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रामनवमी के जुलूस में 'शंभूलाल रैगर' की झांकी
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
ये रामनवमी का उत्सव था. झांकियों में राम दरबार सजा तो उसमें सीता, लव-कुश, शिव, ब्रह्मा और अनेक देवी देवता शामिल थे. ये त्रेता युग का चित्रण था. लेकिन कलयुग आते-आते इन्हीं झांकियों में एक व्यक्ति को रथ पर शंभूलाल रैगर बनाकर बैठा दिया गया.
रैगर पर राजस्थान के राजसमंद में एक प्रवासी मजदूर अफ़राजुल की हत्या का आरोप है. रैगर अभी जोधपुर जेल में बंद है. पुलिस इस घटना की जाँच कर रही है.
राजस्थान के जोधपुर में उस दिन धूप खिली खिली थी और भगवान राम की शोभा यात्रा में राम के जयकारे लग रहे थे. राम के साथ झांकियों में रामभक्त हनुमान भी थे जिनके मंदिर पर बनारस में बिस्मिल्लाह ख़ान शहनाई बजाते थे.
जिस पर हत्या का आरोपउसका महिमामंडन
आयोजकों के मुताबिक़ रामनवमी के दिन जोधपुर में 350 झांकियां निकाली गईं. आयोजक नहीं जानते कि इनमें से एक झांकी शंभूलाल रैगर की भी थी. इस झांकी के सूत्रधार हरी सिंह पंवार शिव सेना के नेता हैं.
उन्हें इस पर कोई पछतावा नहीं. बल्कि वे कहते हैं ये झांकी लव जिहाद के ख़िलाफ़ हिंदुओं को जागरूक करने के लिए सजाई गई थी.
शोभा यात्रा में हिंदू देवी देवता इन झांकियों में अपने अवतार के रूप में महिमामंडित थे. झांकियों का स्वागत करने शहर के कई गणमान्य लोग भक्ति भाव से उपस्थित थे.
हिंदू चेतना जगाने का प्रयास!
इन्हीं झांकियों में से एक टैक्टर पर विजयी मुद्रा में शंभूलाल रैगर की झांकी सजी थी.
इसमें शंभूलाल रैगर को उन्हीं कपड़ों में दिखाया गया था जो उसने कथित रूप से अफ़राजुल की हत्या के दिन पहन रखा था.
शिव सेना नेता पंवार कहते हैं, "लव जिहाद की घटनाएं बढ़ रही हैं. वे इस झांकी के ज़रिए हिंदुओं में चेतना पैदा करना चाहते थे."
इक़बाल के शब्दों में राम
ये उस भगवान राम की शोभा यात्रा थी जिन्हें कभी अल्लामा इक़बाल ने इमामे हिन्द कह कर संबोधित किया और कहा- "है राम के वजूद पर हिंदोस्तां को नाज़, अहले नज़र समझते हैं उन्हें इमामे हिन्द."
राम के प्रति एक आस्था इक़बाल के शब्दों में है एक आस्था इस झांकी में है. इस शोभा यात्रा का आयोजन हिंदू संगठनों ने किया था.
रैगर की किसी को ख़बर नहीं
आयोजन समिति के महामंत्री और विहिप के धर्म प्रसारक शैलेंद्र भदौरिया कहते हैं, ''उन्हें शंभुलाल रैगर की झांकी की कोई ख़बर नहीं थी. उन्हें तो ये मीडिया से ही पता चला. अगर मीडिया उसी समय बता देता तो ऐसी झांकी को निकाल बाहर किया जाता.
पुलिस आयुक्त अशोक राठौड़ ने बीबीसी से कहा, 'वीडियो की प्रमाणिकता की जाँच की जा रही है. इसके बाद जो भी विधि सम्मत कार्रवाई होगी, की जाएगी.'
ये शोभा यात्रा जोधपुर के प्रमुख मार्गों से होकर गुज़री और हर सिर श्रद्धा से झुकता चला गया. इनमें कोई राजनेता था, कोई साधुसंत तो कोई सांसारिक प्राणी. लेकिन रैगर की झांकी किसी आंख को नज़र नहीं आई.
राम तोड़ते नहीं
ये उस राम की झांकी थी जो गाँधी के भजनों में सद्भाव और प्रेम का पैगाम देते थे.
गाँधी जब रघुपति राघव राजा राम गाते, धर्म मजहब और जात पांत की दीवारें गिर जाती थी.
गांधीवादी कार्यकर्ता और राजस्थान समग्र सेवा संघ के अध्यक्ष सवाई सिंह कहते हैं, 'ये सुन कर मुझे बहुत धक्का लगा है. ये राम के नाम का आपराधिक दुरुपयोग है. राम तो सौहार्द और समन्वय के प्रतीक हैं. राम जोड़ते हैं तोड़ते नहीं.
राम अपने लंबे वनवास में विकट और विपरीत परिस्थितियों से गुजरे. मगर हमेशा मर्यादा का पालन करते रहे. हालात कितने ही दुश्वार हों, उनके अनुगामी और भक्तों ने भी मर्यादा का तटबंध नहीं तोड़ा. मगर ये झांकी तो उस दर्शन से उलट है.
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