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प. बंगाल में जीएसटी को लेकर भ्रम की स्थिति
- Author, पीएम तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स को लागू करने के समय और तरीके का विरोध कर रही तृणमूल कांग्रेस सरकार के रवैए की वजह से पूरे पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर भ्रामक स्थिति बनी हुई है.
वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी नहीं लागू करने की स्थिति में पहले से भारी कर्ज़ से जूझ रहे बंगाल की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है.
जीएसटी नहीं लागू करने की हालत में भी सरकार 15 सितंबर के बाद वैट या दूसरे कर नहीं वसूल सकती. उसके लिए कानून में संशोधन ज़रूरी होगा.
यही वजह है कि वित्त राज्य मंत्री अमित मित्रा सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिख कर राज्य में इसे लागू करने के लिए कुछ और समय देने का अनुरोध करेंगे.
मित्रा कहते हैं, "ख़ासकर नियमित रूप से बैलेंस शीट अपलिंक नहीं करने वाले कारोबारियों की गिरफ्तारी का प्रावधान काफी कड़ा है. हम इसका समर्थन नहीं करते."
वो कहते हैं , "सरकार केंद्र से इसके लिए छोटे व मझौले व्यापारियों को और समय देने का अनुरोध करेगी."
कर की नई दरों के मुताबिक़ कीमतें तय नहीं हो पाने की वजह से आज कई एकल स्क्रीन वाले सिनेमाघरों में फिल्मों का प्रदर्शन बंद रहा.
इस कारण कई ज़रूरी दवाओं की भी किल्लत पैदा हो गई. जीएसटी के तहत वितरकों का पंजीकरण नहीं होने के चलते दवाओं की सप्लाई नहीं हो रही है.
मिठाइयों पर कर की दरें अलग-अलग होने की वजह से आज खरीदार भी परेशान रहे और विक्रेता भी. बंगाल की मशहूर मिठाई संदेश पर पांच फीसदी जीएसटी लगेगा तो चॉकलेट वाली मिठाइयों पर 18 फीसदी.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि उनकी सरकार जीएसटी के नहीं बल्कि इसे लागू करने में की जाने वाली जल्दबाजी के खिलाफ है.
वो कहती हैं, "जीएसटी से इंस्पेक्टर राज की वापसी होगी."
सीपीएम के प्रदेश सचिव सूर्यकांत मिश्र कहते हैं, "इसे हड़बड़ी में लागू करने की वजह से काफी अफरा-तफरी पैदा हो गई है. कारोबारियों को इसे लागू करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए."
टैक्स सलाहकार राजेश कुमार अग्रवाल कहते हैं, "राज्य सरकार को देर-सवेर इसे लागू करना ही होगा. ऐसा नहीं होने की स्थिति में पड़ोसी राज्यों से तस्करी बढ़ेगी. इसके साथ ही जरूरी वस्तुओं की भी किल्लत पैदा हो सकती है."
वो बताते हैं कि जीएसटी के तहत पंजीकृत वितरक भले नई दर से करों का भुगतान कर माल मंगाए, यहां इसके लागू नहीं होने तक वे इसे अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज़्यादा कीमत पर नहीं बेच सकते.
विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी लागू करने में होने वाली देरी से दवाओं समेत विभिन्न वस्तुओं की किल्लत और महंगाई बढ़ने का अंदेशा है.
पश्चिम बंगाल के मूलतः एक उपभोक्ता राज्य होने की वजह से यह संकट और गंभीर हो सकता है. इससे पहले से ही भारी वित्तीय तंगी से जूझ रहे इस राज्य की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ेंगी.
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