पेट्रोल 30 रुपए प्रति लीटर है, फिर 70 में क्यों बिकता है?

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इन दिनों देश में पेट्रोल के दामों को लेकर हाहाकार मचा है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें उफ़ान पर नहीं हैं लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल महंगा होता जा रहा है.
बीते कुछ वक्त से पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के चलते मोदी सरकार को आलोचना का सामना भी करना पड़ रहा है.
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल की बढ़ी कीमतों को लेकर सफ़ाई देने की कोशिश भी की थी लेकिन विरोधी दलों के हमले और जनता की निराशा नहीं थमी.
कच्चे तेल के दाम काबू में

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विरोधी दलों का आरोप है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड यानी कच्चे तेल के दाम काबू में हैं, ऐसे में सरकार टैक्स लगाकर पेट्रोल को महंगा बनाए हुए है.
15 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इंडियन बास्केट से जुड़े कच्चे तेल के दाम 54.58 डॉलर प्रति बैरल थे.
अब सवाल उठता है कि कच्चा तेल अगर सामान्य स्तर पर है तो फिर पेट्रोल इतना महंगा क्यों हो रहा है. इस सवाल का जवाब उलझा हुआ नहीं बल्कि बड़ा आसान है.
सस्ते से महंगा होता पेट्रोल

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आपको जानकर ये हैरानी होगी कि जब पेट्रोल भारत पहुंचता है तो इतना महंगा नहीं होता.
अगर मंगलवार, 19 सितंबर 2017 की बात करें तो डेली प्राइसिंग मेथेडॉलोजी के आधार पर पेट्रोल की ट्रेड पैरिटी लैंडड कॉस्ट महज़ 27.74 रुपए थी.
इस कॉस्ट के मायने उस कीमत से हैं जिस पर उत्पाद आयात किया जाता है और इसमें अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट लागत और टैरिफ़ शामिल हैं.
इस दाम में अगर आप मार्केटिंग कॉस्ट, मार्जिन, फ़्रेट और दूसरे शुल्क जोड़ दें तो पेट्रोल की वो कीमत आ जाएगी, जिस पर डीलरों को ये मिलता है.
30 रुपए से 70 रुपए तक का सफ़र

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19 सितंबर को ये सब मिलाकर 2.74 रुपए था. यानी दोनों को मिला दिया जाए तो डीलरों को पेट्रोल 30.48 रुपए प्रति लीटर की दर पर मिला.
आपके मन में ख़्याल आ सकता है कि अगर डीलर को इतनी सस्ती दर पर पेट्रोल उपलब्ध है तो आम आदमी तक पहुंचता-पहुंचता इतना महंगा कैसे हो जाता है.
लेकिन असली खेल इसी के बाद शुरू होता है. 30.48 रुपए वाला दाम ग्राहक तक आते-आते 70 रुपए कैसे बन जाता है, इसके पीछे टैक्स का खेल है.
एक्साइज़ और वैट का कमाल

असल में डीलरों को मिलने वाली दर और ग्राहक को बेची जाने वाली कीमत में गज़ब का फ़ासला एक्साइज़ ड्यूटी और वैट बनाते हैं.
दिल्ली में आम आदमी को 19 नवंबर को पेट्रोल 70.52 रुपए प्रति लीटर पर मिला.
30.48 रुपए में आप प्रति लीटर 21.48 रुपए एक्साइज़ ड्यूटी जोड़ लीजिए. फिर इसमें जोड़िए 3.57 रुपए प्रति लीटर का डीलर कमीशन और अंत में 14.99 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से वैट, जो दिल्ली में 27 फ़ीसदी है.
डीज़ल का भी यही किस्सा

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इस गणित से सरकार का ख़ज़ाना तो भर रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल वाजिब दरों पर होने के बावजूद आम लोगों को पेट्रोल काफ़ी महंगा मिल रहा है.
कुछ ऐसी ही कहानी डीज़ल के साथ है.
डीज़ल की ट्रेड पैरिटी लैंडड कॉस्ट 27.98 रुपए प्रति लीटर है, जिसमें 2.35 रुपए के शुल्क जुड़ने के बाद डीलरों को मिलने वाला दाम 30.33 रुपए पर पहुंच जाता है.
लेकिन ग्राहकों को डीज़ल 58.85 रुपए प्रति लीटर की दर से मिल रहा है.
कैसे मिलेगी राहत?

ऐसा इसलिए कि इसमें 17.33 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज़ ड्यूटी, 2.50 रुपए का डीलर कमीशन, 16.75 फ़ीसदी की दर से वैट और 0.25 रुपए प्रति लीटर पॉल्यूशन सेस जुड़ता है जो कुल 8.69 रुपए जोड़े जाते हैं. कुल मिलाकर दाम पहुंच जाते हैं 58.85 रुपए.
इन दिनों पेट्रोल के दाम कंपनियां तय करती हैं और सरकार का दावा है कि वो इस मामले में दख़ल नहीं देती.
ऐसे में अगर जनता को राहत की उम्मीद करनी है तो वो सिर्फ़ टैक्स के मोर्चे पर बदलावों से ही मिल सकती है.
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