You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
जब एक ट्रांसजेंडर मां बने तो क्या होता है?
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
"कोई भी माँ बन सकता है. एक किन्नर भी माँ हो सकती है. समलैंगिक औरत भी माँ हो सकती है. समलैंगिक आदमी भी माँ हो सकता है. क्यूंकि माँ प्यार और परवाह का नाम है."
यह कहना है मुंबई के मलाड इलाके में रहने वाली ट्रांसजेंडर गौरी सावंत का. गणेश से गौरी बनी ट्रांसजेंडर गौरी सावंत की कहानी भी दूसरे ट्रांसजेंडरों से काफ़ी मेल खाती है.
पुरुष रूप में जन्मे गणेश को बढ़ती उम्र के साथ यह समझ में आया कि वो भले ही बाहरी रूप में पुरुष दिखते हों, पर भीतर मन से वो एक महिला हैं.
गणेश ने अपने अस्तित्व के लिए परिवार से विरोध किया और घर छोड़कर मुंबई आकर अपने आप को गौरी सावंत में तब्दील कर लिया.
इसके बाद गौरी सावंत ने सामाजिक क्षेत्र में सेवा करना शुरू किया. सड़क के बच्चों के साथ काम करना शुरू किया और गौरी को महसूस हुआ कि बच्चों के साथ उसे वक़्त गुज़ारना बहुत अच्छा लगता है.
लेकिन गौरी का ट्रांसजेंडर होना उनके इस काम के आड़े आने लगा और गौरी को बच्चों के साथ काम करना बंद करना पड़ा.
गौरी ने फिर ऐसी संस्था में काम किया, जो महिलाओं के लिए काम करती थी. उसी दौरान एक सेक्स वर्कर से उनकी मुलाकात हुई जो गर्भवती थी. साथ ही एचआईवी संक्रमित भी.
वो सेक्स वर्कर अक्सर गौरी सावंत के दफ़्तर में आया करती थी. उसी दौरान गौरी सावंत के दफ़्तर से उसने नीबू के अचार की बर्नी भी चुराई.
फिर नींबू के अचार के इस किस्से ने गौरी सावंत और उस गर्भवती सेक्स वर्कर के बीच दोस्ती करा दी.
करीब पांच साल बाद उस सेक्स वर्कर की मृत्यु हो गई जिसकी पांच साल की बेटी गायत्री थी.
उस सेक्स वर्कर पर भारी कर्ज़ा होने के कारण कुछ कर्ज़दारों ने घर का टीवी उठा लिया, तो किसी ने कपड़े धोने की मशीन ले ली.
कर्ज़ के कारण परिवारजन उस पांच साल की बच्ची को पैसे के बदले कोलकाता के सोनागाछी में बेचने जा रहे थे.
गौरी को ये बर्दाश्त नहीं हुआ.
गौरी ने उसके परिवार वालों को समझाने की कोशिश की, पर किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी.
गायत्री की ज़िन्दगी बचाने के लिए गौरी सावंत ने ज़िम्मेदारी ले ली. वो बच्ची को अपने घर ले आईं. कुछ दिन दोनों साथ रहे, तो गायत्री को गौरी से लगाव हो गया.
हालांकि, गौरी के आसपास के लोगों को ये गवारा नहीं था. वो ट्रांसजेंडर लोगों की 'अलग दुनिया' का हवाला देकर गायत्री को गौरी से अलग करना चाहते थे.
इसी दौरान गौरी लगातार गायत्री के परिवार वालों को यह संदेश दे रही थीं कि गायत्री का कोई अभिभावक नहीं है, तो वो उसकी ज़िम्मेदारी किसी और को नहीं दे सकतीं.
गौरी से मिलने वाले अक्सर गायत्री के बारे में पूछते थे कि ये किसकी बच्ची है? गौरी जब कहती थी कि उसी की बच्ची है, तो लोग एक मुस्कुराहट देकर चले जाते. पर उस मुस्कराहट के पीछे ढेरों चुभते सवाल गौरी को नज़र आते थे.
गौरी को कई लोग ताने देते और कहते कि बच्चा कमाई का ज़रिया है या बुढ़ापे का सहारा. लोगों के ऐसे शब्द गौरी के दिल में नासूर छोड़ जाते.
इस बीच गौरी ने महसूस किया कि गायत्री में बदलाव शुरू हो गए हैं. उसके बात करने का तरीका बदल रहा था और उसकी चाल-ढाल बदल रही थी.
स्कूल के बच्चे भी गायत्री को "छोटा हिजड़ा" कहकर चिढ़ाने लगे थे. गायत्री को इन बातों का बहुत बुरा लगता था. उसे शर्मिंदगी महसूस होती थी.
जब गायत्री बड़ी होने लगी तो उसने जवाब देना सीख लिया, "हां, हूं मैं हिजड़ा."
स्कूल में एक बार जब गायत्री का एक लड़की के साथ झगड़ा हुआ तो गायत्री ने हिजड़ों की तरह ताली बजाना शुरू किया.
इस घटना के बाद गौरी को स्कूल बुलाया गया और कहा गया कि गायत्री स्कूल में नहीं पढ़ सकती, क्योंकि वो बच्चों को धमकी देती है कि उनके घर हिजड़े भेजेगी.
गौरी को महसूस हुआ कि घर में औरत की कमी के कारण गायत्री की एक लड़की की तरह परवरिश में कमी पड़ रही है.
काम की व्यस्तता के कारण गायत्री की पढ़ाई पर भी वो ध्यान नहीं दे पा रही थीं. तब गौरी ने अपने मातृत्व भावना पर अंकुश लगाकर गायत्री की अच्छी तालीम के लिए उसे मुंबई से दूर हॉस्टल में भेज दिया.
हालांकि, गायत्री को अपने से दूर भेजना गौरी के लिए मुश्किल भरा था.
बहरहाल, किशोरावस्था में पहुंच चुकी गायत्री अब सिर्फ छुट्टियों में हॉस्टल से घर आती है.
गौरी अब गायत्री को बस यही समझाती है कि गौरी के किन्नरजन ही उसका परिवार हैं और उसे दुनिया को साबित करना है कि वो ट्रांसजेंडर की बेटी है.
गायत्री ने गौरी को सरकारी दफ़्तर में बहुत चक्कर काटते देखा है. ट्रांसजेंडर समुदाय के सरकारी काम आसान करने के लिए गायत्री वकील बनना चाहती है.
हाल में रिलीज़ की गई 'विक्स' की शॉर्ट फ़िल्म में गौरी और गायत्री के अनोखे रिश्ते को दुनिया से रूबरू करवाया गया है.
गौरी का कहना है, "माँ कोई भी बन सकता है. एक किन्नर भी माँ हो सकती है. समाज को हर किसी को स्वीकार करना चाहिए और रिश्ते को उपनाम नहीं देना चाहिए."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)