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मध्य प्रदेश: इस रेप केस में अदालत ने क़ायम की मिसाल
- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में दो महीने के भीतर फैसला दे दिया है.
यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा से 31 अक्टूबर को हुए गैंगरेप के मामलें में चारों आरोपियों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
भोपाल में हुए इस गैंगरेप ने सरकार और प्रशासन सभी को हिलाकर रख दिया था.
लड़की का परिवार इस फ़ैसले से संतुष्ट है. लड़की के पिता ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "अदालत के फ़ैसले से हम सब संतुष्ट हैं. जज जितनी सज़ा दे सकते थे उन्होंने वो किया."
हर मामले में इसी तरह आए फैसला
लड़की के पिता ने सरकार से मांग करते हुए कहा, ''लड़की यूपीएससी की तैयारी कर रही थी, लेकिन इस हादसे से उसे तोड़कर रख दिया है. सरकार को उसे नौकरी देने पर भी विचार करना चाहिए."
उन्होंने कहा कि इस मामले को जिस गंभीरता से लिया गया और उस वजह से इतनी जल्दी फैसला आ गया, यह अच्छी बात है. उन्होंने कहा कि बलात्कार के हर मामले में इसी तरह से फ़ैसला आना चाहिए ताकि पीड़िता को जल्द से जल्द इंसाफ मिल सकें.
कोर्ट में शनिवार को सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां मौजूद थीं. पुलिस ने इस मामले में गोलू उर्फ़ बिहारी, अमर उर्फ़ छोटू, राजू उर्फ़ राजेश और राजू उर्फ़ रमेश को गिरफ़्तार किया था.
लड़की के पिता ने पकड़ा एक आरोपी
विशेष जज सविता दुबे ने आरोपियों को सज़ा सुनाई. सविता दुबे ने इसे जघन्य अपराध बताया. चारों की उम्रक़ैद की सज़ा उनकी प्राकृतिक मौत तक जारी रहेगी. इस मामले में 17 नवंबर को चालान पेश किया गया था जबकि ट्रायल 21 नवंबर से शुरू हो गया था. कोर्ट ने फ़ैसला चालान के बाद 36वें दिन ही सुना दिया.
यह मामला 31 अक्टूबर का है जब विदिशा की यह युवती शाम के 7 बजे शहर में यूपीएससी की कोचिंग के बाद अपने घर जाने के लिए निकली थी. शहर के हबीबगंज रेलवे स्टेशन के क़रीब चार लोगों ने उससे सामूहिक बलात्कार को अंजाम दिया.
आरोप यह भी हैं कि पीड़िता को इस मामले की रिपोर्ट कराने में ख़ासी मशक्क़त करनी पड़ी. वह शहर के दो थाने एमपी नगर और हबीबगंज गई, लेकिन पुलिस वालों ने उसकी रिपोर्ट कथित तौर पर यह कहकर लिखने से माना कर दिया कि घटना पूरी तरह झूठ लग रही है.
घटना के दूसरे दिन पीड़ित लड़की के पिता ने, जो स्वंय पुलिस में हैं, चार में से एक आरोपी को ख़ुद पकड़कर पुलिस के हवाले किया. इसके लगभग 24 घंटे बाद दूसरे दिन घटना की एफ़आईआर रेलवे पुलिस ने दर्ज़ की.
सबसे ज़्यादा रेप मध्य प्रदेश में
इस दौरान यह बात भी सामने आई कि दोनों थाना क्षेत्र वाले पुलिसकर्मी इसे दूसरे थाना क्षेत्र का मामला बताते रहे. इस केस में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आम लोगों में काफी गुस्सा भी देखा गया. शहर के सामाजिक संगठनों और लोगों ने इसके ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था.
बलात्कार के मामले में मध्य प्रदेश का नंबर देश में पहला है. हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसके मुताबिक़ प्रदेश में सबसे ज्यादा 4,882 रेप के मामले दर्ज़ किए गए. मध्य प्रदेश पिछले साल भी पहले नंबर पर था.
एनसीआरबी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 2016 में देश में 28,947 महिलाओं के साथ रेप की घटनाएं दर्ज की गई. इसमें मध्य प्रदेश में 4882 महिलाओं के साथ रेप की घटना दर्ज हुई, जबकि इस मामले में उत्तर प्रदेश 4816 और महाराष्ट्र 4189 की संख्या के साथ देश में दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे.
नाबालिगों से रेप पर फांसी का बिल पास
नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार के मामलें में भी प्रदेश पहले नंबर पर है. मध्य प्रदेश में नाबालिगों से रेप के कुल 2479 मामले दर्ज़ किए गए.
प्रदेश में लगातार हो रही बलात्कार की घटनाओं को लेकर सरकार भी निशाने पर रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ होने वाले बलात्कार के आरोपियों के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान किया.
चार दिसंबर को मध्य प्रदेश विधानसभा में 12 साल की उम्र में बलात्कार पर मौत की सज़ा के प्रावधान वाला बहुचर्चित दण्ड विधि मप्र संशोधन विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया गया है.
राष्ट्रपति के दस्तख़त होने के साथ ही यह क़ानून बन जाएगा. मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसमें इस तरह का प्रावधान किया गया है.
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