#70yearsofpartition: महिंद्रा और मोहम्मद का वो दिलचस्प क़िस्सा
- Author, संजय मजूमदार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
(भारत और पाकिस्तान की आज़ादी के सत्तर साल पूरे होने पर हम एक ख़ास सिरीज़ के ज़रिए आपको दोनों देशों के बीच के दिलचस्प क़िस्से बता रहे हैं. इसी कड़ी में पेश है महिंद्रा और मोहम्मद का ये क़िस्सा)
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा भारत की बड़ी कंपनियों में से एक है. ये भारत की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में से एक है. महिंद्रा ऐंड महिंद्रा दुनिया की सबसे बड़ी ट्रैक्टर कंपनी है. आज इसका कारोबार अरबों डॉलर में है.
लेकिन क्या आपको मालूम है कि कभी इस कंपनी का नाम महिंद्रा ऐंड मोहम्मद था?
जी हां, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा कंपनी की जब शुरुआत हुई थी तो इसका नाम महिंद्रा ऐंड मोहम्मद था. इसका देश के बंटवारे से भी गहरा ताल्लुक़ है. बंटवारे का इस कंपनी पर ऐसा असर पड़ा था कि इसका नाम तक बदल गया.
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा कंपनी की शुरुआत 1945 में हुई थी. इसे के सी महिंद्रा, जे सी महिंद्रा और मलिक गुलाम मोहम्मद ने लुधियाना में शुरू किया था. शुरुआत में ये कंपनी स्टील का कारोबार करती थी.
कंपनी के चेयरमैन केशब महिंद्रा बताते हैं कि के सी महिंद्रा और जे सी महिंद्रा ने मलिक गुलाम मोहम्मद को इसलिए कंपनी में साझीदार बनाया था ताकि वो हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दे सकें. गुलाम मोहम्मद की कंपनी में छोटी ही हिस्सेदारी थी. मगर उनका नाम कंपनी के साथ जुड़ा था.

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केशब महिंद्रा बताते हैं कि बंटवारे से पहले जब पाकिस्तान की मांग ने ज़ोर पकड़ा तब भी गुलाम मोहम्मद और महिंद्रा परिवार की दोस्ती बरकरार रही. साझा कारोबार चलता रहा.
जब अगस्त 1947 को देश आज़ाद हुआ तो दो हिस्सों में बंट चुका था. मलिक गुलाम मोहम्मद, पाकिस्तान चले गए. वो पाकिस्तान के पहले वित्त मंत्री बनाए गए थे.
देश का बंटवारा हुआ तो कारोबार का भी हो गया. 1948 में महिंद्रा ऐंड मोहम्मद का नाम बदलकर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा कर दिया गया. क्योंकि अब गुलाम मोहम्मद इस कंपनी के साझीदार नहीं रह गए थे. हालांकि दोनों परिवारों के बीच रिश्ता, बंटवारे के बाद भी बना रहा. लेकिन कारोबारी ताल्लुक़ ख़त्म हो गया.
केशब महिंद्रा कहते हैं कि जब मलिक गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान गए, तो उनके परिवार को सदमा लगा था. उन्हें इस बात का दुख था कि गुलाम मोहम्मद ने अपने इरादों के बारे में कभी भी महिंद्रा परिवार को नहीं बताया था.
1951 में मलिक गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान के गवर्नर जनरल बनाए गए.

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केशब महिंद्रा बताते हैं कि गवर्नर जनरल बनने के बाद भी मलिक गुलाम मोहम्मद महिंद्रा परिवार से पुराने रिश्तों को नहीं भूले.
1955 में गुलाम मोहम्मद, राजपथ पर हुई गणतंत्र दिवस की पहली परेड के मुख्य अतिथि थे. केशब महिंद्रा बताते हैं कि जब गुलाम मोहम्मद दिल्ली आए तो उन्होंने पहला फ़ोन उनकी दादी को किया था. इस तरह दोस्ती का ये रिश्ता अगली पीढ़ियों तक चलता रहा.
आज की तारीख़ में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा 15 अरब डॉलर की कंपनी है.

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केशब महिंद्रा कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान की संस्कृति साझी है. दोनों देशों के लोग एक दूसरे को पसंद करते हैं. मगर इसका असर सियासी रिश्तों पर नहीं दिखता.
वो उम्मीद जताते हैं कि आगे चलकर आम पाकिस्तानियों और हिंदुस्तानियों की तरह दोनों देशो के ताल्लुक़ भी बेहतर होंगे. तल्ख़ी कम होगी और दोनों देश क़रीब आएंगे.

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