आधार: क्या आप भी बैंकों के मैसेज से परेशान हैं?

- Author, सर्वप्रिया सांगवान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पिछले कुछ दिनों से मोबाइल कंपनियां और बैंक अपने ग्राहकों को लगातार संदेश भेज रहे हैं.
ये संदेश चेतावनी की तरह भेजे जा रहे हैं कि या तो ग्राहक अपने मोबाइल नंबर और बैंक खाते के आधार से जोड़ ले वरना सर्विस बंद कर दी जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने अब तक ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है जिसमें ये कहा गया हो कि ये करना अनिवार्य है लेकिन इसके बावजूद ऐसे संदेश लोगों को भ्रम में डाल रहे हैं.
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है जिसमें आधार को मोबाइल फोन और बैंक खाते से जोड़े जाने के सरकारी निर्देश को चुनौती दी गई है.

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सिटीज़न फोरम फॉर सिविल लिबर्टी के संयोजक डॉक्टर गोपाल कृष्ण बताते हैं कि इस तरह के किसी भी संदेश को नज़रअंदाज़ किए जाने की ज़रूरत है क्योंकि कानूनी तौर पर ये गलत है.
सितंबर 2013 से जून 2017 तक के अपने सभी आधार संबंधित फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि आधार किसी भी सेवा के लिए अनिवार्य नहीं है. लेकिन टेलीकॉम कंपनियां और बैंक मैसेज भेजने से बाज़ नहीं आ रहे.

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दूरसंचार विभाग
मोबाइल कंपनियां या टेलीकॉम ऑपरेटर्स दूरसंचार विभाग के निर्देशों को मानने के लिए बाध्य हैं.
फिलहाल जो नियम है उसके अनुसार ग्राहकों को मोबाइल सर्विस लेने के लिए ना केवल किसी सरकारी पहचान पत्र की ज़रूरत है बल्कि अलग से वेरीफिकेशन की भी ज़रूरत है.
मार्च 2017 से निकाले गए अपने कई सर्कुलर में दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स को निर्देश दिया है कि वे फरवरी 2018 तक ग्राहकों की आधार नंबर के ज़रिए वेरीफिकेशन पूरी करें.
साइबर मामलों के विशेषज्ञ वकील विराग गुप्ता बताते हैं कि आधार की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला आना बाकी है. अभी जब इसकी वैधानिकता पर ही सवाल बना हुआ है और इसका इस्तेमाल कहीं भी अनिवार्य किया जा रहा है, तो वो गलत है, गैर-कानूनी है.

मोबाइल नंबर
विराग के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अभी कुछ ही सर्विस के लिए इसके इस्तेमाल की इजाज़त दी है. मोबाइल कंपनियां अगर ऐसा संदेश भेज रही हैं तो वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर रही हैं.
उन्होंने कहा, ''एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि मोबाइल नंबर का गलत इस्तेमाल रोका जाए. उस याचिका में कहा गया था कि 5 करोड़ नंबर हैं जो बिना वेरीफिकेशन के हैं. उसके बाद दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को आदेश दिया कि वो सभी नंबरों को सत्यापित करवाए.''
उन्होंने कहा कि ऐसे में दो सवाल उठते हैं कि पोस्ट-पेड नंबर तो पहले से ही वेरीफाइड होते हैं. दूसरा ये कि सिर्फ आधार ही तो एक माध्यम नहीं है वेरीफिकेशन के लिए.

बैंकों की चेतावनी
जब हम आईसीआईसीआई बैंक की ऐप खोलते हैं तो सबसे पहला नोटिफिकेशन आता है कि आप बैंक से अपना आधार नंबर जोड़ ले वरना 1 जनवरी 2018 से आप अपने खाते का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे.
जब शर्तें और नियम पढ़ेंगे तो वहां लिखा है कि आपके इन शर्तों और नियमों को मानने पर ये माना जाएगा कि आपने अपनी मर्ज़ी से आधार को बैंक से जोड़ा है.
आप आधार कानून के अंतर्गत अपनी मर्ज़ी से इजाज़त दे रहे हैं कि बैंक संबंधित सभी कामों के लिए आधार का इस्तेमाल हो.

एयरटेल कंपनी ने वेबसाइट पर लिखा है कि पोस्ट-पेड कनेक्शन वाले ग्राहक पास के एयरटेल स्टोर में जाएं और बायोमेट्रिक वैरीफिकेशन करवाएँ.
अगर एक से ज़्यादा नंबर हैं तो सभी नंबरों के लिए अलग-अलग बायोमेट्रिक होगा.
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