दिल्ली की हवा 'ज़हरीली', फिर क्यों वापस लिए क़दम?

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भारत की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाके इन दिनों प्रदूषण की वजह से बेहाल हैं. डॉक्टरों ने इन हालात को मेडिकल इमरजेंसी का नाम दिया है.
सरकार ने प्रदूषण के स्तर में कमी लाने के लिए कुछ फ़ौरी कदम उठाए थे जिन्हें अब वापिस ले लिया गया है.
एक समय दिल्ली में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय पैमाने से 30 गुना अधिक पहुंच गया था.
थोड़ी बेहतर हुई दिल्ली की हवा
हवा की गुणवत्ता में अब कुछ सुधार देखने को मिला है और यह 'गंभीर' स्थिति से कुछ बेहतर होकर 'बहुत ख़राब' तक पहुंच गई है.
प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने निर्माण कार्य पर रोक, दूसरे राज्यों से दिल्ली में आने वाले ट्रकों पर रोक और पार्किंग फ़ीस में बढ़ोत्तरी जैसे कदम उठाए थे.
अब न्यायालय के एक पैनल ने इन प्रतिबंधों को हटा दिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार हालांकि प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कुछ अन्य कदम अभी भी जारी रहेंगे, जैसे पावर प्लांट को बंद रखना और ईंट भट्टों और स्टोन क्रशर पर प्रतिबंध.

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'आने वाले दिनों में बढ़ सकता है प्रदूषण'
विज्ञान एवम पर्यावरण केंद्र के साल 2015 के अध्ययन से पता चला कि दक्षिणी दिल्ली में बदरपुर में चलने वाला पावर प्लांट भारत का सबसे ज़्यादा प्रदूषित केंद्र है.
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईसीपीए) के चेयरमैन भूरे लाल ने कोर्ट के पैनल के इस फैसले के बारे में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश की सरकार को लिखकर जानकारी दी है.
उन्होंने कहा, ''ईपीसीए प्रदूषण के हालात पर नज़र बनाए हुए है, भारतीय मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है.''
दिल्ली समेत उसके आसपास के इलाकों में पिछले हफ्ते स्मॉग की चादर बन गई थी जिस वजह से लोगों को सांस संबंधी समस्याएं होने लगीं.
कई लोगों ने आंखों में जलन और छाती में दर्द की शिकायत भी की.
स्मॉग के पीछे एक बड़ा कारण पंजाब और हरियाणा के किसान के पुआल जलाने को बताया गया. सर्दियों में हवा की गति में कमी, निर्माण स्थलों से उठती धूल और दीवाली के समय जलाए गए पटाखों की वजह से भी दिल्ली में प्रदूषण अनियंत्रित स्थिति तक पहुंच गया.














