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गाजे-बाजे के साथ हुई ट्रांसजेंडर की शादी
- Author, संदीप साहू
- पदनाम, भुवनेश्वर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
ट्रांसजेंडरों की शादियां कम ही होतीं हैं- सार्वजनिक रूप से, बाजे-गाजे के साथ तो बिलकुल नहीं.
यही कारण है कि 26 जनवरी, 2017 को जब भुवनेश्वर शहर के जाने माने लोगों समेत हज़ारों मेहमानों की उपस्थिति में 28 साल की ट्रांसजेंडर मेघना साहू की शादी 32 साल के सामान्य युवक वासुदेव नायक के साथ हुई तो लोग भौंचक्के रह गए.
ट्रांसजेंडरों के लिए काम कर रही संस्था 'ओडिशा किन्नर महासंघ' की मानें तो 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रांसजेंडरों को 'तीसरे लिंग' के रूप में स्वीकृति दिए जाने के बाद भारत में यह अपनी तरह की पहली शादी है.
शादी पूरी तरह से हिन्दू रीति रिवाज़ के अनुसार और एक हज़ार से अधिक लोगों की उपस्थिति में हुई.
अपने तरह की पहली शादी
दोनों परिवारों के रिश्तेदारों, आस-पड़ोस के लोगों के अलावा सामाजिक सुरक्षा विभाग के प्रमुख सचिव नितेन चंद्र, भुवनेश्वर के मेयर अनंत नारायण जेना, ट्रांसजेंडर संघ के कार्यकर्ता और कई सामाजिक कार्यकर्ता इस शादी में शरीक हुए.
मेघना के पति वासुदेव नायक की अपनी पहली पत्नी से तलाक़ हो चुका है और वो उनका एक चार साल का बेटा है. रोचक बात यह है कि मेघना और वासुदेव का परिचय और प्यार की शुरुआत फ़ेसबुक पर हुई जिस पर बाद में दोनों के घरवालों ने इस शादी के लिए हामी भरी.
हालांकि मेघना का 'कन्यादान' उनके एक शुभचिंतक बरदाप्रसन्न सतपथी ने किया जो उस अखबार के संपादक हैं जहां मेघना काम करती हैं.
मेघना ने बीबीसी को बताया कि शादी का प्रस्ताव पहले वासुदेव की ओर से आया था. वो कहती हैं, "एक दिन फ़ेसबुक पर चैट करते हुए जब उन्होंने शादी का प्रस्ताव रखा, तो मैंने उन्हें साफ़ कह दिया कि मैं छुपकर शादी नहीं करुँगी. अगर आप सचमुच मुझसे शादी करना चाहते हैं तो मेरे घर आकर मेरे माता-पिता से बात करें."
कई अफ़ेयर के बाद शादी
मेघना कहती हैं, "उन्होंने वही किया और मेरे घरवालों ने हामी भर दी. वैसे तो इससे पहले भी मेरे कइयों के साथ अफ़ेयर हो चुके थे, लेकिन वासुदेव पहले मर्द थे जिन्होंने शादी करने की हिम्मत दिखाई. उनकी यही बात मुझे अच्छी लगी और मैंने शादी के लिए हाँ कर दी."
मेघना के साथ बातचीत के दौरान एक नौजवान कमरे में आया तो उन्होंने बड़ी बेतक़ल्लुफी से उनसे मेरा परिचय करवाया और कहा, "ये भी कभी मेरा बॉयफ्रेंड हुआ करता था. इसने भी मुझे शादी के सब्ज़बाग दिखाए थे और आख़िर में मुकर गया." यह सुनकर लड़का बुरी तरह से झेंप गया.
एक सिक्योरिटी एजेंसी में काम करने वाले वासुदेव का कहना था कि मेघना द्वारा किए जा रहे सामजिक कार्य से वे काफी प्रभावित हुए और यही कारण है कि उन्होंने मेघना से शादी करने की इच्छा जाहिर की.
लेकिन मेघना से शादी करने का एक बड़ा कारण यह भी था की वह माँ नहीं बन सकती. "मेरी पत्नी के चले जाने के बाद शादी के कई प्रस्ताव आए लेकिन मैंने उन्हें ठुकरा दिया क्योंकि मुझे अपने बेटे की चिंता थी, जिसके लिए मैं माँ और पिता दोनों की भूमिका अदा कर रहा था."
मां नहीं बन पाने का कितना अफ़सोस?
तीन साल पहले मेघना ने दिल्ली में अपना सेक्स चेंज आपरेशन करवाया, लेकिन वह माँ नहीं बन सकतीं. क्या उन्हें बात का कोई अफ़सोस है?
मेघना कहती हैं, "बिलकुल नहीं. लाखों औरतें ऐसी हैं जो माँ नहीं बन सकतीं और मेरे पास तो एक बेटा है जिसे मैं जिंदगी भर और जी भर के प्यार दूंगी. "
मेघना ने बताया कि शादी से 15 दिन पहले ही वासुदेव ने अपने बेटे को उनके पास छोड़ दिया था और वह उनसे काफी घुलमिल गया है. इतने में फ़र्ज़ी शिकायत करते हुए वासुदेव ने कहा, "पहले तो मेरा बेटा एक पल मेरे बिना नहीं रहता था. लेकिन अब चौबीसों घंटे माँ माँ करता रहता है."
ट्रांसजेंडरों के बारे में जब लोग बात करते हैं तो अक्सर उनके मन में ट्रेनों, बसों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से पैसा मांगने की कोशिश कर रहे या देर रात सजधज कर लोगों को रिझाने की कोशिश करते हुए ट्रांसजेंडरों की छवि होती है.
लेकिन मेघना से मिलने के बाद यह धारणा बदलना लाज़मी है क्योंकि वह काफी पढ़ी-लिखी हैं और फर्राटे से अंग्रेजी और हिंदी दोनों बोल लेती हैं.
उन्होंने संबलपुर विश्वविद्यालय से एमबीए किया है और लाल्स पैथोलॉजिकल लैब में बतौर मार्केटिंग मैनेजर काम कर चुकी हैं. लेकिन बाद में उन्हें अपने पहनावे के कारण यह नौकरी छोड़नी पड़ी और फिर उन्होंने 'बज्रकीला' नाम के पाक्षिक अख़बार में पत्रकार की हैसियत से काम करना शुरू किया.
मेघना के संपादक बरदाप्रसन्न सतपथी मेघना के काम से काफी प्रभावित हैं. वे कहते हैं, "वह एक अच्छा इंसान और पत्रकार तो है ही, मुझे पूरा विश्वास है की वह एक अच्छी पत्नी और अच्छी माँ भी बनेगी. "
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