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ट्रांसजेंडर कॉन्स्टेबल को है पोस्टिंग का इंतजार
- Author, आभा शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
गंगा कुमारी को राजस्थान की पहली 'ट्रांसजेंडर' कॉन्स्टेबल होने का गर्व है. लेकिन उनकी ख़ुशी आधी-अधूरी है, क्योंकि चयन के दो साल बाद भी उन्हें अब तक कहीं तैनात नहीं किया गया है.
उनके गृह ज़िले जालोर में उनके साथ भर्ती हुए 208 में से उनको छोड़कर सबकी पोस्टिंग दिसंबर 2015 में हो चुकी है. उन्होंने 2014 में कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा पास की और 2015 में इंटरव्यू और फिटनेस टेस्ट पास किए थे.
कोई जवाब नहीं
गंगा ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया, "पुलिस विभाग से लेकर मुख्य सचिव और दूसरे आला अफ़सरों को अपनी पोस्टिंग के लिए गुहार लगा चुकी हूँ. कोई राहत नहीं मिलने पर गत दिसंबर में राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी."
अदालत ने सरकार को जवाब देने के लिए तीन हफ़्ते का समय दिया था. तीन महीने बीत जाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला है.
राजस्थान के अतिरिक्त पुलिस महा निदेशक जंगा श्रीनिवास राव का कहना है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की नियुक्ति के सम्बन्ध में गृह विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही वे यह बताने की स्थिति में होंगे कि गंगा की नियुक्ति किस श्रेणी में की जाएगी.
गौर तलब है कि गंगा ने जब कांस्टेबल परीक्षा पास की थी तब ट्रांसजेंडर बिल को मंजूरी नहीं मिली थी और राजस्थान सहित कई राज्यों में ट्रांसजेंडरों की भर्ती को लेकर साफ़ नियम नहीं बने हुए हैं.
गंगा का कहना है- "पोस्टिंग के लिए मना तो नहीं किया जा रहा. कहते हैं मिलेगी ज़रूर, मगर कब, इसका जवाब कोई नहीं देता."
रानीवाड़ा गाँव की 24 बरस की गंगा छह भाई बहिनों में सबसे छोटी हैं और वे स्नातक हैं. अपनी पोस्टिंग का इंतजार करते हुए वे फ़िलहाल अपने भाई की फार्मेसी पर उनकी मदद करती हैं.
वो खुद को खुश किस्मत मानती हैं कि ट्रांसजेंडर होने के बावजूद उन्हें परिवार, गाँव या समाज में कभी कोई परेशानी या भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा.
यह पहला मौका है जब उन्हें परीक्षा और इंटरव्यू पास पर लेने के बावजूद पोस्टिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
उनके वकील तेजाराम ने बताया, "हमने हाई कोर्ट से गंगा को जल्दी से जल्दी नियुक्ति और भर्ती हुए अन्य लोगों की ही तरह सारे लाभ देने की अपील की है."
नए ट्रांसजेंडर कानून के तहत सभी किन्नरों को अपनी भावना के हिसाब से खुद को "पुरुष या स्त्री" श्रेणी में रखने की छूट है.