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ब्लॉग: क्या शंभूलाल रैगर हिंदुत्व के 'लोन वुल्फ़' हैं?
- Author, राजेश जोशी
- पदनाम, रेडियो एडिटर. बीबीसी हिंदी
सफ़ेद जूते, सफ़ेद जींस, गुलाबी क़मीज़, घुंघराले बाल, करीने से कटी हुई दाढ़ी, महंगा चश्मा और गले में सफ़ेद झक गमछा.
आठ दिसंबर को राजस्थान के राजसमंद शहर में मौत ने ये रूप धरा था.
लेकिन मज़दूरी करके पैसा कमाने के लिए बंगाल के मालदा ज़िले से राजसमंद पहुँचे अफ़राजुल को तब तक इसका एहसास नहीं हुआ जब तक गैंती का एक भरपूर वार उनकी पीठ पर नहीं पड़ गया.
शंभूलाल रैगर या शंभू भवानी की नज़र से देखें तो अफ़राजुल की पीठ पर गैंती से किया गया वार "हिंदुओं पर हो रहे ज़ुल्म" का बदला था. ये हिंदुओं की बहू-बेटियों को "प्रेम जाल में फँसाकर मुसलमान बनाने" की साज़िश के ख़िलाफ़ किया गया प्रहार था. ये कश्मीर को भारत से अलग करने की "इस्लामी साज़िश" का बदला था. ये 'पीके' और 'पद्मावती' जैसी फ़िल्मों के विरोध का संप्रेषण था. ये चार-चार शादी करके "ढेर सारे बच्चे पैदा करके अपनी जनसंख्या बढ़ाने" की मुसलमानों की साज़िश का बदला था.
हिंदुवादी संगठनों की शिकायतें
याद कीजिए कि ये सभी शिकायतें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के नेता और सांसद अक्सर किसी न किसी रूप में करते रहे हैं. इनमें लालकृष्ण आडवाणी से लेकर नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ से लेकर साक्षी महाराज और प्रवीण तोगड़िया से लेकर उमा भारती और साध्वी निरंजन ज्योति तक सभी शामिल हैं.
हिंदू समाज को एकजुट करके हिंदू अस्मिता की रक्षा करना संघ और उसके आनुषंगिक संगठनों का घोषित लक्ष्य है. बाबरी मस्जिद तोड़कर उसकी जगह भव्य राम मंदिर बनवाने, गौहत्या पर पाबंदी लगाने, घर-वापसी, लव-जिहाद जैसे मुद्दे इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उठाए जाते रहे हैं ताकि व्यापक हिंदू समाज को गोलबंद किया जा सके.
शंभूलाल रैगर का इनमें से किसी संगठन से संबंध का कोई सबूत अभी तक सामने नहीं आया है. पर वो निश्चित तौर पर हिंदुत्व की विचारधारा के असर में आ चुके उन अनगिनत नौजवानों में से एक हैं जो पूरी तरह आश्वस्त हैं कि हिंदुओं के दुश्मन सिर्फ़ और सिर्फ़ मुसलमान हैं. इस बात के सबूत के तौर पर वो सोशल मीडिया के ज़रिए फैलाए जाने वाली वीडियो क्लिप्स दिखाते हैं जिनमें गाय-बछड़ों को ज़िबह करते हुए दिखाया जाता है - ये बताए जाने पर उन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि ये वीडियो किसी इस्लामी देश में ईद की क़ुर्बानी के दिन बनाया गया था.
ये हिंदुत्व के नए 'लोन वुल्फ़' हैं - यानी ऐसा भेड़िया जो अकेले शिकार करता है.
ये शब्द पश्चिमी देशों में उन अपराधियों और आतंकवादियों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है जो एक ख़ास विचारधारा से प्रभावित होकर अपने दुश्मन को चिन्हित करते हैं और उस पर हमला कर देते हैं. पर ऐसे लोगों का किसी संगठन से संबंधित होना ज़रूरी नहीं होता. इनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं होता.
लोन वुल्फ़
'लोन वुल्फ़' मनोविज्ञान पर लंबे अर्से से काम कर रहे अमरीकी विशेषज्ञ जो नावार्रो मानते हैं कि ऐसे लोग सदियों पुराने या ताज़ा ज़ख़्मों को इकट्ठा करते रहते हैं. उनके पास नाइंसाफ़ियों की एक फ़ेहरिस्त होती है और मौक़ा मिलते ही वो इन नाइंसाफ़ियों या पुराने ज़ख़्मों का हिसाब चुकाने के लिए हत्या तक कर डालते हैं.
लंदन में रहने वाले माइकल अडेबोलाजो और माइकेल अडेबोवेल भी "मुसलमानों पर पश्चिमी मुल्कों के ज़ुल्मों" की एक फ़ेहरिस्त इकट्ठा कर चुके थे. नए नए मुसलमान हुए ये दो नौजवान पूरी तरह आश्वस्त थे कि इस्लामी दुनिया पर ज़ुल्म की इंतहा हो चुकी है और अमरीका-ब्रिटेन की सरकारें और फ़ौजें इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.
उन्होंने 22 मई 2013 को दक्षिण-पश्चिमी लंदन के वुलिच इलाक़े में सड़क पर चल रहे एक गोरे ब्रितानी फ़ौजी ली रिग्बी पर पहले कार चढ़ाई और फिर उन्हें तेज़ धार वाले गंडासे से काट कर उसकी सरेआम हत्या कर दी.
