झारखंड: बकरा जी हाजिर हों !

बकरियां

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    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए

झारखंड के रांची जिले की पुलिस इन दिनों कुछ बकरों को लेकर परेशान है. ये बकरे पिछले 18 दिनों से पुलिस 'कस्टडी' में हैं.

बूचड़खानों की बंदी के बाद पुलिस ने इन्हें मांस की दुकानों से बरामद किया था. इनके साथ दुकानों के मालिक भी पकड़े गए थे. उन्हें तत्काल ज़मानत मिल गई. लेकिन, इन बकरों की 'हिरासत' ख़त्म नहीं हुई. इन्हें अपनी रिहाई के लिए कोर्ट के आदेश का इंतज़ार है.

दरअसल, रांची के एसडीओ भोर सिंह यादव ने 26 अप्रैल की सुबह कटहल मोड़ स्थित मांस की दो दुकानों पर छापेमारी की थी. उन्होंने यहां से दुकान मालिकों के साथ 28 बकरों को भी पकड़ा था. इसके बाद नगड़ी थाने की पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर कागजी कार्यवाही शुरू की.

मांस दुकानदार, रांची

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देखभाल का संकट

नगड़ी के थाना प्रभारी एके सिंह ने बताया कि इस मामले में पशु क्रूरता अधिनियम व कुछ अन्य धाराओं में रिपोर्ट लिखी गयी है. लिहाजा, वे कोर्ट के आदेश के बगैर इन बकरों को नहीं छोड़ सकते.

हालांकि, थाने में इतने बकरों के रखने की जगह नहीं है और न पुलिस के पास इसकी एक्सपर्टीज है कि वे बकरों की देखभाल कर सके. लिहाजा, एक रात थाने में रखने के बाद इन्हें एक युवक को सौंप दिया गया है. ताकि, इनकी सही देखरेख हो सके.

एके सिंह ने बताया कि कोर्ट ने इन बकरों के स्वास्थ्य की जानकारी मांगी थी. पुलिस ने इनकी जांच कराकर वह रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है. लिहाजा, इन बकरों का रिलीज आर्डर निकल जाना चाहिए.

बकरियां

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'बकरों की ज़मानत'

तो क्या ये बकरे 'गिरफ्तार' हैं और इन्हें 'जमानत' लेनी पड़ेगी.

मेरे इस सवाल पर झारखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक भारती ने बीबीसी से कहा, "इन्हें गिरफ्तार नहीं कह सकते. दरअसल, इनकी जब्ती हुई है. क्योंकि ये सजीव हैं, इसलिए कोर्ट इनके लिए रिलीज आफ लाइफ स्टाक का आदेश दे सकता है. कोर्ट चाहे तो इन बकरों को पशुओं की देखरेख करने वाले किसी स्वयंसेवी संस्था को भी दे सकता है. क्योंकि, उन्हें मांस की दुकान से पकड़ा गया है. ऐसे में स्पष्ट है कि उन्हें वध के लिए लाया गया होगा."

इधर जब्त बकरों के मालिक बबलू मंसूरी और साबिर खान उर्फ डब्लू ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने उन्हें कहा है कि इन बकरों की 'ज़मानत' करानी पड़ेगी. उन्होंने बताया कि ये बकरे बूचड़खानों की बंदी के पहले ही ख़रीदे गए थे. बंदी के बाद इन्हें दुकान के स्टोर रुम मे रखा गया था. इन बकरो को उसी स्टोर रुम से पकड़ा गया.

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बबलू मंसूरी ने बताया कि उनकी दुकान कई साल पुरानी है. लेकिन, ऐसा पहली बार हुआ है जब बकरों को पकड़ा गया हो और उन्हें छुड़ाने के लिए वकील और कोर्ट का चक्कर लगाना पड़े.

बहरहाल, यह मामला पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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