मंत्रिमंडल विस्तार: मोदी किस पर होंगे मेहरबान

तीसरी बार मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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    • Author, अदिति फडनिस
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच साल के कार्यकाल के मध्य में हैं और वो तीसरी बार मंत्रिमंडल में फेरबदल करने वाले हैं.

पहले से मौजूद रिक्तियों में इस हफ़्ते कुछ मंत्रियों के इस्तीफ़े के बाद और इजाफ़ा हो गया है, जो ये संकेत देते हैं कि मंत्रियों का प्रदर्शन, काम करने का उनका रिकॉर्ड और मोदी-शाह की जोड़ी के आदेश का पालन, वो तीन सिद्धांत हैं जिनकी वजह से ये फेरबदल हो रहे हैं.

वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही कठोर कार्रवाई की चेतावनी दे दी थी.

नरेंद्र मोदी

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मोदी ने दी थी सांसदों को चेतावनी

संसद के मॉनसून सत्र के अंत में जब एक संवैधानिक संशोधन विधेयक पर बीजेपी सांसदों की गैरमौजूदगी की वजह से विपक्ष द्वारा प्रस्तावित संशोधन पास हो गया तो उन्होंने बीजेपी सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा था, "2019 आने दो, सब को देख लूंगा."

संदेश एकदम साफ़ था कि जो सांसद संसदीय गतिविधियों में भाग नहीं लेते उन्हें 2019 के आम चुनाव में टिकट नहीं दिए जाएंगे.

संसद

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जुलाई में कांग्रेस से मुंह की खानी पड़ी

विधेयक में बदलाव बड़ा था और राज्यसभा में 89 बीजेपी सदस्यों के होने के बावजूद 31 जुलाई को बीजेपी सांसदों की गैरमौजूदगी की वजह से सरकार की किरकिरी हुई. पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के लिये राज्य सभा में पेश 123वें संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष के संशोधन का प्रस्ताव था.

कई घंटों की बहस के बाद कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित आयोग की सदस्य संख्या तीन से बढ़ाकर पांच करने के लिए एक महिला सदस्य और एक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य को शामिल करने का प्रावधान विधेयक में शामिल करने का संशोधन पेश किया गया.

कांग्रेस का संशोधन था कि ओबीसी कमीशन में एक महिला और एक अल्पसंख्यक मेंबर भी हो. इस संशोधन का सरकार ने विरोध किया. लेकिन नियम के हिसाब से सरकार संशोधित बिल के साथ ही आगे बढ़ सकती थी. 74 सांसदों के बल पर कांग्रेस वोटिंग में जीत गया और उसके प्रस्ताव पास हो गए.

राज्यों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उनकी मांग को बाध्यकारी बनाने वाले एक और संशोधन की भी मांग थी.

कलराज मिश्र और नरेंद्र मोदी

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प्रदर्शन ही नहीं एकमात्र कारण

इस घटना के फ़ौरन बाद मोदी का गुस्सा भड़का, लेकिन स्पष्ट तौर पर यह सांसदों के प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं था.

कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूडी तब पटना हवाई अड्डे पर पहुंचे ही थे कि उन्हें अगली फ़्लाइट से लौटने को कहा गया, उन्हें वापस पहुंच कर अपना इस्तीफ़ा सौंपना था. लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योग मंत्री कलराज मिश्र को भी इस्तीफा देने को कहा गया.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कलराज मिश्र ने अनौपचारिक रूप से कहा था कि बीजेपी को उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने में मुश्किल होगी. उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, "यह सब उतना आसान नहीं है जितना ये सोच रहे हैं."

उत्तर प्रदेश चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया.

75 साल के हो चुके मिश्र को किसी भी हालत में लंबे समय तक मंत्री बनाए रखने की उम्मीद तो नहीं ही थी.

श्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने श्रमिक सुधार के लिए ट्रेड यूनियनों के साथ सर्वसम्मति बनाने की दिशा में बहुत कम काम किया, ये वो क्षेत्र हैं जहां सरकार को अभी बहुत कुछ करना बाकी है. राज्य मंत्रियों संजीव कुमार बालियान, फगन सिंह कुलस्ते और महेंद्र नाथ पांडे ने भी इस्तीफ़ा सौंपा है. पांडे को बीजेपी की उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

नितिन गडकरी

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कितनी रिक्तियां हैं मंत्रिमंडल में

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अधिक सक्षम मंत्रियों में गिनती होती है, उन्हें अतिरिक्त ज़िम्मेदारी मिल सकती है. लगातार हुई रेल दुर्घटनाओं के बाद नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा देने की इच्छा जाहिर करने वाले रेल मंत्री सुरेश प्रभु को कोई और मंत्रालय सौंपा जा सकता है.

कई रिक्तियां हैं- वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है, तो कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के पास सूचना और प्रसारण मंत्रालय भी है, वहीं क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के पास दूरसंचार और आईटी का प्रभार है, और वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने के बाद शहरी विकास मंत्रालय को भरने का निर्णय भी लिया जाना है.

रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के स्वास्थ्य के विषय में भी चिताएं हैं. हालांकि अभी इस विषय पर बात नहीं की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक जल संसाधन मंत्री उमा भारती को भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है हालांकि वो पैर जमाने के लिए जूझ रही हैं.

हिमंता बिस्वा सरमा

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किसके शामिल होने की है संभावना

पार्टी के बीच संभावित मंत्रियों के तौर पर देखें तो बीजेपी महासचिव भूपेंदर यादव, जिन्हें पार्टी के चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है. विचारधारा और अनुकूलन प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे, जिन्होंने एक समाचार एजेंसी को बताया था कि बीजेपी में प्रतिभा की कमी है, दमोह से सांसद प्रहलाद पटेल, चुनाव के मद्देनजर कर्नाटक से लिंगायत सुरेश अंगदी और शोभा करंदलाजे, सत्यपाल सिंह, हिमंता बिस्वा सरमा, अनुराग ठाकुर, महेश गिरी और प्रहलाद जोशी के नामों की चर्चा है.

नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने के बाद जेडीयू भी सरकार में शामिल होने जा रही है.

अब तक किए गये बदलावों में यह फेरबदल सबसे व्यापक होगा. इस पूरी कवायद की जटिलता को देखते हुए यह संभावना है कि विभागों की घोषणा में देरी हो सकती है.

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