरफ़ से भी इस तरह की ख़तरनाक मांग होती है. अपने निजी अनुभव को याद करते हुए वो बताती हैं कि एक बार एक प्रोड्यूसर की पत्नी ने उनसे उनके पति की सेक्सुशअल मांग को मानने के लिए कहा था.
हॉलीवुड में भी हार्वी वाइंस्टीन के ख़िलाफ़ आरोप सामने आए थे और सबसे पहली बार न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख से इसके बारे में पता चला था. इसके बाद लगातार कई महिलाएं सामने आईं और वाइंस्टीन के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए. हालांकि, वह उन आरोपों को ख़ारिज करते रहे.
श्रीरेड्डी का तरीका गलत या सही?
अब श्रीरेड्डी को मूवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन ने प्रतिबंधित कर दिया है.
संगठन के अध्यक्ष शिवाजी राजा ने बीबीसी को बताया कि उन्हें ग़लत व्यवहार के आधार पर प्रतिबंधित किया गया है. वे पूछते हैं कि श्रीरेड्डी ने पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की और वह केवल प्रचार के लिए बिना किसी सबूत के बात कर रही हैं.

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तेलुगू फ़िल्म निर्मात दग्गुबत्ती सुरेश बाबू ने कहा है कि श्रीरेड्डी ने जिस तरह से अपनी असहमति व्यक्ति करने का तरीका अपनाया है इसने भारत की सभी महिलाओं का अपमान किया है.
मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन की सदस्यता की मांग के अलावा श्रीरेड्डी ने कहा कि सरकार को फ़िल्म स्टूडियो को बंद कर देना चाहिए. उनका आरोप है कि इनमें अवैध गतिविधियां होती हैं और कथित तौर पर उनका बलात्कार भी वहीं हुआ.
श्रीरेड्डी के पूरे प्रकरण पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं.
महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था महिला चेतना की सचिव कट्टी पद्मा का कहना है, "फ़िल्म उद्योग में यौन उत्पीड़न मौजूद है. हालांकि, उन्होंने जिस तरह का क़दम उठाया उसकी वजह से हम श्रीरेड्डी के साथ खड़े नहीं हो सकते हैं.

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हालांकि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना समर्थन श्रीरेड्डी को दिया है.
वैजंयती वसंत मोगली एक जानी-मानी ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता हैं जो उनके समर्थन में आईं हैं.
अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में वे लिखती हैं, "उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री में साहस के साथ यौन उत्पीड़न के बारे में बात करके इतिहास रचा है जैसा पहले कभी होते नहीं देखा था. हॉलीवुड के 'मी टू' कैंपेन के बाद यौन उत्पीड़न और हिंसा को लेकर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के स्टैंड का सबको इंतज़ार है और उम्मीद है कि भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री भी इससे कोई समझौता नहीं करेगी. ये कहना कि ये तो हर जगह होता है, एक सुरक्षित काम करने की जगह निश्चित करने की ज़िम्मेदारी से भागना है."
श्रीरेड्डी के विरोध जताने के इस कदम से फ़िल्म इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है.
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