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अपनी ओर से पार्टी को मुक्त करता हूं: शंकर सिंह वाघेला
राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के ठीक एक दिन बाद ही गुजरात की राजनीति में बड़ा उलटफ़ेर हो गया है. कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शंकर सिंह वाघेला ने कांग्रेस से इस्तीफ़े का ऐलान कर दिया है.
अपने इस्तीफ़े की घोषणा में वाघेला ने कांग्रेस के लिए "विनाश काले विपरीत बुद्धि" कहावत कही और बोले, "मैं कांग्रेस से इस्तीफ़े का ऐलान करता हूं और अपनी ओर से पार्टी को मुक्त करता हूं."
77 वर्षीय गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री वाघेला ने शुक्रवार को अपने जन्मदिन के मौके पर रैली के दौरान ये भी कहा कि उन्हें पार्टी ने निकाल दिया है.
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हालांकि इस बात का खंडन किया है कि वाघेला के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की गई.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है, 'शंकर सिंह वाघेला वर्तमान गुजरात कांग्रेस प्रमुख को हटाना चाहते थे. पार्टी हमेशा किसी भी व्यक्ति से ऊपर होती है. उन्हें कांग्रेस ने नहीं हटाया. ये बेबुनियाद बातें हैं. ये उनका निर्णय है.'
एक दिन पहले ही राष्ट्रपति चुनाव के दौरान गुजरात कांग्रेस में क्रास वोटिंग की बात सामने आई थी. और माना जा रहा था कि शंकर सिंह वाघेला के समर्थकों ने रामनाथ कोविंद को अपना वोट दिया.
गुजरात में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को 132 वोट मिले थे जबकि विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को 49. गुजरात में बीजेपी के 121 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के 57, लिहाजा यह साफ़ था कि चुनाव के दौरान कम से कम 8 विधायकों ने कोविंद के पक्ष में अपना मत दिया था.
गुजरात में वाघेला बापू के नाम से जाने जाते हैं और उनका अपना बड़ा जनाधार है. हालांकि पिछले कुछ चुनावों के दौरान, चाहे बीजेपी से या फिर कांग्रेस की तरफ से लड़ रहे हों, वो हमेशा रूठते रहे हैं.
राज्य में पहले से ही हाशिये पर पहुंची हुई कांग्रेस के लिए वाघेला का पार्टी छोड़ना बहुत बड़ा आघात है क्योंकि जहां आने वाले दिनों में गुजरात में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने हैं वहीं इसी साल विधानसभा चुनाव भी होंगे.
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