फूलपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: 'नेहरू की विरासत सहेजेंगे अतीक़ अहमद'

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, फूलपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
शाम के क़रीब साढ़े सात बजे हैं. इलाहाबाद शहर के चकिया मोहल्ले में एक बड़े से घर के बाहर लंबी गाड़ियों के काफ़िले के साथ 19-20 साल का एक नौजवान एक गाड़ी से उतरता है और फिर तमाम लोग उसे घेर लेते हैं.
इस युवक का नाम है उमर अहमद और ये दिल्ली में अपनी पढ़ाई से छुट्टी लेकर जेल में बंद पिता अतीक़ अहमद के चुनाव प्रचार का काम देख रहे हैं.
अतीक़ अहमद फूलपुर से एक बार सांसद रह चुके हैं और इलाहाबाद की शहर पश्चिमी सीट से कई बार विधायक भी रहे हैं. इलाक़े में उनकी छवि एक 'दबंग' की है. एक आपराधिक मामले में वो इस समय देवरिया जेल में बंद हैं.
फूलपुर से जब अतीक़ अहमद ने नामांकन किया तो सभी हैरत में पड़ गए क्योंकि इस बात की दूर-दूर तक कोई चर्चा नहीं थी. ऐसी अफ़वाहें हवा में तैरने लगीं कि अतीक़ अहमद भाजपा के उम्मीदवार को फ़ायाद पहुंचाने के मक़सद से आए हैं. लेकिन उमर अहमद कहते हैं कि ऐसा नहीं है.
सोरांव के ग्रामीण इलाक़े से प्रचार करके लौटे उमर से जब अचानक चुनावी मैदान में अतीक़ के उतरने की वजह पूछी तो उनका जवाब था, "हम नहीं चाहते थे कि जिस सीट का प्रतिनिधित्व कभी नेहरू जैसे नेता ने किया था, उस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार आसानी से जीत जाए."
"समाजवादी पार्टी ने उसके मुक़ाबले एक ऐसे व्यक्ति को खड़ा किया है जिसे कोई जानता नहीं है. इसलिए हमारे अब्बा ने यहां से चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है."

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अतीक़ का 'तब' और 'अब'
अतीक़ अहमद पहले समाजवादी पार्टी में थे, अपना दल में रहे और अब एक बार फिर निर्दलीय हैं. इलाहाबाद की शहर पश्चिमी विधान सभा सीट पर वो लगातार कई बार चुनाव जीत चुके हैं.
समाजवादी पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें शहर पश्चिमी सीट से टिकट न देकर कानपुर से लड़ा दिया था और 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्हें श्रावस्ती भेज दिया था. अतीक़ ये दोनों चुनाव हार गए थे.
उमर अहमद कहते हैं, "हमें सपा से टिकट की कोई उम्मीद भी नहीं थी. ये लड़ाई हमारी किसी के घमंड और तकव्वुर के ख़िलाफ़ वजूद और वक़ार की लड़ाई है. हम लोग एक जिताऊ उम्मीदवार चाहते थे लेकिन सपा ने जाने किस मजबूरी में नहीं उतारा."
उमर अहमद भले ही ये कहते हों कि फूलपुर सीट से उनके पिता नेहरू की विरासत को बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन जब साल 2004 में अतीक़ अहमद ने यहां से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव लड़ा था तो अख़बारों की हेडलाइंस कुछ इसी तंज़ भरे लहज़े में थीं- 'अब नेहरू की विरासत सहेजेंगे अतीक़ अहमद.'

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अतीक़ के ख़िलाफ़ मामले कहां-कहां?
दरअसल, अतीक़ अहमद की छवि इलाक़े में एक 'बाहुबली' नेता के तौर पर है. उनके ऊपर कई आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं, जिनमें कई संगीन अपराध भी शामिल हैं.
इलाक़े में ये बात आम है कि इलाहाबाद शहर पश्चिमी की सीट भी वो अपनी इसी छवि के कारण कई बार जीते. वो इस समय भी एक आपराधिक मामले में जेल की सज़ा कटा रहे हैं.
जेल में बंद अतीक़ अहमद ने पर्चे के ज़रिए अपने समर्थकों से वोट देने की अपील की है.
1992 में इलाहाबाद पुलिस ने अतीक अहमद के कथित अपराधों की सूची जारी की थी और तब बताया गया था कि उनके ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश के कई शहरों के अलावा बिहार में भी हत्या, अपहरण, जबरन वसूली आदि के मामले क़रीब चार दर्जन मामले दर्ज हैं.
अतीक के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद जिले में ही दर्ज हुए हैं.
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