फिर शंभूलाल रैगर की तरह उनमें से एक ने वहीं सड़क पर खड़े होकर एक वीडियो रिकॉर्ड करवाया जिसमें उसने ली रिग्बी की हत्या की वजह बताई और कहा: "आज हमने इस आदमी को सिर्फ़ इसलिए मारा है क्योंकि ब्रिटिश फ़ौजी रोज़ाना मुसलमानों को मार रहे हैं. तुम्हें क्या लगता है जब हम अपनी बंदूक़ें चलाएँगे तो सड़क पर डेविड कैमरन (तत्कालीन ब्रितानी प्रधानमंत्री) को गोली लगेगी? तुम क्या सोचते हो नेता मारे जाएँगे? नहीं, ये तुम और तुम्हारे बच्चों की तरह के आम लोग होंगे."
रिग्बी की हत्या के लिए माइकल अडेबोलाजो और माइकेल अडेबोवेल को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई. पर क्या ये दोनों मुसलमान नौजवान पेशेवर अपराधी थे? लंदन से छपने वाले अख़बार की एक रिपोर्ट में उनको जानने वाले लोगों ने "विनम्र और अच्छे लोग" बताया.
शंभूलाल पर किसका प्रभाव?
यही सवाल राजसमंद में शंभूलाल रैगर से सहानुभूति रखने वाले लोग भी पूछ रहे हैं - क्या शंभू भवानी कोई अपराधी था? उसने जो कुछ किया, अपने लिए नहीं किया. लोग यक़ीन ही नहीं कर पा रहे हैं कि जिस आदमी ने कभी किसी को थप्पड़ तक नहीं मारा, वो कैसे एक ज़िंदा आदमी को गैंती से ठौर मारकर फिर उसे ज़िंदा जला सकता है. शंभूलाल के पड़ोसी उन्हें एक विनम्र नौजवान के तौर पर जानते हैं.
हिंदू समाज के नाम जारी किए गए शंभूलाल के एक वीडियो में उनकी नन्हीं बेटी नज़र आती हैं जिसका मानसिक विकास ठीक ढंग से नहीं हो पाया है. शंभूलाल के पड़ोसी बताते हैं कि वो इस बच्ची को हमेशा अपने पास रखते थे, यहाँ तक कि उन्होंने अपनी इस बच्ची को जेल में भी अपने साथ रखे जाने की गुज़ारिश की है.
शंभूलाल के वीडियो में वो कोई ग़ुस्सैल और अपराधी प्रवृत्ति के क़तई नज़र नहीं आते. बल्कि, वीडियो रिकॉर्ड करते हुए बीच बीच में अपनी बच्ची के चौगिर्द अपनी बाँह का घेरा बनाए रखते हैं.
अपनी बच्ची से बेपनाह दुलार करने वाला यही शख़्स उस वीडियो में किसी शातिर बिल्ली की तरह अपने शिकार के पीछे पीछे कुछ क़दम दबे पाँव चलता नज़र आता है.
कुछ ही देर में गैंती की एक ज़ोरदार चोट पड़ने पर आगे चल रहा बंगाली मज़दूर अफ़राजुल गिर पड़ता है और उसका आर्तनाद उस बियाबान में गूँजने लगता है - "मर गए, मर गए, मर गए." फिर वो अपने हत्यारे से गिड़गिड़ा कर प्रार्थना करता है - "बाबू, जान बचाओ, बाबू जान बचाओ!" पर हमलावर ने गैंती के वार नहीं रोके. अफ़राजुल वहीं निश्चेष्ट गिर पड़ा.
हत्या के अभियुक्त शंभूलाल रैगड़ ने फिर अपना एक वीडियो रिकॉर्ड करके ऐलान किया: "मैंने किया है चाहे अच्छा है ग़लत है मुझे जैसा लगा मैंने किया है. मैं अपने देश के क़ानून की पूरी इज़्ज़त करता हूँ. अगर मेरे को मरना ही था, क्यों नहीं मार के मरूँ. हर बार हमीं क्यों मरेंगे इनसे…. कल सुबह मेवाड़ राजसमंद रामेश्वर महादेव के मंदिर में सरेंडर करूँगा."
लंदन के 'लोन वुल्फ़'
ये ठीक वैसा ही बयान है जैसे लंदन में मुसलमान नौजवान ने ब्रितानी फ़ौजी रिग्बी की हत्या करने के बाद दिया था - "आज हमने इस आदमी को सिर्फ़ इसलिए मारा है क्योंकि ब्रिटिश फ़ौजी रोज़ाना मुसलमानों को मार रहे हैं" और शंभूलाल में इतनी समानता कैसे?
शंभूलाल रैगर भी एक साल से बेरोज़गार थे. स्थानीय लोग कहते हैं कि वो दिनभर गाँजा पीते थे और मोबाइल पर आने वाले वीडियो देखते रहते थे. लंदन का माइकेल अडेबोवेल भी किंक मारियुआना का आदी था. शंभूलाल को हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के ज़ख़्म इकट्ठा कर रखे थे. लंदन के माइकल अडेबोलाजो और माइकेल अडेबोवेल ने कहा कि वो मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों का बदला ले रहे हैं.
पिछले कुछ बरसों में लव-जिहाद, घर वापसी, गोहत्या, कश्मीर, इस्लामी कट्टरवाद, धर्मांतरण, कश्मीरी अलगाववाद और आतंकवाद जैसे बारूदी मुद्दों का एक भीषण मिक्सचर तैयार कर दिया गया है. ये विस्फोटक स्मार्ट फ़ोन और सोशल मीडिया के ज़रिए एक एक आदमी तक पहुँचाया जा रहा है.
आपके पड़ोस का कोई भी "पारिवारिक, विनम्र और मृदुभाषी" व्यक्ति इस बारूदी गोले में कभी भी पलीता लगा सकता है. थोड़ा कुरेद कर बात कीजिए तो आपको कई शंभूलाल रैगर उर्फ़ शंभू भवानी मिल जाएँगे.
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