प्रेस रिव्यू: ‘चीफ़ जस्टिस अब कोई बदलाव नहीं कर सकते’

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सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की ओर से न्यायपालिका और लोकतंत्र को ख़तरे में बताने के बाद सुप्रीम कोर्ट के ही एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि न्यायाधीशों की आलोचना के बाद मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा व्यवस्था में कोई बदलाव करें, इसकी संभावना नहीं है.
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि यह न्यायपालिका का एक आंतरिक मामला है और इसे हल कर लिया जाना चाहिए.
सरकार के वरिष्ठ कानून अधिकारी अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बेंच के भीतर सद्भावना की बात कही है. उन्होंने कहा, "जो कुछ हुआ, उससे बचा जा सकता था."
उन्होंने आगे कहा कि न्यायाधीशों को अब राजनेताओं की तरह कार्य करना होगा और सुनिश्चित करें की विभाजन पूरी तरह से निष्प्रभावी हो और भविष्य में सद्भावना और आपसी समझ प्रबल हो.

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यूपी में रिलीज़ होगी पद्मावत
सेंसर बोर्ड की अनुमति के बावजूद शुक्रवार को बीजेपी शासित गुजरात और मध्य प्रदेश ने कहा कि वह 'पद्मावत' फ़िल्म पर प्रतिबंध को जारी रखेगी और उसे अपने राज्यों में नहीं दिखाएगी.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर के अनुसार, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने फ़िल्म पर प्रतिबंध न लगाने का फैसला किया है.
वहीं, वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार पहले ही राज्य में इस फ़िल्म को दिखाने पर प्रतिबंध लगा चुकी है. दीपिका पादुकोण द्वारा अभिनीत पद्मावत फ़िल्म 25 जनवरी को रिलीज़ होगी.

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उच्चतम शिक्षा में 4.9% ही मुस्लिम शिक्षक
द हिंदू की ख़बर के अनुसार, भारत के उच्चतम शिक्षण संस्थानों में केवल 4.9 फ़ीसदी ही मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व है जो इस देश में समुदाय की आबादी (14.2%) के हिसाब से बेहद कम है.
उच्चतर शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण की हालिया रिपोर्ट से इस आंकड़े का पता चला है.
वहीं, उच्चतर शिक्षा में आबादी के लिहाज़ से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व भी बेहद कम है.
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जब सर्वेक्षण पूरा किया तो इसमें अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व 8.3 फ़ीसदी और अनुसूचित जनजाति का 2.2 फ़ीसदी था.

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फेसबुक से पकड़ा डॉक्टर को
पारिवारिक कारण बताकर मिस्र में छुट्टी मनाने चले गए दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के एक डॉक्टर का मामला सामने आया है और उनके इस झूठ को फेसबुक के ज़रिए पकड़ा गया.
अमर उजाला के अनुसार, अस्पताल के हड्डी रोग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र कुमार ने मिस्र में पिरामिड के सामने बैठकर फोटो खिंचवाई जो फ़ेसबुक पर वायरल हो गई.
यहां तक तो ठीक था लेकिन सर्जिकल सामान देने वाली कंपनी के एक प्रतिनिधि भी इस फोटो में मौजूद थे. इसके बाद प्रबंधन ने उनके ख़िलाफ़ जांच के आदेश दिए है.
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