दिल्ली: बीजेपी चौड़ी हुई, आप ने ईवीएम को कोसा

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दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने साफ़ बहुमत हासिल किया है.
ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़ कुल 270 सीटों में से भाजपा को 181 सीटें मिली हैं.
अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को सिर्फ़ 48 सीटें मिल पाई हैं और वो दूसरे नंबर पर रही जबकि कांग्रेस 29 सीटें ही हासिल कर पाई और तीसरे नंबर पर रही. 12 सीटें अन्य पार्टियों के खाते में गईं.

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मगर आम आदमी पार्टी ने नतीजों को लेकर एक बार फिर ईवीएम पर निशाना साधा है.
वहीं कांग्रेस की हार के बाद दिल्ली के पार्टी प्रदेशाध्यक्ष अजय माकन ने अपने पद से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की है.
उन्होंने साथ ही कहा कि चुनाव आयोग को ईवीएम को लेकर जारी शंकाओं को दूर करना चाहिए.
माकन ने कहा,"अगर हम ईवीएम पर विश्वास नहीं कर सकते, तो चुनाव आयोग पर करना चाहिए".

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ईवीएम पर निशाना
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया है कि 'बीजेपी ने 2009 का चुनाव हारने के बाद पाँच साल तक ईवीएम पर रिसर्च कर महारत की और आज उसी के दम पर चुनाव जीत रही है.'

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पार्टी नेता गोपाल राय ने भी कहा है कि ये ईवीएम लहर है, मोदी लहर नहीं.

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भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पार्टी की विकास की राजनीति की जीत बताया है.
दिल्ली में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने चुनाव में जीत का दावा करते हुए इस जीत को सुकमा में मारे गए शहीदों को समर्पित किया है.मनोज तिवारी ने साथ ही मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से इस्तीफ़े की भी माँग की है.
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि दिल्ली नगर निगम पार्टी के परिणामों ने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के विजय रथ को और आगे बढ़ाया है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने बहानों और आरोपों की राजनीति को नकार कर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली विकासशील राजनीति में विश्वास व्यक्त किया है.

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आम आदमी पार्टी से अलग होने के बाद स्वराज इंडिया पार्टी बनाने वाले नेता योगेंद्र यादव ने नतीजों पर बीजेपी को बधाई दी है.
महत्वपूर्ण चुनाव
एमसीडी चुनाव के नतीजों पर केवल दिल्लीवासियों की ही नहीं, दिल्ली के बाहर भी खासी उत्सुकता थी.
कौतूहल इस बात का था कि चुनाव में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहता है?
पार्टी के लिए दिल्ली नगरपालिका का चुनाव अस्तित्व की नहीं, तो कम-से-कम प्रतिष्ठा की लड़ाई अवश्य बन गई थी.
पार्टी ने 2015 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतकर पूरे देश की राजनीति में सनसनी फैला दी थी और एमसीडी चुनाव में इस बात की उत्सुकता थी कि दिल्ली पर आप की पकड़ है या नहीं.
इसके साथ ही देखना ये भी था कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी की जिस तरह की लहर पिछले महीने हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में दिखी थी, वो दिल्ली में भी बरक़रार रहती है कि नहीं.

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कांग्रेस किस हाल में?
भाजपा के लिए ये चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि एमसीडी पर वो पिछले 10 साल से काबिज़ है और ऐसे में उसके सामने विरोधियों के साथ-साथ सत्ताविरोधी लहर का भी सामना करने की चुनौती बनी हुई थी.
नज़र कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी थी, क्योंकि वो हाल ही में दिल्ली की रजौरी विधानसभा सीट के उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को पीछे छोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी के बाद दूसरे नंबर पर आ गई थी.
उसके इस प्रदर्शन को दिल्ली में कांग्रेस का असर बढ़ने के एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा था.
दिल्ली महानगरपालिका की 272 सीटों में से 270 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान हुआ था.
प्रत्याशियों की मौत की वजह से दो सीटों पर चुनाव स्थगित करना पड़ा था.
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