मंत्रिमंडल विस्तार बीजेपी का, एनडीए का नहीं: शिवसेना

नरेंद्र मोदी, उद्धव ठाकरे

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    • Author, वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रीमंडल विस्तार में भारतीय जनता पार्टी ने सहयोगी दलों को मौका नहीं दिया. महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना नाराज़ दिख रही है.

हालांकि बिहार में चुनाव पूर्व बने महागठबंधन को छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाली जनता दल यूनाइटेड भी इस मंत्रिमंडल विस्तार में जगह नहीं बना पाई.

मंत्रिमंडल विस्तार और इसमें फ़ेरबदल पर शिवसेना की तरफ से औपचारिक प्रतिक्रिया भी आ गई है.

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एनडीए की सरकार

शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, "केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. चाहे लोग कहें कि ये राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार है लेकिन ये भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है."

उन्होंने आगे कहा, "प्रधानमंत्री को पूरा अधिकार होता है कि वो मंत्रीमंडल में विस्तार करे, फ़ेरबदल करे, किसी को प्रमोट करे, किसी को डिमोट करे, ये तो प्रधानमंत्री का अधिकार होता है. इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं रहती है. चाहे कोई भी हो, हम हों या अकाली दल हो. तेलेगुदेशम पार्टी हो या कोई और हो."

संजय राउत

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बड़ी पार्टियां...

लेकिन सरकार तो एनडीए की कही जाती है? इस सवाल पर संजय राउत कहते हैं, "अटल बिहारी वाजपेयी वाली सरकार एनडीए की थी, उस वक्त हम मिलजुलकर काम करते थे, उस वक्त बीजेपी को भी पूरा बहुमत नहीं था."

उन्होंने कहा, "आज बीजेपी के पास 280 सांसद है. अगर ये संख्या 200 से 220 के आस-पास होती तो हमारे साथ और हमारी मदद से सरकार बनती जो एनडीए की सरकार होती. अब उनको पूरा बहुमत है. और जिनके पास पूरा बहुमत होता है चाहे वो कांग्रेस हो या बीजेपी हो, ये जो बड़ी पार्टियां होती हैं, वे अपनी ताक़त ज़ाहिर करना चाहती हैं."

मोदी मंत्रीमंडल

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गठबंधन का भविष्य

एनडीए का क्या भविष्य देखते हैं? इस सवाल पर शिवसेना प्रवक्ता का जवाब है, "इस वक्त मैं एनडीए का कोई भविष्य मानने के लिए मैं तैयार नहीं हूं. ये एक गठबंधन जरूर है. जो बड़ी पार्टी होती है, जिसके पास ज़्यादा सीटें होती हैं, जो गठबंधन का मुखिया होता है, उसकी ज़िम्मेदारी होती है, छोटी पार्टियों को ज़िंदा रखना."

संजय राउत कहते हैं, "अगर आपको ये लगता है कि जो छोटी पार्टियां आपके साथ हैं, हम उसे ख़त्म करें और इस देश में सिर्फ हमारी ही पार्टी रहे तो ऐसे में गठबंधन नहीं बच पाता है. आज के मंत्रिमंडल विस्तार की बात छोड़ दीजिए. नीतीश कुमार की पार्टी महागठबंधन छोड़कर उनके साथ आए हैं, उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है."

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कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार का लक्ष्य 2019 के लोकसभा चुनाव को साधना है. इसमें शिवसेना जैसी क्षेत्रीय पार्टियां खुद को कहां देखती हैं?

संजय राउत कहते हैं, "हर सहयोगी दल अपने-अपने राज्य में अपनी-अपनी तैयारी करेगा. बीजेपी ने मिशन-350 बनाया है और उन्होंने ये किस आधार पर बनाया है, हमें नहीं मालूम. लेकिन तेलेगुदेशम, अकाली दल हमारी जैसी छोटी पार्टियां अपने-अपने राज्यों में अपना काम करती रहेंगी. यही हमारा मिशन है."

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