गुरदासपुर से शुरू हुई लहर 2019 तक जाएगी - सुनील जाखड़

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पंजाब में गुरदासपुर के उपचुनाव में कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बीजेपी-अकाली गठजोड़ के उम्मीदवार स्वर्ण सलारिया को 1.93 लाख वोटों से शिकस्त दी है.
सुनील जाखड़ के पक्ष में 4,99,752 वोट पड़े और उनके सबसे क़रीबी उम्मीदवार रहे स्वर्ण सलारिया को 3,06,533 वोट मिले हैं.
सुनील जाखड़ ने बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय को बताया, "बीजेपी पिछले साढ़े तीन साल में जिस किस्म की आर्थिक नीतियां लाई है और पार्टी ने जिस किस्म की सांप्रदायिकता फैलाई है, उसकी वजह से हुआ ये बदलाव सिर्फ़ गुरदासपुर तक ही सीमित नहीं रहेगा. मेरा मानना है कि 2019 में कांग्रेस सरकार बनने की नींव का पत्थर गुरदासपुर में रखा गया है."
पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट अभिनेता से नेता बने बीजेपी सांसद विनोद खन्ना के निधन के कारण खाली हुई थी. इसके बाद इस सीट पर उपचुनाव कराए गए थे.
कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने कहा, "इमरजेंसी के बाद के दिनों में कांग्रेस के इसी किस्म के हालात थे. तब श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने चिकमंगलूर से चुनाव लड़ा था. वहीं से बदलाव शुरू हुआ था तो आज मैं देखता हूं कि गुरदासपुर भी चिकमंगलूर बनने जा रहा है."
क्या देश के दूसरे हिस्सों में भी नज़र आएगा बदलाव?

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सुनील जाखड़ ने कहा, "मैं समझता हूं कि प्रक्रिया चालू हो गई है. आप देखेंगे कि जिस तरह छोटे चुनाव हों- यूनिवर्सिटी लेवल पर, वह दिल्ली यूनिवर्सिटी का चुनाव हो या पंजाब और राजस्थान यूनिवर्सिटी का चुनाव हो- एक लहर सी चल पड़ी है. इसके बाद अब अगला कदम गुरदासपुर है. आप देखेंगे कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भी बीजेपी के लिए चौंकाने वाले नतीजे सामने आएंगे.''
नोटबंदी और जीएसटी के बाद से विपक्षी दल व्यापारी और मध्यवर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं.
जाखड़ ने कहा, "मैं समझता हूं कि बीजेपी, व्यापारी और मध्यवर्ग के लिए काम करती रही है और आज इसी वर्ग में पार्टी के ख़िलाफ़ आक्रोश है. ये किसी एक प्रांत तक सीमित नहीं है."
क्या होंगी प्राथमिकताएं?
अपने आगामी डेढ़ साल के कार्यकाल के बारे में जाखड़ कहते हैं, "मुझे इस बात का पूरा इल्म है कि कार्यकाल केवल डेढ़ साल का ही है. मेरा कार्यकाल क्रिकेट के ट्वेंटी-ट्वेंटी फॉर्मेट जैसा है. मेरी कोशिश होगी कि मैं विरोध की मुद्रा में आने की जगह सरकार के साथ मिलकर अपने लोगों की समस्याएं सुलझाऊं."
"पंजाब में पहले ही कांग्रेस सरकार है और कांग्रेस की नीतियां प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही हैं. ऐसे में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की मदद से स्थानीय मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करूंगा."

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'संसदीय आदर्शों का पालन करूंगा'
सुनील जाखड़ के पिता बलराम जाखड़ एक बड़े कांग्रेसी नेता थे और वो लोकसभा अध्यक्ष भी रहे.
सुनील जाखड़ कहते हैं, "मुझे अपनी जिम्मेदारी का अहसास है कि मुझे अपने पिता के बनाए मानकों पर खरा उतरना है. मैं खुद को सौभाग्यशाली समझता हूं कि आज से करीब 37 साल पहले उन्होंने नेता विपक्ष की भूमिका निभाई थी. मुझे भी उसी कुर्सी पर बैठने का मौका मिला था."
2017 में हुए पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी-अकाली गठबंधन सरकार में सुनील जाखड़ नेता विपक्ष रह चुके हैं.
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित.)
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