कर्नाटक: अमित शाह पर भारी पड़े दलितों के सवाल

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े द्वारा संविधान को लेकर दिए गए बयान पर कर्नाटक में भाजपा को दलितों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है.
अनंत हेगड़े ने बीते साल दिसंबर में कर्नाटक में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि पार्टी सत्ता में है और वो संविधान बदलने के लिए ही सत्ता में आई है.
मामला कुछ ऐसा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मैसुरु में 12 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करने पहुंचे थे. प्रचार अभियान के दौरान वो दलित नेताओं से मुलाक़ात करने पहुंचे जहां अनंत हेगड़े की टिप्पणी के विरोध में लोग नारेबाज़ी करने लगे.
'तो मंत्रालय में क्यों हैं हेगड़े?'

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अमित शाह से इस बारे में सवाल किया गया. वहां सभा में मौजूद 300 लोगों के सामने उन्होंने कहा कि हेगड़े के बयान से भाजपा का कोई नाता नहीं है. लेकिन अमित शाह के पल्ला झाड़ने वाली ये सफाई देने के बाद दलित संगठन समिति के एक नेता ने अमित शाह से पूछा कि ऐसा है तो उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर क्यों नहीं निकाला गया.
दलित नेता चोरानल्ली शिवन्ना ने सभा में कहा, "आपने हमें चर्चा के लिए बुलाया था. आप कहते हैं कि भाजपा हेगड़े के उस बयान का समर्थन नहीं करती. तो फिर वो केंद्रीय कैबिनेट में क्यों हैं? अगर ये भाजपा का छिपा एजेंडा नहीं है तो आपने उन्हें कैबिनेट से बाहर क्यों नहीं किया?"
दलित संस्थाओं के प्रतिनिधि डॉक्टर जवारप्पा और मैसुरु विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ़ डेवेलेपमेंट स्टडीज़ के सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर टीएम महेश ने शिवन्ना और शाह के बयानों की पुष्टि की है.
नारेबाज़ी भी हुई

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बाद में शिवन्ना ने बीबीसी को बताया, "मैंने उनसे सीधा सवाल किया कि आप उनके बयान का समर्थन नहीं करते तो वो आपकी कैबिनेट में क्यों हैं. हमारे कई सवालों के लिए उनके पास कोई उत्तर नहीं था."
ये मुद्दा तब उठा जब पूर्व सांसद और भाजपा सदस्य श्रीनिवास प्रसाद ने इस ओर इशारा किया कि हेगड़े का बयान दलितों को दबाने जैसा है.
अमित शाह के असंतोषजनक जवाबों के बाद ऑडिटोरियम में दलित नेता शिवन्ना और अन्य लोग नाराज़ हो गए और वहां नारेबाज़ी शुरु हो गई. इसके बाद शिवन्ना और कुछ और लोगों को ऑडिटोरियम से बाहर कर दिया गया.
उठा महिला आरक्षण का भी मसला

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अमित शाह ने सभा में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पूर्व कांग्रेस सरकार की तुलना में दलितों के लिए कहीं अधिक काम किया है. लेकिन उनके इस दावे का कोई असर पड़ता नहीं दिखा. सभा में मौजूद अकादमिकों समेत कई लोगों ने विभिन्न मुद्दों पर अमित शाह को घेरा.
डॉक्टर जवारप्पा बताते हैं, "एमफिल के एक छात्र ने उनसे महिला आरक्षण विधेयक के बारे सवाल किया. इसके उत्तर में अमित शाह ने कहा कि वो एक ऐसे विधेयक के लिए सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो महिलाओं के पक्ष में हो."

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प्रोफ़ेसर महेश कहते हैं, "हम में से कईयों को सवाल करने की इजाज़त ही नहीं ही गई. मैं पूछना चाहता था कि क्या स्टार्ट-अप इंडिया के तहत योग्यता के मानदंड को बदला जा सकता है. फिलहाल इसे 25 करोड़ रुपये रखा गया है. कितने दलित इस रकम की व्यवस्था कर सकते हैं? लेकिन मुझे ये सवाल करने का मौक़ा ही नहीं दिया गया."
अमित शाह ने सभा में कहा, "कांग्रेस ने बार-बार डॉक्टर बीआर आंबेडकर का अपमान किया है. उन्हें भारतरत्न से तभी सम्मानित किया गया जब कांग्रेस सत्ता में नहीं थी. "

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अमित शाह मैसुरु राजपरिवार के प्रमुख श्रीकांत दत्ता नरसिम्हाराजा वडियार की पत्नी प्रमोदा देवी को भी समझाने में विफल रहे.
बताया जा रहा है कि सुत्तूर मठ के स्वामीजी के साथ उनकी बैठक में सिद्धारामैया सरकार के लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा देने के संबंध में भाजपा के पक्ष पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए गए.












