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वो 11 बातें जो मोदी ने जीएसटी के लिए कहीं
30 जून और 1 जुलाई की दरमियानी रात 12.00 बजे से पूरा भारत एक बाज़ार हो गया है यानी भारत में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) व्यवस्था लागू हो गई है.
इसे लागू करने के लिए सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया था.
वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के लागू होने पर इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने क्या कहा, पढ़िए-
1. देश एक नई व्यवस्था की ओर चल पड़ेगा. सवा सौ करोड़ देशवासी इस ऐतिहासिक घटना के साक्षी हैं.
2. अब कच्चा बिल और पक्का बिल जैसी चीज़ें ख़त्म हो जाएंगी और गरीब को जो लाभ मिलने वाले है उसे मिल सकेंगे.
3. जब 10 और 12वीं की परिक्षाएं के नतीजे ऑनलाइन आने लगी थीं तो पहले लोगों में घबराहट हुई थी, व्यवस्था भी हैंग हो गई थी. लेकिन फिर सबको इस बारे में पता चल गया और अब इसे लेकर कोई दिक्कत नहीं है.
4. जब नई चीज़ आती है तो थोड़ा एडजस्टमेंट तो करना पड़ता है. अफ़वाहों के बाज़ार को भंग करें और देश जब आगे चल ही चुका है तो इसका साथ दें.
5. जो राज्य ठीक से विकसित हुए हैं उनको निवेश जल्दी मिलता है लेकिन वो राज्य जो ठीक से विकसित नहीं हुए हैं, जैसा कि पूर्वी भारत पिछड़ जाते हैं. अब उन्हें विकास के समान अवसर मिलेंगे और भी आगे बढ़ सकेंगे.
6. भारतीय रेलवे व्यवस्था को केंद्र और राज्य मिल कर चलाते हैं लेकिन उसे हम भारतीय रेल के रूप में देखते हैं और जीएसटी भी ऐसी ही व्यवस्था है. यह 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के लिए की गई व्यवस्था है जिसके लिए आने वाली पीढ़ियां हमें गर्व से स्वीकार करेंगी.
7. 2022 में भारत अपनी आज़ादी के 75 साल पूरे करेगा और जीएसटी हमारे लिए मील का पत्थर साबित होगा.
8. ये डिजिटल भारत के लिए किए जा रहे सुधार हैं और 'वे ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' की राह हैं.
9. जीएसटी केवल आर्थिक सुधार की बात नहीं है, ये आर्थिक सुधारों से आगे बढ़ कर सामाजिक सुधार की बात करता है. इसे भले ही 'गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स' कहा जा रहा है लेकिन हकीकत में ये 'गुड एंड सिंपल टैक्स' है.
10. जीएसटी किसी एक सरकार की उपलब्धि नहीं है बल्कि सबकी साझी विरासत है और सबके साझे प्रयास की परिणति है, एक लंबी विचार प्रक्रिया का परिणाम है.
11. ये आर्थिक एकीकरण के लिए की गई पहल है. इससे अलग-अलग राज्यों में वस्तुओं पर लगने वाला कर एक ही हो जाएगा और इसके बारे में लोगों में जो कन्फ्यूज़न रहता है वो नहीं रहेगा और इससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
इस अवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि कभी-कभी शुरूआती विरोध होता है लेकिन हमें साथ मिल कर काम करना चाहिए.
उन्होंने कहा, "ये वैट के समान है जिसका भी पहले विरोध हुआ था."
उन्होंने कहा "किसी नई चीज़ को लागू करो तो थोड़ी सी टीथिंग ट्रबल यानी शुरूआती समस्याएं होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद लोग इसे समझने लगते हैं."
संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम को मोदी ने कहा कि ये वही जगह है जहां पर 14 अगस्त 1947 को रात के 12.00 बजे देश की आज़ादी की घोषणा हुई थी.
उन्होंने कहा कि एक नई अर्थव्यवस्था के लिए और संघीय ढांचे की शुरूआत के लिए इस पवित्र जगह के अलावा कोई और पवित्र जगह हो नहीं सकती.