लालू की इफ़्तार पार्टी और नीतीश का 'राजभोग'

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- Author, नीरज सहाय
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
शुक्रवार की रात बिहार के राजनीतिक गलियारे की ऐसी रात थी, जिसका कई लोगों को इंतज़ार था.
राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बिहार में सत्तारुढ़ गठबंधन में दरार के बीच राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की इफ़्तार पार्टी सबका ध्यान खींच रही थी.
कांग्रेस के नेतृत्व में क़रीब 17 विपक्षी पार्टियों ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे एनडीए के
प्रत्याशी और बिहार के गवर्नर रह चुके रामनाथ कोविंद को समर्थन देंगे.

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खजूर खाया, गले मिले
22 जून को दिल्ली में विपक्षी दलों ने मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया तो पत्रकारों ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से सवालों की झड़ी लगा दी. लालू यादव ने नीतीश कुमार से अपील की कि वे बिहार की बेटी
मीरा कुमार का समर्थन करें. लालू यादव ने कहा था कि शुक्रवार की इफ़्तार पार्टी में नीतीश से इस बारे में बात भी करेंगे.
बिहार के सत्तारुढ़ महागठबंधन में दरार की अटकलों के बीच लालू यादव की इस इफ़्तार पार्टी मीडिया के लिए भी एक बड़ा इवेंट था.
लेकिन दोनों दलों के बीच तनाव की झलक इफ़्तार पार्टी के मौके पर साफ़ दिखी.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इफ़्तार में शामिल होने आए. क़रीब आधे घंटे वहां रुके और बिहार की तीखी हो चली राजनीति को मिठास देने का प्रयास उन्होंने राजभोग और खजूर खाकर किया.
मंच पर उनकी लालू प्रसाद से बातचीत न के बराबर ही हुई. हालाँकि दोनों एक-दूसरे के गले ज़रूर मिले.

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नीतीश की नसीहत
वे ज़्यादातर समय विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी से बात करते रहे. कई बार ठहाके भी लगे.
लेकन बदले राजनीतिक माहौल और भाजपा के तीखे आरोपों के बीच परेशान लालू के चेहरे पर तनाव साफ़ दिख रहा था. उन्होंने मीडिया से बात तक नहीं की.
दूसरी तरफ इफ़्तार पार्टी से निकलने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया से बात की और राष्ट्रपति चुनाव पर अपना बेबाक पक्ष रखा और विपक्ष से सवाल भी कर डाला.
उनके अनुसार. 'मीरा कुमार, ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में बेहतर काम किया था, लेकिन क्या उनको हराने के लिए लोगों ने राष्ट्रपति चुनाव में खड़ा किया है.'
नीतीश ने कहा, "लोग बिहार की बेटी की बात करते हैं और हारी हुई लड़ाई लड़ते हैं." उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि 'लड़ाई लड़ना है तो 2019 की तैयारी करिए और 2022 में मीरा कुमार को राष्ट्रपति बनाइए.'

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गठबंधन पर नहीं पड़ेगा असर?
इस बीच उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने राष्ट्रपति चुनाव के बारे में कहा कि लड़ाई के मैदान में उतरने के पहले ही परिणाम कैसे निकाला जा रहा है.
इफ़्तार में आए लोग नीतीश कुमार के फ़ैसले पर दबी जुबान में चर्चा कर रहे थे. कई राजद कार्यकर्ता ये कह रहे थे कि 'गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया गया है.'
हालांकि नीतीश कुमार ने ये भी स्पष्ट किया कि एनडीए में रहते हुए भी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी पार्टी ने प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था. साथ ही इस मामले का बिहार के महागठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
तो लालू प्रसाद की इफ़्तार पार्टी नीतीश कुमार को राष्ट्रपति चुनाव में अपना रुख़ बदलने से मना नहीं पाई.
ब राष्ट्रपति चुनाव का ये दंगल कहाँ तक जाएगा, आगे-आगे देखते रहिए.
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