'बबुआ' पहुंचे 'बुआ' के घर, सियासी हलकों में बदलाव के संकेत

अखिलेश और मायावती

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उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव जीतने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहली बार मायावती के घर पहुंचें.

उनके घर जाने से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने जीत के लिए बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती को विशेष धन्यवाद कहा.

जीत के बाद मायावती के घर की तरफ जाने वाली सड़कें गुलजार हो गईं. अखिलेश करीब 7 बजे वहां पहुंचे.

वो अपनी गाड़ी से उतरें और सीधे मायावती के घर के अंदर चले गएं. दोनों नेताओं की मुलाकात करीब एक घंटे चली.

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इस मुलाकात को सियासी हलकों में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. कयासों का दौर शुरू हो गया है कि आगामी 2019 के आम चुनावों में ये जोड़ी भाजपा के लिए कड़ी चुनौती पेश करेंगे.

मायावती ने दोनों क्षेत्रों के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मदद की है. दोनों के साथ आने का असर यह हुआ कि सूबे के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के गढ़ सपा की झोली में जा गिरे.

दोनों के साथ की ताकत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अति आत्मविश्वास को हार की वजह बताई.

सपा की जीत

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योगी को हुआ ताकत का अंदाज़ा

उन्होंने कहा कि इस ताकत को समझने में कहीं न कहीं उनसे कोई भूल हुई. उन्होंने इस हार को सबक की तरह लेने की बात कही.

इससे पहले योगी आदित्यनाथ को गुजरात और त्रिपुरा में भाजपा की जीत का श्रेय दिया जा रहा था.

उन्हें कर्नाटक में पार्टी के प्रचार के लिए भेजा जा रहा था, लेकिन अब इस हार ने योगी को समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है.

मायावती और अखिलेश की मुलाकात के बाद ये लगा था कि दोनों एकसाथ आएंगे और आगामी चुनावों को लेकर कुछ बड़ा ऐलान करेंगे.

मोदी और योगी

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पर ऐसा नहीं हुआ. राजनीति को समझने वाले ये मान रहे हैं कि यह सबकुछ समय आने पर किया जाएगा.

मायावती से मिलने के पहले अखिलेश यादव ने इस जीत को समाजिक न्याय की जीत बताई. उन्होंने इसके लिए भाजपा के खिलाफ लड़ने वाली तमाम पार्टियों, जिन्होंने उनके जीतने में मदद की, को धन्यवाद कहा.

उन्होंने एनसीपी और वाम पार्टियों के सहयोग का भी जिक्र किया.

जीत के बाद सपा और बसपा के नेता और कार्यकर्ता उत्साहित दिखें और 2019 में मजबूत गठबंधन उम्मीद की. वे "बुआ" और "बबुआ" ज़िंदाबाद के नारे भी लगाते नजर आएं.

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