मैं अब भी रात में अकेले बाहर जाती हूं: वर्णिका कुंडू

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- Author, सिन्धुवासिनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
स्टाइल से कटे बालों में स्लेटी रंग की धारियां देखकर पता चलता है कि उनका फ़ैशन स्टेटमेंट कितना बोल्ड है.
सिर्फ़ फ़ैशन स्टेटमेंट ही नहीं, वर्णिका ख़ुद भी काफ़ी बोल्ड हैं. आपको वर्णिका कुंडू याद हैं ना? वही वर्णिका कुंडू, पिछले साल अगस्त में कुछ लड़कों ने आधी रात में जिनकी गाड़ी का पीछा किया था और उनके साथ एक बड़ा हादसा होते-होते बचा था.
ये सब तब हुआ था जब वर्णिका चंडीगढ़ में अपने घर से कुछ ही किलोमीटर दूर थीं. उनका पीछा करने वालों में हरियाणा बीजेपी प्रमुख सुभाष बराला का बेटा विकास बराला भी शामिल था.
वर्णिका ने अपनी एक फ़ेसबुक पोस्ट में अपने साथ हुई डरावनी घटना को सबके सामने रखा था और देखते ही देखते ये मामला सुर्खियों में छा गया था.
उस रात घटी एक घटना ने वर्णिका की ज़िंदगी कैसे बदलकर रख दी, यही जानने के लिए हम चंडीगढ़ में उनके घर पहुंचे.

पेशे से डीजे वर्णिका एक आईएएस अधिकारी की बेटी हैं और उनका ख़ूबसूरत घर इसकी गवाही देता है. वो जिस कॉन्फ़िडेंस के साथ बोलती हैं, हंसती हैं, चीजों की ओर ध्यान दिलाती हैं और गर्दन हिलाकर असहमति जताती हैं उससे अंदाज़ा लगा जा सकता है कि वो एक मज़बूत कलेजे वाली महिला हैं.
किसी की परवाह नहीं...
अपने दोस्तों के बीच वर्णिका की छवि 'ब्रो' वाली है. यानी एक मस्तमौला, बिंदास लड़की जो लोगों की ज़्यादा परवाह नहीं करती है. उन्हें परिवार में कभी ये अहसास नहीं दिलाया गया कि लड़की होने के नाते कोई काम करने से पहले कुछ सोचने की ज़रूरत है.
उन्होंने टेनिस खेला, थोड़ा-बहुत मार्शल आर्ट्स सीखा और खूब ट्रैवल किया. इन सब के बावजूद उन्होंने भी लगभग वो सारी चीजें देखी और झेलीं जो एक आम हिंदुस्तानी लड़की झेलती है.
हालांकि ये चीजें शायद इतनी बड़ी नहीं थीं जिनसे अचानक सब कुछ बदल जाए लेकिन फिर अगस्त की वो रात आई और सब बदल गया.
वर्णिका याद करती हैं, "रात के 12:30 बजे से पहले सबकुछ रोज जैसा था. मैं एक दोस्त को पिकअप करने जा रही थी क्योंकि अगली सुबह मुझे बाहर जाना था."

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वो आगे बताती हैं, "मैं ड्राइव कर ही रही थी कि ये लड़के मेरे पीछे लग गए. वो मेरी गाड़ी को बार-बार ब्लॉक कर रहे थे. उतरकर नीचे भी आए...वो बस यही चाहते थे कि मैं किसी तरह गाड़ी रोक दूं लेकिन गाड़ी रोकना तो ऑप्शन था ही नहीं."
'ज़िंदगी में कभी इतना डर नहीं लगा'
वर्णिका के मुताबिक उस वक़्त वो इतना डर गई थीं जितना ज़िंदगी में पहले कभी नहीं डरीं. उन्हें पैनिक अटैक्स आ रहे थे, हाथ कांप रहे थे और वो फ़ोन भी डायल नहीं कर पा रही थीं.
उन्होंने कहा, "उस वक़्त मुझे ये भी नहीं पता था कि मैं घर पहुंच पाऊंगी भी नहीं. अगर वो मेरी गाड़ी को टक्कर मार देते तो कुछ भी हो सकता था. उस वक़्त मेरे दिमाग में क्या चल रहा था, मैं ही जानती हूं. मुझे ख़ुद नहीं मालूम कि मैं कैसे बच पाई और गाड़ी चलाकर घर वापस लौटी."

