अटल को भारत रत्न भी दिया, उनकी आलोचना भी कर रहे भाजपा नेता: यशवंत सिन्हा

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ यशवंत सिन्हा

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इमेज कैप्शन, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ यशवंत सिन्हा. 2003 की तस्वीर.

भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार की आर्थिक नीति की आलोचना की, जिसके बाद वह और वित्त मंत्री अरुण जेटली आमने-सामने हैं.

भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा है कि अरुण जेटली 'ओछी' टिप्पणियां कर रहे हैं और उनकी आलोचना करके उन्होंने उस वक़्त के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आलोचना की है, जिन्होंने जेटली को मंत्रालय देकर उन पर भरोसा किया था.

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिया है और अब भाजपा के ही नेता उनकी आलोचना भी कर रहे हैं.

दरअसल जेटली ने सिन्हा को '80 वर्षीय आवेदक' बताया था और कहा था कि वह अपना रिकॉर्ड भूल गए हैं और नीतियों से ज़्यादा व्यक्तियों पर टिप्पणी कर रहे हैं.

इस पर जवाब देते हुए सिन्हा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "ये इतनी ओछी टिप्पणी है कि इस पर जवाब देने को भी मैं अपनी मर्यादा के अनुरूप नहीं समझता."

सिन्हा ने की थी आर्थिक नीति की आलोचना

यशवंत सिन्हा, अरुण जेटली

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यह बयानबाज़ी यशवंत सिन्हा के उस लेख से शुरू हुई थी, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की कड़ी आलोचना की थी. यह लेख 'I need to speak up now' यानी 'अब मुझे बोलना ही होगा' शीर्षक से अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में लिखा गया था.

यशवंत सिन्हा ने यहां तक लिख दिया था कि प्रधानमंत्री ने ग़रीबी को करीब से देखा है और उनके वित्त मंत्री सुनिश्चित कर रहे हैं कि सारे भारतीय इसे करीब से देख सकें.

इसके बाद जेटली ने गुरुवार को एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में सिन्हा का नाम लिए बिना उन पर टिप्पणियां की थीं.

जेटली को जवाब देते हुए सिन्हा ने अपने राजनीतिक सफ़र की याद दिलाई और कहा, "वह (जेटली) मेरी पृष्ठभूमि पूरी तरह भूल गए हैं. मैं आईएएस छोड़कर तब राजनीति में आया था, जब मेरी सर्विस के 12 साल बचे हुए थे. कुछ मुद्दों की वजह से मैंने 1989 में वीपी सिंह कैबिनेट में राज्यमंत्री का पद लेने से इनकार कर दिया था. "

'पद की लालसा होती तो यह सब क्यों छोड़ता'

शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा

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सिन्हा ने कहा कि उन्होंने अपनी मरज़ी से 2014 का लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया था, जबकि वह अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे.

उन्होंने कहा, "मैं संसदीय राजनीति से संन्यास ले चुका हूं. मैं राजनीति में सक्रिय नहीं हूं और शांति से अपना जीवन बिता रहा हूं. अगर मैं कोई पद चाह रहा होता तो ये सब क्यों छोड़ता."

सिन्हा ने कहा कि उन्होंने पांच आम बजट और दो अंतरिम बजट पेश किए हैं. उन्होंने वाजपेयी सरकार में बतौर वित्त मंत्री उनके काम की आलोचना पर भी जवाब दिया.

उन्होंने कहा कि उन्हें एक अहम मौक़े पर विदेश मंत्रालय दिया गया था, जिससे वह सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में बतौर सदस्य अधिक सक्रिय हो गए थे.

'अहम समय पर दिया गया था विदेश मंत्रालय'

यशवंत सिन्हा

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इमेज कैप्शन, बतौर विदेश मंत्री अपने ईरानी समकक्ष कमल ख़र्राज़ी के साथ यशवंत सिन्हा. 2003 की तस्वीर.

पूर्व वित्त मंत्री सिन्हा ने कहा कि जुलाई 2002 में जब उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया तो वह चुनौतीपूर्ण समय था.

उनके मुताबिक, "संसद पर हमले के बाद सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच बहुत तनाव था. यह कहना कि विदेश मंत्रालय एक बेकार मंत्रालय था और मुझे वित्त मंत्रालय से बाहर कर दिया गया, यह विरोधाभास है."

सरकार के हालिया कदमों, मसलन आर्थिक सलाहकार परिषद के दोबारा गठन पर राय पूछे जाने पर सिन्हा ने कहा, "देखते हैं अब वो कौन से ज्ञान के महान मोती लेकर आते हैं. अब तक तो कुछ हुआ नहीं है. टिप्पणी से पहले इंतज़ार करूंगा कि कुछ हो."

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