क्या अवैध मंदिर से की गई प्रार्थना भगवान सुनेंगे!

करोल बाग की हनुमान मूर्ति

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कई बार लोग शिकायत करते हैं कि शिद्दत से प्रार्थना करने पर भी भगवान उनकी सुन नहीं रहे. भगवान क्यों नहीं सुन रहे, ये तो भगवान जानें. लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इससे जुड़ा एक सवाल उठाया है.

कोर्ट ने सवाल किया है कि 'क्या अतिक्रमण वाली जगह से की गई प्रार्थना ईश्वर सुनते हैं'?

हाईकोर्ट ने यह सवाल दिल्ली के करोल बाग में लगी विशाल हनुमान मूर्ति और उसके आस-पास हुए अतिक्रमण को लेकर पूछा है.

इस सिलसिले में अदालत में कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं.

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'ज़िम्मेदार लोगों से निपटा जाएगा'

दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने पूछा, ''अगर आप फ़ुटपाथ पर हुए अतिक्रमण वाली जगह से प्रार्थना करते हैं तो क्या यह प्रार्थना ईश्वर तक पहुंचेगी? उसकी क्या पवित्रता है? ''

पीटीआई के हवाले से छपी ख़बरों के मुताबिक़ बेंच ने कहा कि अवैध निर्माण के लिए ज़िम्मेदार सभी लोगों से निपटा जाएगा जिसमें मंदिर भी शामिल हैं.

कोर्ट ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम से उस सड़क और फ़ुटपाथ के निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं जिन पर अवैध तरीक़े से कब्ज़ा किया गया है.

नगर निगम को यह निर्देश दिल्ली सरकार के वकील सत्यकाम की जानकारी के आधार पर दिया गया.

लोक निर्माण विभाग और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए वकील सत्यकाम ने कोर्ट को बताया था कि 'सड़क और फ़ुटपाथ की ज़िम्मेदारी नगर निगम की है.'

करोल बाग की हनुमान मूर्ति

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'एक पांव नगर निगम का, बाक़ी मूर्ति डीडीए की'

पीटीआई के मुताबिक़ सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि ''मूर्ति का एक पांव फ़ुटपाथ पर है, लेकिन बाक़ी मूर्ति ज़मीन के उस हिस्से पर बनी है जो दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकार क्षेत्र में आती है.''

इसके बाद अदालत ने अधिकारियों से पूछा कि उस इलाक़े में व्यापारिक गतिविधि चलाने और पार्किंग की इजाज़त क्यों दी गई?

पीटीआई के मुताबिक़ अदालत ने कहा कि नगर निगम और विकास प्राधिकरण के उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी जिनके कार्यकाल में मूर्ति बनी और उसके आसपास अतिक्रमण हुआ.

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संचालन कर रहे ट्रस्ट के खातों की जांच

पीटीआई की ख़बर के मुताबिक़, सरकारी वकील ने अदालत को यह भी बताया कि ''मूर्ति और मंदिर का रख-रखाव और संचालन एक ट्रस्ट कर रहा है जिसके बैंक खातों की जांच की जा रही है''.

अदालत ने ट्रस्ट प्रशासन से पूछा कि वह डीडीए की ज़मीन पर कैसे मंदिर चला सकते हैं?

अदालत ने पुलिस को भी जांच पूरी करने और क़ानून लागू करने का निर्देश दिया.

करोल बाग में लगी यह मूर्ति 108 फ़ीट ऊंची है. कोर्ट ने पिछले महीने भी प्रशासन को इस मूर्ति को एयरलिफ़्ट कराकर दूसरी जगह ले जाने का सुझाव दिया था.

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