नज़रिया: पंजाब में कब ख़त्म होगा राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला?

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह

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    • Author, विपिन पब्बी
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक

पंजाब के पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में एक 'टेररिस्ट मॉड्यूल' के पकड़े जाने की घोषणा की जो कथित रूप से पंजाब में हाई प्रोफ़ाइल हत्या के लिए ज़िम्मेदार था.

घोषणा के दौरान उन्होंने कहा कि इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ "ईश्वरीय शक्ति" की वजह से हुआ है. अरोड़ा ने कहा कि वो गुरुपर्व के मौके पर स्वर्ण मंदिर गए थे और वहां इन हत्याओं में शामिल गिरोह के पकड़े जाने की प्रार्थना की थी.

उन्होंने कहा कि सिखों के इस सबसे पवित्र तीर्थ स्थल से बाहर आने के कुछ देर बाद ही इस गिरोह के पकड़े जाने की सूचना मिली.

स्वर्ण मंदिर

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पंजाब में 'पकोका' का प्रस्ताव

दरअसल लगातार हो रही हत्याओं से सूबे के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह काफ़ी दबाव में रहे हैं.

अगर गिरोह के पांच प्रमुख लोगों के पकड़े जाने का अरोड़ा का दावा सही है तो इससे मुख्यमंत्री को सबसे ज़्यादा राहत मिलेगी. वो राज्य में क़ानून और व्यवस्था के ख़राब हाल के लिए अकाली के नेतृत्व वाली सरकार के बड़े आलोचक थे, और "सभी अपराधियों को सलाखों के पीछे" पहुंचा कर राज्य में शांति बहाली का वादा किया था.

हालांकि, उनके आने के बाद से लोगों को कोई राहत नहीं मिली जिससे पिछले हफ़्ते ही उनकी सरकार ने महाराष्ट्र के समान ही पंजाब में कठोर पकोका क़ानून (पंजाब कंट्रोल ऑफ़ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) लाने का प्रस्ताव रखा.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, "नया क़ानून राज्य में अपराध और नफ़रत फैलाने वालों को रोकने के लिए लागू किया जाएगा."

आईएसआई

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आईएसआई से जुड़े तार

पंजाब में कांग्रेस को शानदार जीत दिलाने के बाद सात महीने पहले जब से सत्ता संभाली है, उनकी सरकार लगातार दबाव में हैं. क्योंकि इस दौरान, ख़ास तौर पर दक्षिणपंथी, नेताओं पर लगातार हो रहे हमले में कोई कमी नहीं हुई.

इस घोषणा के दौरान, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि इनके विदेशी और स्थानीय गैंगेस्टर्स के साथ ही आईएसआई और ख़ालिस्तान समर्थकों से संबंधों का भी खुलासा हुआ है.

पकड़े गए पांच लोगों में दो गैंगेस्टर और दो कथित तौर पर ख़ालिस्तान समर्थक हैं जिनके तार पाकिस्तान के आईएसआई से जुड़े हैं.

उन्होंने कहा कि दो ख़ालिस्तान समर्थकों से पूछताछ में पता चला कि उनके संबंध आईएसआई से थे और उसने प्रमुख दलों के नेताओं को मारने की योजना बनाई थी.

उन्होंने कहा कि जेल में बंद एक गैंगेस्टर ने दो ख़ालिस्तान समर्थकों के इशारे पर हथियार और एक मोटरसाइकिल की व्यवस्था की थी.

पुलिस

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कौन हैं ये गिरफ़्तार अभियुक्त?

पुलिस ने पांच अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है. जम्मू के रहने वाले जिमी सिंह जो हाल ही में ब्रिटेन से भारत लौटे और उन्हें दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से पकड़ा गया.

ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल उर्फ़ जग्गी जिसने पंजाब में 18 अक्तूबर को शादी की और उसे जालंधर से गिरफ़्तार किया गया.

धर्मेंद्र उर्फ़ गुग्नी लुधियाना के गैंगस्टर है जो पहले से नाभा के हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हैं और कथित तौर पर हत्या के लिए हथियारों को मुहैया इन्होंने ही करवाया.

चौथा आरोपी रमनदीप सिंह उर्फ़ रमन कनाडियन है जिसे मुख्य शूटर बताया गया है.

वहीं पांचवें अभियुक्त हरदीप सिंह को फ़तेहगढ़ साहिब से गिरफ़्तार किया गया.

आरएसएस

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सुलझ जाएंगे इन हत्याओं के मामले?

सरकार इन गिरफ़्तारियों के बाद कई हाई प्रोफ़ाइल हत्याओं के सुलझाने का दावा कर रही है.

इनमें पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रिगेडियर जगदीश गंगनेजा (रिटायर्ड), पंजाब शिव सेना के नेता दुर्गा दास गुप्ता, आरएसएस स्वयंसेवक नरेश कुमार, हिन्दू तख्त के प्रचार मैनेजर अमित शर्मा, लुधियाना चर्च पादरी सुल्तान मसीह, आरएसएस नेता रविंदर गोसाई और हिंदू संघर्ष सेना नेता विपान शर्मा की हत्या के मामले शामिल हैं.

अब केवल एक प्रमुख घटना अनसुलझी रह गई है, ये है नामधारी समुदाय की गुरु माता चंद कौर की हत्या का मामला.

पंजाब

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ख़त्म होगा हत्याओं का सिलसिला?

उन्होंने कहा कि लुधियाना में संघ की शाखा में हुई गोलीबारी समेत इन सभी मामलों में 9 एमएम, .32 और .30 बोर के पिस्तौल हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए गए थे.

उन्होंने आगे बताया कि अभियुक्तों से पूछताछ में पता चला कि उनकी विदेशों में विभिन्न जगहों पर ट्रेनिंग हुई थी.

वो पाकिस्तान और पश्चिमी मुल्कों में बैठे उनके संचालकों से एन्क्रिप्टेड मोबाइल सॉफ़्टवेयर/ऐप का इस्तेमाल कर बात कर रहे थे.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन सभी मामलों में काम करने का तरीका एक जैसा था, लेकिन इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि चारों की गिरफ़्तारी से राज्य में चल रही हत्याओं की गतिविधियां ख़त्म हो जाएगी, जल्दबाजी होगी.

इसके बावजूद जैसा कि डीजीपी ने कहा, इन्हें "ईश्वरीय शक्ति" की वजह से पकड़ा गया है, पुलिस इस तरह की शक्तियों पर निर्भर नहीं रह सकती और उसे अपनी खुफ़िया और सतर्कता क्षमता को मजबूत करना होगा.

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