कुलभूषण मामलाः 'दया याचिका' और नया 'वीडियो'

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पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव ने पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष से मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ दया की अपील की है.
पाकिस्तानी सेना ने साथ ही जाधव का एक और कथित "क़ुबूलनामे का वीडियो" जारी किया है जिसमें वो "आतंकवाद और जासूसी में लिप्त होने की बात स्वीकार करते हैं".
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारत ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा है कि "मनगढंत बातों से सच्चाई नहीं बदल सकती".
भारत ने साथ ही पाकिस्तान से अपेक्षा की है "वो जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की कार्यवाही को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करे".
पीटीआई के अनुसार भारत ने संकल्प जताया है कि "वो इस मामले को अदालत में उठाता रहेगा और उसे विश्वास है कि जाधव मामले में इंसाफ़ होगा".
कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने कथित जासूसी के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई थी जिसपर पिछले महीने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) ने रोक लगा दी थी.

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दया याचिका
आईसीजे की रोक के बमुश्किल एक महीने बाद एक नए घटनाक्रम में पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया है जाधव ने "जासूसी, आतंकवाद और तोड़-फोड़ की गतिविधियों में लिप्त होने की बात स्वीकार करते हुए गहरा अफ़सोस जताया है".
बयान में आगे कहा गया है, "अपनी हरकतों के लिए माफ़ी माँगते हुए उसने सेनाध्यक्ष से दया के आधार पर उनकी जान बख़्श देने का अनुरोध किया है. "
पाकिस्तानी सेना ने साथ ही जाधव का दूसरा वीडियो जारी किया है जिसमें वो ये भी कहते दिखाई देते हैं कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान उन्हें अधिकारियों की ओर से बचाव पक्ष का वकील दिया गया था.
पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने नया वीडियो इसलिए जारी किया है क्योंकि वो चाहता है कि "दुनिया को ये पता चले कि भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ क्या किया है और क्या कर रहा है".
पाकिस्तानी सेना ने पिछले साल भी जाधव की गिरफ़्तारी के बाद एक ऐसा ही वीडियो जारी किया था.
वीडियो में कुलभूषण को ये कहते हुए बताया गया कि वो 1991 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे.
और उन्होंने साल 2013 में भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के लिए काम करना शुरू किया था.
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