क्या वाकई एनकाउंटर से यूपी में कम हुए हैं अपराध?

उत्तर प्रदेश, योगी आदित्यनाथ

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के छह महीने में 431 एनकाउंटर हुए जिनमें 17 अपराधी मारे गए.

उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे अपने छह महीने के कार्यकाल की उपलब्धि बताया है. लेकिन क्या इतने एनकाउंटर के बाद भी उत्तर प्रदेश में अपराध में कमी आई है?

सवाल ये भी उठता है कि अपराध को काबू करने के लिए एनकाउंटर की रणनीति कितनी कारगर कही जा सकती है?

उत्तर प्रदेश पुलिस

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कितनी कारगर है रणनीति

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह कहते हैं, "किसी भी प्रदेश में कुल अपराधों की संख्या कई तरह के अपराधों पर निर्भर करती है, जैसे पॉकेटमारी, रेप, चोरी, डकैती. एनकाउंटर इन सभी तरह के अपराधों के लिए नहीं किए जाते. इसलिए एनकाउंटरों की संख्या को किसी भी राज्य के क्राइम ग्राफ से जोड़कर देखना सही नहीं होगा."

तो क्या पुलिसिया मुठभेड़ों का इस्तेमाल ख़ास तरह के अपराधियों के सफाये के लिए होता है? क्या एनकाउंटरों से वैसे नतीज़े पुलिस हासिल कर पाती है, जिसकी उसे उम्मीद होती है?

पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी का कहना है, "अधिकतर एनकाउंटर फर्जी होते हैं, ये एक सत्य है और बहुत कम एनकाउंटर ही सही होते हैं. जब कोई भी सरकार इस तरह का अभियान चलाती है तो बड़े अपराधी छुप जाते है और छोटे अपराधी ही पुलिस की पकड़ में आते हैं. इसलिए वास्तव में अपराध कम नहीं होता और पुलिस का अभियान सुस्त पड़ते ही बड़े अपराधी सक्रिय हो जाते हैं."

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एनकाउंटर का सच

छह महीने की अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने ये भी दावा किया है कि 431 मुठभेड़ों में करीब 800 से ज़्यादा अपराधी गिरफ्तार किए गए, जिन पर सरकार ने इनाम की घोषणा भी की थी.

पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी कहते हैं, "उत्तर प्रदेश सरकार ने जिन अपराधियों के मुठभेड़ में मारे जाने की या फिर गिरफ्तारी की बात बताई है, उनमें से कोई भी बड़ा नाम नहीं है. एनकाउंटर सही थे या कुछ फर्जी भी थे, इनको उजागर करने में परिवार वालों और मीडिया की अहम भूमिका होती है."

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एनकाउंटर के नतीज़े

इसी सवाल पर पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह ने कहा, "पहली नजर में सभी एनकाउंटर सही लग रहे हैं. छह महीने में किसी भी एनकाउंटर पर एक भी सवाल नहीं उठा है न ही कोई विवाद खड़ा हुआ है."

प्रकाश सिंह ने बीबीसी को ये भी बताया कि संख्या पर न जाएं. उनके मुताबिक, "431 एनकाउंटर में 17 अपराधियों के मारे जाने का मतलब हुआ, 25 एनकाउंटर में एक अपराधी का मारा जाना, जो औसत के हिसाब से बहुत ज़्यादा नहीं है."

उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ इन मुठभेड़ों में पुलिस के 88 जवान भी घायल हुए हैं. उनके मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई से लोगों के बीच विश्वास जगा है कि राज्य में अपराध कम हुए हैं.

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एनकाउंटर की जांच जरूरी

पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी की राय में, "हर एनकाउंटर की वैसे तो मजिस्ट्रेट जांच होती है, लेकिन उसमें सरकार के खिलाफ कोई बात कभी नहीं निकल कर सामने आती. इसलिए ऐसी सूरत में मुमकिन हो तो निष्पक्ष जांच करानी चाहिए. वैसे भी उत्तर प्रदेश में फर्जी एनकाउंटर पर पुलिस वालों को पहले भी जेल हो चुकी है."

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