बीबीसी स्पेशल: कितने सुरक्षित हैं दिल्ली के सरकारी स्कूल?

- Author, अभिमन्यु कुमार साहा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"यह लड़कियों का स्कूल है... मैं यहां अकेला चौकीदार हूं. कोई भी आता है, धमका जाता है. आखिर मैं अकेला क्या कर पाऊंगा...?"
ये कहना है श्रीनिवास का, जो दिल्ली के वीआईपी इलाके कनॉट प्लेस के श्रीमंत माधव राव सिंधिया मार्ग पर स्थित सरकारी स्कूल लेडी इरविन सीनियर सेकंडरी स्कूल के चौकीदार हैं. उनकी यह परेशानी नई नहीं है.
वे पिछले 12 साल से इस स्कूल में नौकरी कर रहे हैं और तब से दो हज़ार से अधिक लड़कियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अकेले उठा रहे हैं.
रायन स्कूल मामले के बाद स्कूलों में सुरक्षा का मुद्दा गरमाया हुआ है. बच्चों को स्कूलों में सुरक्षित वातावरण मिले- इसके लिए देश भर में प्रदर्शन और रैलियों का सिलसिला जारी है.
रैलियां राज्यों की राजधानी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि दूरदराज़ के इलाकों में भी निकाली गई हैं.
अभिभावकों के मन में डर है और वे अपने बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूली माहौल की मांग कर रहे हैं.

सीसीटीवी भी नहीं
स्कूल कितने सुरक्षित हैं और वहां बच्चों की सुरक्षा के क्या इंतज़ाम किए गए हैं, यह जानने के लिए बीबीसी ने कुछ स्कूलों का जायज़ा लिया.
श्रीनिवास ने बीबीसी को बताया कि 'लड़कियों का स्कूल होने की वजह से यहां लड़के आते रहते हैं. छुट्टी के बाद घूमते हुए मिल जाएंगे. आए दिन दिल्ली पुलिस यहां से लड़कों को पकड़कर ले जाती है.'
स्कूल की प्रिंसिपल जी. रामकृपाल भी स्कूल में सुरक्षा के इंतज़ाम को कम मानती हैं.
वो कहती हैं, "कैंपस बड़ा है. हम लोगों को सुरक्षा के लिहाज़ से परेशानी तो होती है. सुरक्षाकर्मियों की कमी की वजह से स्कूल के पिछले हिस्से में कोई तैनाती नहीं की गई है. वहां अधिकांश समय खेल के शिक्षकों की तैनाती की जाती है."
रामकृपाल आगे कहती हैं, "वहां कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगा है. हमने पिछले हिस्से में कैमरा लगाने की मांग की है. प्रबंधन से बाउंड्री वॉल की ऊंचाई बढ़ाने के लिए भी लिखा है."

कोई सुरक्षाकर्मी नहीं
सुरक्षा के अपर्याप्त इंतज़ाम का यह अकेला नमूना नहीं है. पास के ही अतुल ग्रोव रोड पर स्थित एक अन्य सरकारी स्कूल पी एंड टी सीनियर सेकंडरी स्कूल में सुरक्षाकर्मी तक नहीं है.
बिना गार्ड वाले इस स्कूल में कोई भी बिना रोक-टोक अंदर घुस रहा था.
वहां एक शिक्षक ने बताया, "यहां सुरक्षाकर्मी नहीं हैं. चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों से काम चलाना पड़ता है."
स्कूल की सुरक्षा पर चिंता ज़ाहिर करते हुए एक अन्य शिक्षक ने कहा, "सुरक्षा व्यवस्था का न होना, सरकारी स्कूलों की सच्चाई है. न यहां सुरक्षाकर्मी हैं और न ही कोई सीसीटीवी कैमरे लगे हैं."
कक्षा एक से बारहवीं तक की पढ़ाई वाले इस स्कूल में क़रीब एक हज़ार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं. स्कूल ने कई बार सुरक्षाकर्मी की नियुक्ति के लिए विभाग और प्रबंधन को लिखा है, लेकिन कोई ठोस नतीजा निकलकर नहीं आया.
जून के महीने में लिखे पत्र की कॉपी दिखाते हुए एक शिक्षक ने कहा, "ऐसा एक बार नहीं कई बार लिखा गया है, पर कोई सुने तब ना."

खुद सुरक्षा में दिखे स्कूल प्रभारी
इसी इलाके में दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर राजकीय उच्चतर माध्यमिक बाल विद्यालय है. यहां स्कूल के प्रभारी सुभाष चंद्र शर्मा बच्चों की सुरक्षा में ख़ुद मेन गेट पर खड़े दिखे.
उन्होंने बताया, "स्कूल में एक ही गार्ड है. बच्चे अधिक हैं, इसलिए मैं छुट्टी के वक्त यहां तैनात रहता हूं. सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है."
इस स्कूल में सुबह की पाली में लड़कियां पढ़ती हैं. छुट्टी के वक्त पुलिस यहां पहुंचती है,
सुभाष चंद्र शर्मा कहते हैं, "कभी कभार ही ऐसा होता है. स्कूल के समय पर नियमित रूप से पुलिस की मदद मिले तो 'बुरे तत्वों' का जो भय है वह खत्म हो जाएगा.

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'पहले भी किए गए हैं एलान, पर...'
राज्य के उप-मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने पिछले सोमवार को सरकारी और निजी स्कूलों में सुरक्षा के इंतज़ाम पुख्ता करने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने की बात कही है, जो तीन सप्ताह के अंदर अपने सुझाव सरकार को सौंपेगी.
सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी निर्देश दिए हैं, लेकिन स्कूलों में नियमित सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं.
शिक्षा मामलों के जानकार और इस संबंध में कई याचिकाएं दायर कर चुके अशोक अग्रवाल कहते हैं, "चार साल पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी बालिका विद्यालयों में दो महिला पुलिसकर्मी की तैनाती के आदेश दिए थे. मुझे तो कहीं नहीं दिख रही हैं कि वे कहां हैं. दिल्ली में शिक्षा के बेहतर माहौल का विकास नहीं हो पा रहा है."
वह आगे कहते हैं, "व्यवस्था पूरी तरह फ़ेल हो रही है. सुरक्षा की बेहतरी के लिए वर्तमान सरकार आज पहली दफ़ा नहीं बोल रही है. पहले भी कई एलान किए गए हैं. क्या हुआ उन सबका?"
सुरक्षाकर्मियों की नियमित भर्ती के सवाल पर उन्होंने कहा, "सरकार निजी सुरक्षाकर्मियों की भर्ती को प्रोत्साहित करती है. फ़ायदा निजी कंपनियों को होता है. जितने सुरक्षाकर्मी चाहिए, उसके आधे की नियुक्ति होती है. जो भर्तियां होती हैं, वे लोग भी प्रशिक्षित नहीं होते और कम पैसे पर भर्ती किए जाते हैं."
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