काठमांडू विमान हादसे की आँखों-देखी

इमेज स्रोत, PRAKASH MATHEMA/Getty Images
नेपाल में सोमवार को हुए दर्दनाक विमान हादसे ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है.
इस विमान हादसे के बारे में मिली ताज़ा जानकारी के अनुसार, अब तक 49 लोगों की मौत की पुष्टि हो सकी है. कई गंभीर रूप से घायल लोगों का काठमांडू में इलाज चल रहा है.
इस दुर्घटना में बचे लोगों और चश्मदीदों ने उन पलों के बारे में बताया है जब विमान क्रेश हुआ.
कुछ चश्मदीदों के मुताबिक़ एक ज़ोरदार धमाका हुआ और विमान तेज़ी से हिलने लगा. इसके तुरंत बाद अंदर बैठे लोगों की चीख-पुकार साफ़ सुनाई देने लगी थी.
'हुआ ज़ोरदार धमाका'
दुर्घटनाग्रस्त हुआ विमान 17 साल पुराना बॉम्बार्डियर डैश 8 Q400 टर्बोप्रॉप था, जिसने बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उड़ान भरी थी. इसका संचालन बांग्लादेशी एयरलाइन 'यूएस-बांग्ला' की ओर से किया जा रहा था.

इमेज स्रोत, PRAKASH MATHEMA/Getty Images
हादसे में बचे एक शख़्स को उस वक़्त लगी आग के बारे में तो याद है, लेकिन ये याद नहीं कि वो किस तरह विमान से बाहर आया.
घायल यात्रियों में से एक केशव पांडे ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "क्रेश के बाद आग लग गई थी. मैं विमान से बाहर आने की कोशिश कर रहा था. लेकिन मेरे हाथ-पैर फंसे हुए थे, जिसकी वजह से मैं बाहर नहीं आ पा रहा था."

इमेज स्रोत, PRAKASH MATHEMA/Getty Images
वो आगे कहते हैं, "मेरी सीट इमरजेंसी गेट के पास थी. इसलिए जब बचावकर्मी आए होंगे और उन्होंने दरवाज़ा खोला होगा तो मैं शायद उससे बाहर गिर गया होउंगा. उसके बाद का मुझे कुछ भी याद नहीं, क्योंकि मैं बेहोश हो गया था."
'उठ रहे थे आग के गुबार'
बांग्लादेश की एक बूढ़ी महिला शिक्षक शरीन अहमद को भी बचाव दल ने जलते विमान से निकाला था. उन्होंने बताया, "बाहर आग के गुबार उठ रहे थे और धुआँ हमारे कैबिन के अंदर आ रहा था. इसके बाद एक धमाका हुआ. इसके बाद आग बुझाई गई और हमें बचाया गया."

इमेज स्रोत, EPA
अस्पताल में भर्ती बसंत बोहरा ने पत्रकारों को बताया, "अचानक से विमान ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगा था और तेज़ आवाज़ें आईं. मैं जिस खिड़की के पास बैठा था, मैंने उसे तोड़ दिया."
सनम शक्या ने विमान की टूटी खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई. उन्होंने बताया, "विमान ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं हो रहा था. मुझे लगा कि ये सब सिर्फ़ एयर ट्रैफ़िक की वजह से हो रहा होगा."
गुरुवार को नेपाल पहुंचेगे परिजन
श्रद्धा गिरि ने भी बीबीसी से बात की. वो अपनी बेटी के साथ नज़दीकी रनवे पर खड़े एक विमान में बैठी थीं. उन्होंने बताया, "वहां अफ़रा-तफ़री का माहौल था. बहुत से सुरक्षाकर्मी विमान की ओर भागते दिख रहे थे. दुर्घटना स्थल पर कई सारी एम्बुलेंस और आग बुझाने वाले वाली गाड़ियां लगी हुई थीं."

इमेज स्रोत, PRAKASH MATHEMA/Nepal
उन्होंने कहा, "अपनी छोटी सी बेटी के साथ ये सब देखना बेहद दर्दनाक था. हर वो शख़्स अंदर तक हिल गया था, जिसकी भी आंखों के सामने ये सब घट रहा था."
त्रिभुवन हवाई अड्डे के जनरल मेनेजर राज कुमार छेत्री ने बीबीसी से कहा कि बचाए गए लोगों के परिजन गुरुवार को नेपाल पहुंचेगे. बचाए गए 22 लोगों में से 11 नेपाल और 11 बांग्लादेशी नागरिक हैं.

इमेज स्रोत, AFP
इस हादसे की वजह अभी तक साफ़ नहीं हो पाई है. विमान के मलबे से ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है. नेपाल सरकार ने इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं.
जहां एक ओर एयरलाइन कंपनी एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल को दोष दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट का कहना है कि विमान की लैंडिग गलत दिशा से कराई गई.
क्रैश के कुछ मिनटों पहले पायलट और एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जिससे लग रहा है कि दोनों के बीच कोई ग़लतफ़हमी हुई होगी.
नेपाल में लैंडिंग आसान नहीं
बांग्लादेश के एक रिटायर्ड एयर कमोडोर इकबाल हुसैन ने काठमांडू में लैंडिग करने के दौरान पायलटों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया.
उन्होंने कहा, "रनवे के ठीक अंत में एक पहाड़ है. लैंड करते वक़्त हर विमान को उस पहाड़ से दूरी बनानी होती है और जैसे ही पायलट उस पहाड़ को पार करता है, उसे जल्दी से विमान नीचे की ओर ले जाना होता है."

इमेज स्रोत, AFP
एयर कमोडोर इकबाल हुसैन ने बताया, "रनवे की बाईं ओर कुछ सपाट ज़मीन है और दाईं ओर एक गहरी खाई. इसलिए अगर विमान रनवे से फिसल जाता है तो वो सीधे खाई में गिरेगा. ये दुनिया के 10 सबसे ख़तरनाक एयरपोर्ट्स में से एक है."
सोमवार को हुई विमान दुर्घटना सबसे भयानक थी.
बांग्लादेशी एयरलाइन सेवा यूएस-बांग्ला का ये विमान नेपाल की राजधानी काठमांठू के त्रिभुवन एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान क्रेश हो गया था. इसमें 67 यात्री और चालक दल के 4 सदस्य सवार थे.
साल 1949 में नेपाल में सबसे पहला एयरक्राफ्ट लैंड हुआ था. तबसे यहां 70 से ज़्यादा प्लेन और हेलिकॉप्टर क्रैश हो चुके हैं.
ज्यादातर दुर्घटनाओं की वजह खराब मौसम, अनुभवहीन पायलटों और अपर्याप्त रखरखाव को बताया जाता है.
इससे पहले 1992 में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन का एक विमान क्रैश हुआ था, जिसमें सवार 167 लोगों की मौत हो गई थी.












