You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
जीएसटी पर विशेष सत्र का बहिष्कार क्यों कर रहा है विपक्ष?
देश के सबसे बड़े कर सुधार यानी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की लॉन्चिंग के मौके पर कांग्रेस समेत ज़्यादातर विपक्षी पार्टियां मौजूद नहीं रहेंगी.
कांग्रेस ने कहा है कि 30 जून की आधी रात को संसद के सेंट्रल हॉल में जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर पर बुलाए गए विशेष सत्र में हिस्सा नहीं लेगी.
वाम दल, तृणमूल कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी समेत कई अन्य पार्टियों ने भी बहिष्कार का फैसला लिया है.
दरअसल, शुक्रवार की आधी रात के बाद देश को एक नई कर व्यवस्था मिलने वाली है.
14 अगस्त 1947 को संसद के केंद्रीय कक्ष में आज़ाद भारत का जन्म हुआ था, इसी तर्ज़ पर मोदी सरकार ने जीएसटी लॉन्चिंग के लिए आधी रात को कार्यक्रम रखा है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने आधी रात को होने वाले इस कार्यक्रम को संसद की गरिमा के ख़िलाफ़ बताया है.
उन्होंने कहा, "संसद के सेंट्रल हॉल में 1947 से लेकर 1997 तक आधी रात को जितने कार्यक्रम हुए हैं, वो आज़ादी का जश्न मनाने के लिए हुए हैं. यहां दिन में तो कई कार्यक्रम हुए हैं. शायद बीजेपी के लिए 1947 कोई मायने नहीं रखता होगा, 1972 या 1997 भी मायने नहीं रखता होगा जब आज़ादी की रजत और स्वर्ण जयंती मनाई गई."
आज़ाद के मुताबिक़, "ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत को आज़ाद कराने में उनकी कोई भूमिका ही नहीं रही."
तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि वो इस कार्यक्रम में भाग नहीं लेगी.
राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदीय दल के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने बीबीसी संवाददाता हरिता कांडपाल से कहा, "हम लोगों ने जीएसटी का हमेशा से समर्थन किया है. लेकिन बीजेपी जब विपक्ष में थी तो वो इसका विरोध करती थी. अब वो खुद को इसको लागू कर रही है लेकिन इसकी तैयारी मुकम्मल नहीं है."
उनका कहना था, "जीएसटी को छह महीने या साल भर के लिए टाल देना चाहिए. चूंकि तैयारी पूरी नहीं है, इसलिए छोटे और मझोले व्यापारियों को मुश्किल होगी."
आधी रात को होने वाले कार्यक्रम में मंच पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के अलावा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था.
लेकिन कांग्रेस के रुख से साफ़ है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसमें मौजूद नहीं रहेंगे.
हालांकि इस मुद्दे पर कांग्रेस में मतभेद नज़र आ रहा है. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख में इसे बहुत बड़ी उपलब्धि बताई है और इसमें देरी के लिए बीजेपी की ओर इशारा किया है.
राष्ट्रपति चुनावों में एनडीए उम्मीदवार को समर्थन करने वाली जदयू पार्टी ने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया है.
हालाँकि जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा है कि पार्टी ने इसके लिए कोई व्हिप जारी नहीं करेगी.
इस बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सभी विपक्षी दलों से अपील की है कि वो अपने फैसले पर फिर से विचार करें.
जबकि केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा है कि आख़िरी समय में इस ऐतिहासिक मौके पर विपक्षी दलों का अपना कदम पीछे खींचने की कोई वजह समझ नहीं आती.
उन्होंने कहा, "उनके पास कोई मुद्दा नहीं है. सरकार की आलोचना करना ही उनका मुख्य उद्देश्य लग रहा है."
नायडू ने इसे देश में कर सुधार को लेकर एक 'क्रांतिकारी' कदम बताया है.
आधी रात को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति एक ऐप के द्वारा जीएसटी को लॉन्च करेंगे.
जीएसटी विधेयक को क़ानून बनाने के लिए एक दशक से बात हो रही थी लेकिन राजनीतिक रस्साकशी के कारण ये अधर में लटक गया था.
ड्राफ़्ट बिल से लेकर संसद में बहस कराए जाने तक भारत को दस साल लगे.
सरकार और उससे सहमत अर्थशास्त्री इसे आज़ादी के बाद का भारत का सबसे बड़ा कर सुधार मान रहे हैं.
इस नई कर व्यवस्था से केंद्र और राज्य सरकारों के वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाने वाले सभी अप्रत्यक्ष करों की जगह एक समान कर वजूद में आ जाएगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)