तो पेट्रोल 50 रुपए लीटर मिलने लगेगा...

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यूं तो पेट्रोल-डीज़ल बाइक, गाड़ी, ट्रक चलाने में काम आते हैं लेकिन जब इनके दाम बढ़ते हैं तो ऐसा कोई नहीं, जिसकी जेब पर इसका असर ना पड़ता हो.
फिर चाहें वो शहरों में स्कूटर-कार चलाने वाले हों, गांव में खेती करने वाला किसान या फिर सब्ज़ियां ढोने वाली लॉरियां.
यही वजह है कि बीते कुछ वक़्त से लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीज़ल के दामो को लेकर ना केवल विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाने में लगे थे बल्कि आम लोग भी काफ़ी निराश दिख रहे थे.
ऐसा लगता है कि सरकार पर इसका कुछ असर हुआ तो है.

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अंतरराष्ट्रीय बाज़ार
मंगलवार को सरकार ने ऐलान किया कि उसने पेट्रोल-डीज़ल पर बुनियादी एक्साइज़ ड्यूटी घटाने का फ़ैसला किया है जिससे बुधवार से ये दोनों 2-2 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो गए.
साल 2014 में सत्ता संभालने वाली मोदी सरकार ने पहली बार एक्साइज़ ड्यूटी में कमी की है.
वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "सरकार ने ये फ़ैसला किया ताकि पेट्रोल-डीज़ल की ख़ुदरा कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के बढ़ते दामों का असर बढ़ने के बीच आम आदमी के हितों की रक्षा की जा सके."
और सरकार का कहना है कि उसने ये कदम इसलिए उठाया ताकि आम लोगों पर पड़ने वाला भार कुछ कम किया जा सके. लेकिन उसने राहत देने में ज़रा देर भी लगाई.
क्योंकि उसने इससे पहले हर बार एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाई है, घटाई कभी नहीं.

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पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी
साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने राजकाज संभाला तो पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 9.48 रुपये प्रति लीटर थी जो 2 अक्टूबर, 2017 को बढ़कर 21.48 रुपये पर पहुंच गई थी और बुधवार को 2 रुपए घटने के बाद 19.48 रुपये प्रति लीटर पर रही.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक तीन साल से ज़्यादा कार्यकाल में एनडीए सरकार ने 11 बार पेट्रोल-डीज़ल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया जबकि घटाया महज़ एक बार.
साथ ही एनडीए के राज में डीज़ल पर लगने वाली एक्साइज़ ड्यूटी भी 3.56 से बढ़कर 17.33 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई थी जो 3 अक्टूबर को कम कर 15.33 रुपये प्रति लीटर की गई.

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वित्तीय घाटा
इसी बयान में ये भी बताया गया है कि सरकार को एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती से पूरे साल में 26 हज़ार करोड़ रुपये और मौजूदा कारोबारी साल में 13 हज़ार करोड़ रुपये का घाटा होगा.
पेट्रोल-डीज़ल के दामों में एक्साइज़ ड्यूटी का काफ़ी अहम रोल रहता है.
उदाहरण के लिए 4 अक्टूबर, 2017 को दिल्ली में पेट्रोल के दामों से समझा जा सकता है. पेट्रोल का दाम बुधवार को दिल्ली में 68.38 रुपये प्रति लीटर था.
इसी दिन डेली प्राइसिंग मेथेडॉलोजी के आधार पर पेट्रोल की ट्रेड पैरिटी लैंडड कॉस्ट महज़ 28.24 रुपये थी.

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ट्रांसपोर्ट लागत
इस कॉस्ट के मायने उस कीमत से हैं जिस पर उत्पाद आयात किया जाता है और इसमें अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट लागत और टैरिफ़ शामिल हैं.
इस दाम में अगर आप मार्केटिंग कॉस्ट, मार्जिन, फ़्रेट और दूसरे शुल्क जोड़ दें तो पेट्रोल की वो कीमत आ जाएगी, जिस पर डीलरों को ये मिलता है, जो 30.81 रुपए प्रति लीटर था.
इसके बाद एक्साइज़ ड्यूटी और वैट का खेल शुरू हुआ.
सरकार के पेट्रोल पर ये ड्यूटी 2 रुपये प्रति लीटर घटाने के बावजूद 4 अक्टूबर को 19.48 रुपये प्रति लीटर थी.

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डीलर का कमीशन
इसमें 3.55 रुपये का डीलर कमीशन और 14.54 रुपये प्रति लीटर का वैट जोड़ लिया जाए, तो कीमत पहुंच जाती है 68.38 रुपये पर.
अगर पेट्रोल के दाम में से मौजूदा एक्साइज़ ड्यूटी (19.48) पूरी तरह घटा दी जाए तो आम लोगों को पेट्रोल 48.9 रुपये प्रति लीटर मिल सकता है.
लेकिन ऐसा होना काफ़ी मुश्किल है.












