मुंबई की मूक-बधिर लड़की का काम विदेश में छाया

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- Author, नवीन नेगी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कामयाब होने के लिए बुलंद हौसलों की जरूरत होती है. कोई शारीरिक कमी इन हौसलों की उड़ान में कुछ रुकावटें तो ला सकती हैं, लेकिन उनकी परवाज़ को रोक नहीं सकती.
ऐसे ही हौसलों की दास्तां हैं मुंबई की अमी की, जो जन्म से ही सुन और बोल नहीं सकतीं. लेकिन इस शारीरिक कमी को उन्होंने आगे बढ़ने की राह में आड़े नहीं आने दिया और आज अपने पैरों पर न सिर्फ खड़ीं है, बल्कि एक सफल कारोबारी की राह पर चल पड़ी हैं.
वह कढ़ाई-बुनाई का बिज़नेस करती हैं, जिसके लिए उन्हें अमरीका तक से ऑर्डर आने लगे हैं.
अपनी 'क्लास की जान' थी अमी
अमी की मां लता खारा बताती हैं, ''मेरी प्रेग्नेंसी का वह तीसरा महीना था जब मुझे खसरे की समस्या हुई, उस समय हम ओडिशा में रहते थे. वहां इलाज की पर्याप्त सुविधाएं नहीं थी. इसका नतीजा यह हुआ कि जब मेरी बेटी ने जन्म लिया तो वह सुन और बोल नहीं पा रही थी.''

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शुरुआत में अमी का दाखिला दिव्यांग स्कूल में करवाया गया, लेकिन उनकी प्रतिभा और कौशल को देखते हुए, जल्दी ही अमी सामान्य स्कूल में जाने लगीं.
अमी के स्कूल के दिनों को याद करते हुए उनकी मां लता ने बीबीसी को बताया, ''अमी बचपन से ही सबका ख्याल रखने वाली लड़की थी. खुद शारीरिक कमजोरियों से जूझने के बावजूद वह अपने साथी बच्चों के साथ मिल-जुल कर रहती थी. उनके स्कूल के टीचर उन्हें 'क्लास की जान' कहा करते थे ''
ज़िंदगी की मुश्किलों से लड़ना सीखा
स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद अमी की ज़िंदगी में एक बुरा दौर भी आया, जिसकी वजह से वे डिप्रेशन में चली गई थी. अमी उस वक्त को याद नहीं करना चाहतीं.
उस मुश्किल वक्त से अमी की मां ने उन्हें दोबारा खड़े होकर लड़ने की हिम्मत दी. इसके बाद अमी ने दो साल का टेक्सटाइल का कोर्स किया, साथ ही उन्होंने ब्यूटीशियन का कोर्स भी किया.

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धीरे-धीरे अमी ने अपने घर में कढ़ाई-बुनाई का काम शुरू कर दिया. उनके इस काम में पूरे परिवार ने उनका साथ दिया.
मुंबई के अंधेरी वेस्ट में रहनी वाली अमी को शुरुआत में आस-पास के लोगों के ऑर्डर आने शुरू हुए. धीरे-धीरे उनके काम को लोग पसंद करने लगे और फिर मुंबई समेत दूसरे राज्यों से भी लोगों ने उनकी कढ़ाई किए कपड़े ऑर्डर पर मंगवाने शुरू कर दिए.
अमी की बहन रिद्दी अमरीका में रहती हैं. जब वे अमी के बनाए कुछ सामान को अपने साथ कैलिफोर्नियां लेकर गईं तो वहां भी लोगों को यह सामान बहुत पसंद आया. उन्हें इरवाइन और सैन डिएगो से भी कई ऑर्डर मिलने लगे हैं.

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लोगों की डिमांड बढ़ने लगी
अमी कपड़ों पर कढ़ाई के अलावा खूबसूरत क्लिप और हेयर बैंड भी डिजाइन करती हैं. उनके ग्राहकों में हेयरबैंड की डिमांड बहुत ज़्यादा है. अमरीका से उन्हें सबसे ज़्यादा इन हेयरबैंड के ऑर्डर मिलते हैं.
अमी को मिलने वाले ऑर्डर पर उनकी मां बताती हैं कि उन्हें रोजाना कई ऑर्डर की डिमांड आती है. लेकिन अभी अमी यह काम अकेले ही देख रही हैं, इसलिए महीने में कपड़ों पर कढ़ाई करने के 8-10 ऑर्डर ही ले पाती हैं. हर ऑर्डर की कीमत सामान पर निर्भर करती है, वह 2000-5000 रुपये प्रति ऑर्डर तक चार्ज करती हैं.

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लगातार बढ़ती मांग के बाद अमी ने खुद का ट्रेनिंग स्कूल खोलने का इरादा किया है. इसके लिए उन्होंने नई मशीनें और जगह का चुनाव कर लिया है. वे बच्चों को कढ़ाई का काम सिखाना चाहती हैं साथ ही इसके जरिए वे ऑर्डर की बढ़ती डिमांड को भी जल्दी पूरा करने की कोशिश कर रही हैं.

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ज़िंदगी की तमाम मुश्किलों से लड़ने के बाद आज अमी अपने पैरों पर खड़ी हैं.
कहते हैं कि मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे. अमी की सफलता आज शोर ज़रूर मचा रही है लेकिन वे अभी भी खामोश हैं, और इसी खामोशी के साथ खुद को मजबूत बनाए जा रही हैं.
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