You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
केरल में खुला भारत का पहला ट्रांसजेंडर स्कूल
केरल के कोची शहर में ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए एक बोर्डिंग स्कूल खुला है.
सहज इंटरनेशनल नाम का यह स्कूल अपनी तरह का भारत में पहला स्कूल है.
इसमें 25-50 तक की उम्र के दस छात्र होंगे. इन छात्रों को दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार किया जाएगा.
वीडियो देखें-सेना में ट्रांसजेंडर
यह ख़बरें भी पढ़ें- एक शौचालय ट्रांसजेंडरों के लिए भी...
स्कूल की प्रमुख और ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता विजयराजा मल्लिका ने बीबीसी को बताया कि भारतीय समाज में ट्रांसजेंडरों को भेदभाव का शिकार होना पड़ता है और यही वजह है कि आधे से ज़्यादा ट्रांसजेंडर छात्र पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं.
मल्लिका ने कहा कि स्कूल की जगह ढूंढ़ते वक्त 700 लोगों ने उन्हें जगह देने से इनकार कर दिया था, लेकिन आख़िरकार उन्हें जगह मिल गई.
वो कहती हैं, "स्कूल का उद्देश्य ट्रांसजेंडरों को नौकरियों के लायक बनाना और सम्मानित जीवन जीने के लिए तैयार करना है."
उन्होंने बताया, "अब तक हमने चौदह में से छह उम्मीदवारों को दाख़िला दिया है. ये सभी पुरुषों से महिला बने लोग हैं. दस सीटों में से हमने एक सीट महिला से पुरुष बने उम्मीदवार और एक सीट विकलांग के लिए आरक्षित की है."
स्कूल केरल में है जो भेदभाव के ख़िलाफ़ ट्रांसजेंडर नीति अपनाने वाला भारत का पहला राज्य भी है.
इस संस्था का दावा है कि स्कूल के सभी छात्रों के रहने, खाने और अन्य ख़र्च संस्थान ही वहन करेगा.
यहां पढ़ाने वाले लोग भी ट्रांसजेंडर समुदाय से ही हैं.
हाल ही में भारत की पहली ट्रांसजेंडर प्रिंसिपल मनाबी बंद्योपाध्याय ने भेदभाव के आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
भारत में क़रीब बीस लाख ट्रांसजेंडर हैं. 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ट्रांसजेंडरों को भी बराबर के अधिकार प्राप्त हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)