बिहार में शराबबंदी, पर मिलता है ब्रांड 'रमा शंकर'

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
बिहार में पूर्ण शराबंबदी के बाद शराब तस्कर 'तू डाल-डाल, मैं पात-पात' की तर्ज़ पर पुलिस को चकमा देने की कोशिशों में लगे हैं.
बीते क़रीब सवा साल में शायद ही कोई दिन ऐसा गुज़रा हो जब शराब ज़ब्त न की गई हो. लेकिन कभी-कभी शराब तस्करी के ऐसे तरीक़े ज़रूर सामने आ जाते हैं जो दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर कर दें.
अवैध कारोबारी एलपीजी के सिलेंडर से लेकर ट्रक-ट्रैक्टर के ट्यूब तक का इस्तेमाल शराब तस्करी के लिए कर रहे हैं.
कोड वर्ड का भी इस्तेमाल
शराब के अवैध कारोबारी अब शराब की डिलीवरी के लिए कोड वर्ड का भी इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं.
भोजपुर ज़िले के एसपी छत्रनील सिंह ने बीबीसी से बातचीत में इस ख़बर की पुष्टि की है. हालांकि उन्होंने कोई ऐसा कोड-वर्ड नहीं बताया, लेकिन पूर्वी चंपारण ज़िले से इस संबंध में एक रोचक जानकारी मिली.

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वहां सूत्रों ने बताया कि विदेशी शराब के एक लोकप्रिय ब्रांड जिसे बोलचाल में आरएस कहा जाता है, उसके लिए ज़िले में 'रमा शंकर' कोड-वर्ड का इस्तेमाल हो रहा है.
जबकि शराब तस्करी के कोड-वर्ड पर स्थानीय अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, 'जहांगीर', 'गफूर', 'छोटा-बड़ा सिरप' और 'नेपाल' जैसे कोड-वर्ड का इस्तेमाल शराब के अवैध धंधे में हो रहा है.
शराब छुपाने के लिए खोदी गुफ़ा
शराब तस्करी का चौंका देने वाला सबसे ताज़ा मामला सूबे के रोहतास ज़िले में सामने आया है.
सासाराम मुफ़स्सिल थाने को 12 मई को यह गुप्त सूचना मिली थी कि इलाके के वज़ीरगंज गांव में ज़मीन में खोह (गुफ़ा) बनाकर शराब रखी गई है.

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पुलिस खोज-बीन के बाद खोह ढूंढने में कामयाब तो रही, लेकिन इसे देखने के बाद बारी हैरान होने की थी.
करीब डेढ़ फुट मुंह वाला यह खोह ऐसा था कि इसमें कोई सांप की तरह ही रेंग कर घुस पाता, लेकिन अंदर यह इतना बड़ा था कि इसमें देशी शराब के करीब पचास बोरे छिपाकर रखे गए थे.
पुलिस के अनुसार, इसे बाहर से बढ़िया तरीके से ढंककर रखा गया था, लेकिन इसके मुंह के आस-पास खुदाई वाली जो ताज़ी मिट्टी थी, उसने इसका राज़ खोल दिया.
इस खोह और इसके आस-पास दूसरे ठिकानों से पुलिस ने उस दिन क़रीब पांच हज़ार लीटर देसी शराब ज़ब्त की थी.

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यह इस थाने के इलाके से अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी थी, लेकिन इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
शराब पहुंचाने वाली टूरिस्ट बस
बीते महीने अप्रैल में मुज़फ्फरपुर शहर में ज़िले की उत्पाद पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में ऐसी टूरिस्ट बसों को ज़ब्त किया था जो केवल शराब लेकर दिल्ली और हरियााणा से मुज़फ्फरपुर पहुंची थीं.
पहला मामला 13 अप्रैल का है. इसमें टूरिस्ट बस की छत पर ख़ास केबिन बनाकर उसमें 44 कार्टन विदेशी शराब छुपाकर रखी गई थी.

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इस मामले में टूरिस्ट बस के ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ़्तार भी किया है.
इस घटना के पांच दिन बाद उत्पाद विभाग को फिर यह गुप्त सूचना मिली कि एक और टूरिस्ट बस शराब लेकर मुज़फ्फरपुर पहुंच रही है.
पुलिस ने गाड़ी जब्त भी कर ली, लेकिन उसे कई घंटो तक इसमें छुपाकर रखी शराब का पता-ठिकाना नहीं मिला.
पुलिस को शराब की सूचना देने वाले का दावा था कि उसकी सूचना सही है. बाद में ज़िले के उत्पाद अधीक्षक दीनबंधु ने बताया, ''जब हमने अपने ड्राइवर को गाड़ी चलाने को कहा. तब ड्राइवर ने बताया कि गाड़ी यूं चल रही है मानो इसमें कुछ भारी सामान रखा हुआ हो. हमने देखा कि बस के चक्के भी दबे हुए हैं. इसके बाद हमने बस के फ़र्श की क़रीब से जांच की तो पाया कि इसके नीचे बहुत करीने से एक चैंबर बना हुआ था, जिसमें करीब पचास कार्टन विदेशी शराब रखी हुई थी. ''

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इस मामले में चार लोग जेल भी भेजे गए हैं.
गैस सिलिंडर से शराब ढुलाई
शराब के अवैध कारोबार का अब तक का शायद सबसे रोचक मामला बीते साल सितंबर में नवादा जिले में सामने आया था.
ज़िले के गोविन्दपुर थाने को यह सूचना मिल रही थी कि एक माह से घरेलू गैस सिलेंडर के ज़रिए पड़ोस के सूबे झारखंड से शराब पहुंच रही है. पुलिस हैरत में पड़ गई.
एक दिन गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की तो ऐसे ही एक गैस सिलिंडर की मोटर साइकिल पर ढुलाई करते दो युवक पकड़े गए.

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पुलिस ने तब गैस सिलेंडर से करीब डेढ़ सौ पाउच देसी शराब बरामद किया था. इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी.
वहीं पटना ज़िले के मनेर थाने की पुलिस के मुताबिक़, इस साल उसने चार-पांच बार ट्रक और ट्रैक्टर के ट्यूब में देसी शराब भर कर इसकी तस्करी करने वालों को पकड़ा है.
ऐसे ट्यूब को खाद या अनाज के बोरे में भर कर छुपाने की कोशिश की जाती है, लेकिन शराब से भरी बड़ी-सी ट्यूब जब ख़ास अंदाज़ में हिलती है तो वह पुलिस की नजरों में आ ही जाती है.
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