'सऊदी में रहनेवाले लोग परिवार को भारत क्यों पहुंचा रहे हैं'

सऊदी अरब

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    • Author, इमरान कुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

ऐसा नहीं है कि वो कम पैसे कमाते हैं, लेकिन फिर भी बैंक कर्मचारी मंसूर अली चलिल अपनी बेटी का केरल के मालापुरम के एक स्कूल में दाखिला करा वापस सऊदी अरब लौट चुके हैं.

42 साल के मंसूर शायद उन भारतीयों में पहले ऐसे हैं जिन्होंने 1 जुलाई से सऊदी अरब में 'फ़ैमिली टैक्स' लागू होने के बाद बीवी और तीन बच्चों को वापस भारत अपने घर पहुंचा दिया है.

मंसूर ने बीबीसी को बताया, "हमारी पहले योजना थी कि बेटी को 12वीं तक सऊदी अरब में ही पढ़ाएंगे, लेकिन नई टैक्स व्यवस्था के लागू होने के बाद हम पैसा नहीं बचा पाएंगे. हम यहां काम इसलिए ही करने आए हैं कि कुछ पैसे बचा पाएं."

नहीं बचेंगे पैसे

सऊदी अरब के यात्री

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अगर मंसूर नए टैक्स के लागू होने के बाद भी अपने परिवार के साथ वहां रहते हैं तो उनकी बचत बुरी तरह से प्रभावित होगी.

एक बेटी के अलावा उनके दो बेटे भी हैं. इस हिसाब से उनके ऊपर फ़ैमिली टैक्स 4,800 सऊदी रियाल बनता है जो कि 82704 भारतीय रुपये के बराबर होता है.

इस साल टैक्स की यह रकम प्रति व्यक्ति 1200 सऊदी रियाल सालाना है. जुलाई 2018 से यह रकम प्रति व्यक्ति 200 सऊदी रियाल प्रति माह और बढ़ जाएगी. इसके बाद 2019 में 300 सऊदी रियाल प्रति माह और फिर 2020 में 400 सऊदी रियाल प्रति माह बढ़ जाएगी.

यह सऊदी सरकार की ओर से वित्तीय सुधार के लिए उठाया गया कदम है.

यह आर्थिक सुधार उस नुकसान की भारपाई करने के लिए किया गया है जो साल 2014 के बाद कच्चे तेल की क़ीमत कम होने के बाद सऊदी सरकार को झेलना पड़ रहा है.

मंसूर की स्थिति सऊदी अरब में काम कर रहे दूसरे कई कामगारों से बेहतर हो सकती है क्योंकि मौजूदा कर व्यवस्था अप्रवासी मज़दूरों की कमाई के हिसाब से तय नहीं की गई है.

लेकिन कई ऐसे लोग भी हैं जो कई दूसरी वजहों से भी अपने परिवार के लोगों को वापस भारत भेज रहे हैं. एक आकलन के मुताबिक 30 लाख भारतीय सऊदी अरब में अभी रह रहे हैं.

अभी इंतज़ार कर रहे हैं लोग

सऊदी अरब

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केरल से सऊदी अरब जाने वालों की एक बड़ी संख्या है.

रियाद में केरल के लोगों के एक संगठन रियाद वझीकडावु प्रवासी कोटायम के ज़ैनुल अबीद बताते हैं, "कई ऐसे हैं जिनके बच्चों की परीक्षा इस महीने के अंत तक ख़त्म होने वाली है. उसके बाद यह साफ हो पाएगा कि कितने लोग वापस भारत जा रहे हैं."

भारत लौटने वालों की संख्या इस पर भी निर्भर करेगी कि केरल के स्कूलों में कितने बच्चों को दाखिला मिल पाता है क्योंकि केरल में एक महीने से भी ज़्यादा हो चुके हैं नए सत्र के शुरू हुए.

नए नियमों के मुताबिक जो सऊदी अरब छोड़ कर आ रहे हैं, उन्हें भी इस साल का फ़ैमिली टैक्स भर कर लौटना होगा.

नॉन-रेसिडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ मलयालिज़ के अनिल मैथ्यू ने बताया,"लोगों को ऐसा लग रहा है कि सरकार इस नई कर व्यवस्था पर दोबारा से विचार कर सकती है और इसे कम भी कर सकती है. इसलिए कई परिवार इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन अगले साल अप्रैल तक लोगों का बड़े पैमाने पर जाना शुरू होगा क्योंकि इस टैक्स की वजह से लोगों का यहां रहने का ख़र्च बहुत बढ़ जाएगा."

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर असर

नरेंद्र मोदी और सऊदी के सुल्तान सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़

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इस तरह की उम्मीद पालने की वजह यह है कि बड़े पैमाने पर भारतीयों के वापस लौटने का असर वहां समानों की ख़पत पर पड़ेगा. ज़्यादातर दुकानें सऊदी अरब के लोगों की ही हैं और उनके खरीदार भारतीय हैं.

अबीद ने कहा, "सबसे बड़ा असर किराए पर अपना घर देनेवाले सऊदी अरब के मकान मालिकों पर पड़ेगा."

अब मंसूर के मामले में ही देख लीजिए. मंसूर कहते हैं, "मैं एक कमरे के घर में चला जाऊंगा. जब मेरा परिवार ही यहां नहीं रहेगा तो इतने बड़े घर का मैं क्या करूंगा."

मैथ्यू ने बताया, "सऊदी अरब में इसका अर्थिक असर होगा. हम यह उम्मीद नहीं करते हैं कि भारत पर इसका ज़्यादा असर होगा. सच तो यह है कि हमें लगता है कि भारत भेजी जाने वाली रकम बढ़ जाएगी क्योंकि यहां जो लोग काम कर रहे हैं, वो अपने परिवार के लोगों को ज़्यादा रकम भेजेंगे."

भारत पर असर

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तिरुअनंतपुरम के सेंटर ऑफ़ डेवलपमेंट स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर इरुदाया राजन कुछ हद तक मैथ्यू की बात से इत्तेफाक़ रखते हैं.

वो कहते हैं, "भारत भेजी जाने वाली रकम में निश्चित रूप से इज़ाफ़ा होगा. 2008 वित्तीय संकट के समय दुबई में भी ऐसा ही हुआ था. लेकिन बाद में जब इस नीति पर कड़ाई से पालन होगा तो देखना होगा कि क्या असर होता है."

प्रोफेसर इरुदाया राजन कहते हैं, "वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़ पिछले दो सालों में बचत के पैसे में गिरावट आई है. सऊदी अरब हो या ब्रेक्सिट सभी मामलों में कोशिश यह हो रही है कि प्रवासियों को रोका जाए, लेकिन हर कोई यह जानता है कि उन्हें भी अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए अप्रवासियों की ज़रूरत पड़ेगी."

नई कर व्यवस्था की वजह से सऊदी अरब में गर्मियों के समय पर जो लोग भारत छुट्टियां मनाने आ जाते थे वो इस बार नहीं आ रहे हैं.

मैथ्यू कहते हैं, "वो टिकट के पैसे का इस्तेमाल फ़ैमिली टैक्स भरने में करने वाले हैं."

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