मेडिकल कमीशन बिल पास हुआ तो क्या होगा?

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- Author, सर्वप्रिया सांगवान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में शुरू हुई सरकारी और प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल मंगलवार दोपहर वापस ले ली गई.
बिल को संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजे जाने के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ली और कहा कि कमेटी का फ़ैसला आने तक हड़ताल स्थगित रहेगी. बीते शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में नेशनल मेडिकल कमीशन बिल रखा था.
भारत में अब तक मेडिकल शिक्षा, मेडिकल संस्थानों और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) की ज़िम्मेदारी थी.
अगर ये विधेयक पारित होता है तो मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया खत्म हो जाएगी और उसकी जगह लेगा नेशनल मेडिकल कमीशन. तब देश में मेडिकल शिक्षा और मेडिकल सेवाओं से संबंधित सभी नीतियां बनाने की कमान इस कमीशन के हाथ होगी.
मेडिकल कमीशन बिल की 7 ज़रूरी बातें
1) मेडिकल एडवाइज़री काउंसिल - केंद्र सरकार एक काउंसिल बनाएगी जो मेडिकल शिक्षा और ट्रेनिंग के बारे में राज्यों को अपनी समस्याएं और सुझाव रखने का मौका देगी. ये काउंसिल मेडिकल कमीशन को सुझाव देगी कि मेडिकल शिक्षा को कैसे सुलभ बनाया जाए.
2) दाख़िले के लिए एक परीक्षा - इस कानून के आते ही पूरे भारत के मेडिकल संस्थानों में दाख़िले के लिए सिर्फ एक परीक्षा ली जाएगी. इस परीक्षा का नाम NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) रखा गया है.
3) मेडिकल प्रैक्टिस के लिए एक परीक्षा - ग्रेजुएशन के बाद डॉक्टरों को एक परीक्षा देनी होगी और उसके बाद ही मेडिकल प्रेक्टिस का लाइसेंस मिल सकेगा. इसी परीक्षा के आधार पर पोस्टग्रेजुएशन के लिए दाखिला होगा.

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4) मेडिकल संस्थानों की फीस - ये कमीशन निजी मेडिकल संस्थानों की फीस भी तय करेगा लेकिन सिर्फ 40 फीसदी सीटों पर ही. 60 फीसदी सीटों पर निजी संस्थान खुद फीस तय कर सकते हैं.
5) 'ब्रिज कोर्स' - बिल का क्लॉज़ 49 कहता है कि एक ब्रिज कोर्स लाया जाएगा जिसे करके आयुर्वेद, होम्योपेथी के डॉक्टर भी एलोपेथी इलाज कर पाएंगे.
6) क्या होगा कर्मचारियों का - बिल का क्लॉज़ 58 कहता है कि इस कानून के आते ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया खत्म हो जाएगा और इसके अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी. उन्हें 3 महीने की तनख्वाह और भत्ते मिलेंगे.
7) नियुक्ति - मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया के अधिकारियों की नियुक्ति चुनाव से होती थी लेकिन मेडिकल कमीशन में सरकार द्वारा गठित एक कमेटी अधिकारियों को मनोनीत करेगी.

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डॉक्टर क्यों कर रहे हैं विरोध?
इस बिल को बीते शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में रखा था, लेकिन फिलहाल कुछ प्रावधानों पर विरोध के चलते इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया है. कमेटी को अपनी रिपोर्ट बजट सत्र में पेश करनी होगी.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष केके अग्रवाल ने बीबीसी से कहा कि ये बिल मेडिकल क्षेत्र में लालफ़ीताशाही को बढ़ावा देगा.
"इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) 3 लाख लोगों की संस्था है, लेकिन इस बिल पर संस्था से कोई चर्चा नहीं की गई. अब तक 112 लोगों की टीम फैसला करती थी लेकिन अब 3 लोगों की टीम ही फैसला करेगी. ये सदस्य भी सरकार द्वारा मनोनीत होंगे. एक अलोकतांत्रिक संस्था को लाया जा रहा है. सारी शक्तियां ब्यूरोक्रेसी को दी जा रही हैं जो ठीक नहीं है. इसमें भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले प्रावधान हैं.
अगर आप किसी को आयुर्वेद के बाद एलोपैथी की इजाज़त देंगे तो वो आयुर्वेद क्यों करेगा. ऐसे तो देश से आयुष खत्म हो जाएगा."

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दिल्ली एम्स अस्पताल के सीनियर रेसिडेंट डॉक्टर विजय कुमार का भी सवाल है कि आयुर्वेद और होम्योपैथी के डॉक्टरों को ब्रिज कोर्स करवाकर एलोपैथी की इजाज़त क्यों दी जा रही है.
उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने 4 साल लगाकर अपनी होम्योपैथी और आयुर्वेद की पढ़ाई की है, आप उनके लिए नौकरियां क्यों नहीं बना पा रहे हैं. वो आगे अपना रिसर्च क्यों ना करें, उन्हें एलोपैथी का डॉक्टर क्यों बना रहे हैं.. जहां एक तरफ मेडिकल नेगलिजेंस की घटनाएं डॉक्टरों से हो रही हैं, ऐसे में कुछ महीने या एक साल का कोर्स करके वे क्या सेवा दे पाएंगे."
डॉक्टर कुमार ने कहा, "जो लोग इतनी मुश्किल परिक्षाएं पास करके डि़ग्री लेंगे, उनके लाइसेंस के लिए आप परीक्षा रख रहे हैं. लेकिन वहीं ब्रिज कोर्स लाकर आप किसी को एलोपेथी प्रेक्टिस करने की इजाज़त दे रहे हैं."
डॉ. विजय कहते हैं कि ये बिल सिर्फ निजी अस्पतालों के लिए नियम आसान करने की कवायद है क्योंकि 60 फीसदी मेडिकल सीटों की फीस भी निजी अस्पताल ही तय कर रहे हैं.

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एमसीआई के कर्मचारियों की अपील
बिल के क्लॉज़ 58 के मुताबिक, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के सभी कर्मचारी नए कानून के आते ही बर्खास्त हो जाएंगे.
इस प्रावधान की वजह से 100 से ज़्यादा कर्मचारी बेरोज़गार हो जाएंगे. इन सभी कमर्चारियों ने प्रधानमंत्री को खत लिख कर अपील की है कि उन्हें नई संस्था में जगह दी जाए या किसी और केंद्र सरकार की संस्था में मौका दिया जाए.
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