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वर्णिका का कहना है कि फ़ेसबुक पोस्ट डालने के पीछे उनका मक़सद अपने दोस्तों और करीबियों को सावधान करना था.
उन्होंने कहा, "अगर मेरे जैसी लड़की जो एक हाई प्रोफ़ाइल परिवार से आती है, जो ख़ुद ड्राइव करके सड़क पर निकल रही है, अगर उसके साथ ऐसा कुछ हो सकता है तो पैदल चलने वाली लड़कियों के लिए कितने ख़तरे हैं."
वर्णिका ने बताया कि इस वाकए के बाद जो भी लड़की उनसे मिली उसने अपने साथ हुए कुछ ऐसी ही घटनाओं के बारे में उनसे बताया.
तो अगस्त से लेकर अब तक क्या बदला है?
इसके जवाब में वर्णिका हंसते हुए कहती हैं, "मैं तो अब भी वैसी ही हूं. अब भी मुझे सुबह उठने में दिक्कत होती है और फिर डांट पड़ती है. हां, मेरी ज़िंदगी ज़रूर बदल गई है. अब मुझ पर एक ज़िम्मेदारी है, जो लड़ाई मैंने शुरू की है उसे ज़ारी रखने की ज़िम्मेदारी."

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वर्णिका को ये भी लगता है कि इन सबके बाद उन्होंने अपनी प्राइवेसी कहीं न कहीं खो दी है. उन्होंने कहा, "अब लोग मुझे पहचानते हैं. मैं अब नाइट सूट पहनकर बाज़ार नहीं जा सकती और अपनी मनमर्ज़ी नहीं कर सकती क्योंकि लोग मुझे पहचानने लगे हैं."
क्या उन्हें या उनके परिवार को कोई डर है?
वर्णिका की मानें तो उन्हें या उनके परिवार को डर तो नहीं लगता लेकिन वो थोड़ा सावधान ज़रूर रहते हैं.
उनके एक दोस्त को जिस तरह विकास बराला बताकर सोशल मीडिया पर पेश किया गया और ये झूठ फैलाया गया कि वो विकास को पहले से जानती थीं, इस पर वर्णिका को हंसी आती है.
उन्होंने कहा, "वो फ़ोटो चार-पांच साल पहले की है और वो चंडीगढ़ में ली भी नहीं गई थी. फ़ोटो देखकर कोई भी बता देगा कि वो विकास बराला नहीं है. वैसे, अगर वो मेरा दोस्त होता भी या मैं उसे पहले से जान भी रही होती ता क्या उसे मेरे साथ जो चाहे करने का हक़ होता क्या?"

वर्णिका कहती हैं, "अगर आज विकास और बाकी लड़के आज मेरे सामने हों तो मैं उन्हें बताना चाहूंगी की लड़की उनका सामान नहीं है जिसे वो जब जहां चाहें उठाकर ले जा सकते हैं. आप किसी की चीज़ भी उठाते हो तो उसे चोरी कहते हैं और उसकी सज़ा होती है. मैं उन्हें समझाऊंगी कि लड़की उनसे कमज़ोर नहीं है और न उनसे अलग. लड़की भी उन जैसी इंसान है."
वर्णिका आगे कहती हैं, "मैं उनसे पूछूंगी कि जब उन्होंने मेरे साथ ऐसा किया, वो सोच क्या रहे थे? उनके दिमाग में था क्या?"
वो पूछती हैं, "मुझसे अब तक न जाने कितने लोगों ने पूछा कि मैं आधी रात में अकेले बाहर क्यों थी. उन लड़कों से तो अब तक किसी ने सवाल नहीं पूछा. कुछ लोगों को ये भी लगता है कि ये तो डीजे है, इसके आस-पास शराब पिए लोग होते होंगे, ये लड़की होगी ही ऐसी. क्या किसी पुरुष डीजे के बारे में ऐसी ही बातें सोची जाती हैं.?"
तो क्या वर्णिका अब भी देर रात बाहर जाती हैं?
'हां, बिल्कुल. मैं भला ख़ुद को क्यों बदलूंगी? बदलना तो उन लड़कों को चाहिए. बदलना तो सिस्टम को चाहिए. मैं अब भी रात में अकेले बाहर जाती हूं." वो बिना सोचे जवाब देती हैं.
फ़िलहाल विकास बराला और दूसरा आरोपी आशीष ज़मानत पर बाहर हैं. मामले की सुनवाई हरियाणा के एक जिला अदालत में चल रही है.
वर्णिका कहती हैं, "कई बार मैं कोर्ट-कचहरी के झंझट से इरिटेट भी हो जाती हूं. थक जाती हूं...लेकिन अब ये लड़ाई सिर्फ मेरी नही है. ये उन तमाम औरतों की लड़ाई है जो ऐसी छेड़खानियों, स्टॉकिंग, उत्पीड़न और हमलों का शिकार होती हैं. इस लड़ाई को मैं अधूरा नहीं छोड़ सकती..."
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