मिलिए सीबीएसई 12वीं की टॉपर रक्षा गोपाल से

रक्षा गोपाल

इमेज स्रोत, PTI

इमेज कैप्शन, रक्षा गोपाल
    • Author, वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सीबीएसई की बारहवीं के नतीजों में नोएडा के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाली रक्षा गोपाल ने 99.6 फ़ीसदी अंकों के साथ पूरे देश में टॉप किया है.

रक्षा गोपाल ने 500 में से 498 अंक हासिल किए. दूसरे नंबर पर चंडीगढ़ की भूमि सावंत रहीं, जिन्हें 99.4 फ़ीसदी अंक मिले.

17 वर्षीय रक्षा को तीन विषयों- अंग्रेज़ी, पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स में सौ-सौ नंबर मिले हैं. इतिहास और साइकॉलजी में उन्हें 99-99 अंक मिले.

बीबीसी हिंदी से बात करते हुए रक्षा ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं, लेकिन अभी तक इस पर यक़ीन नहीं हो रहा है. शॉक में हूं. '

रक्षा गोपाल

इमेज स्रोत, PTI

इमेज कैप्शन, रक्षा के पिता गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन में काम करते हैं, मां गृहिणी हैं.

'आगे पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई करनी है'

वह कहती हैं कि टॉप करने के बाद जो फ़र्क है वो सिर्फ जज़्बातों में है, रवैये के स्तर पर नहीं. वह कहती हैं, 'हम सब स्टूडेंट हैं, अब भी बराबर हैं और हमें कॉलेज को एक ही तरीके से अप्रोच करना है.'

रक्षा पढ़ाई के अलावा पियानो बजाती हैं और उन्हें नॉवेल पढ़ना भी पसंद है. वह दिल्ली के ही एक इंस्टीट्यूट से वह फ़्रेंच सीख रही हैं.

वह अब आगे पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई ही करना चाहती हैं. वह कहती हैं, 'लेकिन मैं चाहती हूं कि इसमें अपनी फ़्रेंच का इस्तेमाल किसी तरह कर सकूं, क्योंकि मुझे भाषाएं बहुत पसंद हैं.'

रक्षा अपनी कामयाबी का श्रेय अपने मां-पिता और स्कूल के शिक्षकों को देती हैं. वह कहती हैं कि उन्हें हमेशा समर्थन और सहयोग मिला, कभी किसी ने कोई दबाव नहीं बनाया.

रक्षा गोपाल

इमेज स्रोत, FACEBOOK

इमेज कैप्शन, रक्षा (बाएं से दूसरी) अपने परिवार के साथ

हमने कहा था, नंबर की परवाह छोड़ ज्ञान जुटाओ: पिता

इस बार बारहवीं की परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं को वह फ़ोकस बनाए रखने की सलाह देती हैं. साथ ही यह भी कहती हैं कि मनचाहे नंबर न आने पर निराश होने की ज़रूरत नहीं है.

रक्षा के पिता गोपाल श्रीनिवासन गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन में काम करते हैं. उनका परिवार नोएडा में रहता है, लेकिन दो साल से वह गुजरात में रहकर ही नौकरी करते हैं और बीच-बीच में परिवार से मिलने आया करते हैं. रक्षा की मां गृहिणी हैं.

वह कहते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर भरोसा था कि वह अच्छे नंबर लेकर आएगी, लेकिन वह पूरे भारत में टॉप करेगी, यह उन्होंने नहीं सोचा था.

वह बताते हैं कि रक्षा शुरू में ठीक-ठाक स्टूडेंट थी, लेकिन बाद में उसने रफ़्तार पकड़ी. वह कहते हैं कि हमने अपनी बेटी से यही कहा कि मन लगाकर पढ़ो और नंबरों की परवाह छोड़ ज्ञान जुटाते रहो.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)